कोटा। शहर में निजी बिजली फ्रेंचाइजी कंपनी केईडीएल की कार्यप्रणाली और वित्तीय अनियमितताओं के विरुद्ध राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देशों पर गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने शनिवार को भी नयापुरा पावर हाउस में विशेष जनसुनवाई शिविर का आयोजन किया। इस दौरान उपभोक्ताओं का भारी आक्रोश देखने को मिला। जिन्होंने कंपनी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर साक्ष्य पेश किए।
राजस्थान ऊर्जा विकास एवं आईटी लिमिटेड के निदेशक (वित्त) डीके जैन की अध्यक्षता में गठित इस समिति में आरवीपीएनएल के निदेशक (संचालन), आरयूवीआईटीएल के अधीक्षण अभियंता और जेवीवीएनएल के अधिशाषी अभियंता (IA) शामिल हैं। यह समिति ऊर्जा विभाग के उस विशेष आदेश के तहत केईडीएल की गतिविधियों और वित्तीय ढांचे की गहनता से पड़ताल कर रही है।
जांच समिति के अध्यक्ष डीके जैन ने उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना और साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर लिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्राप्त शिकायतों और वित्तीय गड़बड़ियों के प्रमाणों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। ऊर्जा मंत्री के कड़े रुख से स्पष्ट है कि यदि केईडीएल के खिलाफ अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो कंपनी के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
ये शिकायतें आईं सामने
- वित्तीय अनियमितताएं: बिल जमा होने के बावजूद बकाया दिखाना, अनावश्यक सरचार्ज, भारी पेनल्टी, और पीएम सूर्यघर योजना की सब्सिडी राशि का अटकना।
- अवैध वसूली व भ्रष्टाचार: सोलर मीटर लगवाने के नाम पर रिश्वत की मांग, अनुचित डिमांड नोट जारी करना और सुरक्षा राशि वापस न करना।
- तकनीकी व सेवा संबंधी लापरवाही: बिना नोटिस कनेक्शन काटना, ट्रांसफार्मर व एलटी लाइन शिफ्टिंग में देरी, और बार-बार होने वाली ट्रिपिंग।
- कर्मचारियों का व्यवहार: उपभोक्ता संजय सहित कई लोगों ने केईडीएल कर्मचारियों द्वारा दुर्व्यवहार और उपभोक्ताओं के साथ किए जाने वाले अनुचित आचरण की शिकायत की।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने सौंपा मांग पत्र
इस बीच, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन (मड़िया) ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर नए कनेक्शनों में हो रही अत्यधिक देरी पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ’24 घंटे में बिजली कनेक्शन’ देने के वादे के विपरीत, कोटा में उपभोक्ताओं को एक-एक महीने तक इंतज़ार करना पड़ रहा है।
जैन ने मांग की है कि आवेदन प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत किया जाए। वर्तमान में पूरे शहर के आवेदन केवल पुरानी सब्जी मंडी स्थित एक ही कार्यालय पर लिए जा रहे हैं, जिससे भारी वर्कलोड बढ़ गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोटा के सभी 11 उपखंडों पर आवेदन लेने और वहीं से कनेक्शन जारी करने की व्यवस्था बहाल की जाए ताकि आमजन को राहत मिल सके।
व्यापारियों ने भी रखी बात
जनरल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार जैन ने कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड में व्याप्त बिजली समस्याओं पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने अकारण कटौती, ट्रांसफार्मर में फाल्ट और वोल्टेज की समस्या के साथ-साथ विभाग के कर्मचारियों द्वारा गलत रीडिंग और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। जीएमए ने केईडीएल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर तकनीकी और व्यवहारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं।
उन्होंने बताया कि बिजली गुल होने की शिकायत के बाद भी दिन भर आपूर्ति बहाल नहीं होती और अघोषित कटौती से व्यापार ठप हो रहा है। व्यापारियों ने ट्रांसफार्मर में चिंगारियां उठने, तकनीकी फाल्ट का समाधान न होने, कर्मचारियों द्वारा गलत रीडिंग लेने और उपभोक्ताओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगाकर तुरंत सुधार की मांग की है।
केईडीएल के भ्रष्टाचार से मुक्त करने की अपील
जिला पंचायत समिति (लाडपुरा) के सदस्य कुलदीप नागर ने राजस्थान सरकार के ऊर्जा विभाग के जांच अधिकारी को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपकर कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पत्र में नागर ने स्पष्ट किया है कि सितंबर 2016 से जब से KEDL ने कोटा में कार्यभार संभाला है, तब से सरकारी नियमों और तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर जनता का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
कुलदीप नागर ने कुल 13 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर साक्ष्य सहित जांच की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से KEDL द्वारा जारी किए गए श्रेणीवार कनेक्शनों की संख्या और उनसे प्राप्त की गई मांगपत्र राशि का विवरण मांगा गया है।
आरोप है कि मांगपत्रों की राशि को कम या ज्यादा करके दोबारा जारी किया गया है, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता का संकेत देता है। इसके अलावा, पुरानी स्थापित लाइनों को शिफ्ट करने या डिसमेंटल करने की प्रक्रिया में भी भारी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
जांच पत्र में नई विद्युत लाइनें बिछाने में उपयोग किए गए मटेरियल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। नागर ने इन मटेरियल की NABL/CTL रिपोर्ट की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या घटिया सामग्री का उपयोग कर जनता की सुरक्षा से समझौता किया गया है।
1 सितंबर 2016 से अब तक तैयार की गई वीसीआर और उनके निस्तारण की प्रतियों की मांग करते हुए उन्होंने कंपनी की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने की बात कही है। पत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सरकारी संपत्ति (JVVNL) के उपयोग से जुड़ा है।
आरोप है कि KEDL को जो सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर सौंपा गया था। उसका रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है। साथ ही, 132 केवी जीएसएस और केशोराय पाटन लाइन के संबंध में दिए गए निर्देशों की पालना न होने पर भी जवाब मांगा गया है।

