Sunday, July 12, 2026
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रिजर्व बैंक ने कायम रखा 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष (2016-17) के लिए 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान को कायम रखा है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।

वित्त वर्ष 2017-18 में मौद्रिक नीति की पांचवीं द्विमासिक समीक्षा में कहा कि दूसरी तिमाही की वृद्धि दर अक्‍टूबर की समीक्षा में लगाए गए अनुमान से कम है।

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि से कंपनियों के मार्जिन और सकल मूल्यवर्धित (जीवीए) वृद्धि दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक ने अक्‍टूबर की समीक्षा में 2017-18 के लिए जीवीए वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

इसे कायम रखा गया है क्योंकि जोखिम समान रूप से संतुलित हैं। समीक्षा में कहा गया है कि खरीफ उत्पादन और रबी की बुआई में कमी से कृषि क्षेत्र के परिदृश्य के नीचे की ओर जाने का जोखिम है।

यदि सकारात्मक पक्ष देखा जाए तो हालिया महीनों में ऋण की वृद्धि दर कुछ तेज हुई है। इसमें कहा गया है कि इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुन:पूंजीकरण से भी ऋण का प्रवाह बढ़ेगा। रीयल एस्टेट जैसे सेवा क्षेत्र के कुछ क्षेत्रों में कमजोरी देखी जा रही है।

समीक्षा में कहा गया है कि सेवा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र चौथी तिमाही में मांग, वित्तीय स्थितियों तथा कुल कारोबारी परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद कर रहा है।

केंद्रीय बैंक ने उम्मीद के अनुरूप महत्त्वपूर्ण नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया है, लेकिन चालू वित्त वर्ष के शेष बचे समय के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 4.3 से 4.7 प्रतिशत कर दिया है।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल की अगुवाई वाली छह सदस्‍यी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रीपो दर को छह प्रतिशत तथा रिवर्स रीपो दर को 5.75 प्रतिशत पर कायम रखा है।

तय समय से पहले ही हो जाएगा आइडिया-वोडाफोन मर्जर

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कोलकाता। आइडिया-वोडाफोन का मर्जर अब और पहले हो जाएगा। वोडाफोन ग्रुप के सीईओ वितारियो कोलाओ ने हाल ही में इस ओर इशारा किया। इसके मुताबिक, अब मर्जर के लिए पहले से तय सितंबर 2018 की समय-सीमा घटकर मार्च-अप्रैल 2018 हो सकती है।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अपने एक नोट में आइडिया सेल्युलर लीडरशिप के साथ मीटिंग का हवाला देते हुए कहा, ‘मैनेजमेंट को उम्मीद है कि मार्च-अप्रैल 2018 तक मर्जर के लिए जरूरी सभी अप्रूवल्स मिल जाएंगे।’ इकनॉमिक टाइम्स को इस नोट की एक कॉपी हाथ लगी है।

देश की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी क्रमशः वोडाफोन इंडिया और आइडिया के विलय के बाद यह देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी हो जाएगी जिसके पास 40 करोड़ कस्टमर होंगे और रेवेन्यू मार्केट शेयर 41 पर्सेंट होगा।।

विलय के लिए कोर्ट और टेलिकॉम डिपार्टमेंट के अप्रूवल्स अब तक नहीं मिले हैं जबकि एंटि-ट्रस्ट बॉडी कॉम्पिटिशन कमिशन ऑफ इंडिया ने हरी झंडी दे दी है।

वोडाफोन-आइडिया के विलय से बनी नई कंपनी की लागत में पहले-पहल 2,700 करोड़ रुपये की बचत होगी। हालांकि नई कंपनी को विलय के लिए एग्जिट पेनल्टी भी देनी होगी।

वोडाफोन और आइडिया के साथ आने के बाद बनने वाली कंपनी अपने साइज के दम से रिलायंस जियो इन्फोकॉम का मजबूती से मुकाबला कर पाएगी, जिसने देश के टेलिकॉम मार्केट में हलचल मचा रखी है।

जियो इन्फोकॉम ने पिछले साल सितंबर से इस साल मार्च तक अपने ग्राहकों को मुफ्त में वॉयस और डेटा ऑफर किया था। इससे दूसरी टेलिकॉम कंपनियों पर बहुत दबाव बना और माना जा रहा है कि इसी वजह से वोडाफोन और आइडिया ने मर्जर का फैसला किया है।

वरुण धवन के साथ जमकर नाचीं माधुरी दीक्षित

मुंबई/ कोटा। 80 और 90 के दशक में सबसे ज्यादा जुबान पर चढ़ने वाले सॉन्ग में से एक ‘तम्मा तम्मा’ आज भी आपको थिरकने के लिए मजबूर करने का दम रखता है। फिल्म थानेदार के इस ‘तम्मा तम्मा’ सॉन्ग को गाया था बप्पी दा और अनुराधा पौंडवाल ने और इस पर जमकर नाची थीं माधुरी दीक्षित।

इसके बाद करण जौहर की फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ के लिए इस गाने का रीमेक भी तैयार हुआ, जिसमें नज़र आए वरुण धवन और आलिया भट्ट। फिलहाल सोशल पर एक विडियो काफी चल रहा, जिसमें वरुण धवन के साथ माधुरी दीक्षित डांस कर रही हैं और यकीन मानिए यहां माधुरी एक बार फिर अपनी फुल एनर्जी के साथ दिख रहीं।

माधुरी और वरुण ने यहां वैसा ही जादू चलाया है जैसा कि 27 साल पहले ऐक्ट्रेस ने अपने फैन्स पर चलाया था। पहली बार साथ में स्टेज शेयर कर रहे इन कलाकारों ने अपना यह जलवा स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स में दिखाया। इसके अलावा माधुरी ने अपने कुछ हिट सॉन्ग पर भी डांस किया, जिसमें ‘चोली के पीछे’ गाना भी शामिल था।

ज्ञातव्य की इस ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ फिल्म की शूटिंग कोटा , जयपुर , झाँसी, मुंबई और सिंगापुर में हुई थी। इस फिल्म को सबसे ज्यादा दो करोड़ रुपये का बिजनेस भी कोटा से ही मिला था।

कमजोर रुख के साथ खुला सेंसेक्स, निफ्टी 10100 से नीचे

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक की क्रेडिट पॉलिसी से पहले भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 68 अंक की गिरावट के साथ 32734 के स्तर पर और निफ्टी 37 अंक की कमजोरी के साथ 10080 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

नेश्नल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप इंडेक्स में 0.41 फीसद और स्मॉलकैप में 0.09 फीसद की कमजोरी देखने को मिल रही है।अतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के चलते तमाम एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है।

जापान का निक्केई 0.90 फीसद की कमजोरी के साथ 22419 के स्तर पर, चीन का शांघाई 0.60 फीसद की कमजोरी के साथ 3283 के स्तर पर, हैंगसैंग 0.97 फीसद की कमजोरी के साथ 28563 के स्तर पर और कोरिया का कोस्पी 0.55 फीसद की कमजोरी के साथ 2496 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

सरकार ने निर्यातकों को दिया 8450 करोड़ का भारी तोहफा

नई दिल्ली । विदेश व्यापार नीति की मध्यावधि समीक्षा करते हुए सरकार ने निर्यातकों को भारी भरकम 8,450 करोड़ रुपये का तोहफा दिया है।  निर्यातकों को यह तोहफा मर्केडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआइएस) के तहत प्रोत्साहन की दर दो प्रतिशत बढ़ाकर दिया गया है।

खास बात यह है कि सरकार के इस फैसले से चमड़ा, हस्तशिल्प, कारपेट, खेल, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे रोजगार देने वाले क्षेत्रों को फायदा होगा। विदेश व्यापार नीति 2015 से 2020 की अवधि के लिए है।

इस नीति की मध्यावधि समीक्षा की जानकारी देते हुए वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि इस नीति का मकसद प्रक्रिया को सरल बनाकर निर्यातों को प्रोत्साहन देना, उच्च रोजगार देने वाले क्षेत्रों को मदद मुहैया कराना, जीएसटी के फायदे पहुंचाना, सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहन और अत्याधुनिक विश्लेषण प्रणाली के जरिये निर्यात बढ़ाना है।

सरकार ने एमईआइएस के तहत प्रोत्साहन की दर दो प्रतिशत बढ़ायी है। प्रभु ने ट्वीट कर कहा कि इस निर्णय से सालाना प्रोत्साहन राशि 34 प्रतिशत बढ़कर 8450 करोड़ रुपये हो जाएगी।

प्रभु ने कहा कि विदेश व्यापार नीति का फोकस नए बाजार की तलाश और परंपरागत बाजारों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर रहेगा। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक वैल्यू चेन में भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विदेश व्यापार नीति से हर साल चमड़ा उत्पाद निर्यातकों को करीब 749 करोड़ रुपये, हैंडमेड कारपेट और जूट उत्पादों को 921 करोड़ रुपये, कृषि उत्पादों को 1354 करोड़ रुपये, मैरीन उत्पादों को 759 करोड़ रुपये और इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जो को 369 करोड़ रुपये व मेडिकल उपकरण निर्यातकों को 193 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का लाभ होगा।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सरकार गारमेंट क्षेत्र के उत्पादों के लिए निर्यात प्रोत्साहन की दर दो फीसदी से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर चुकी है। माना जा रहा है कि इससे गारमेंट निर्यातकों को 2743 करोड़ रुपये का लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि कृषि वस्तुओं के निर्यात पर भी सरकार का फोकस है ताकि किसानों की आय बढ़ायी जा सके। जीएसटी का जिक्र करते हुए प्रभु ने कहा कि इससे निर्यात क्षेत्र में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि निर्यात क्षेत्र की बेहतरी दिखने लगी है। बीते 14 महीने में निर्यात वृद्धि सकारात्मक रही है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने एक अप्रैल 2015 को विदेश व्यापार नीति घोषित की थी। इसके तहत 2020 तक निर्यात बढ़ाकर 900 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही इसमें वैश्विक निर्यातों में भारत की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य भी है।

रेलवे अब टिकटों के कैशलेस पेमेंट पर देगा इंसेंटिव

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नई दिल्ली। इंडियन रेलवे टिकटों के लिए कैशलेस मोड से पेमेंट करनेवालों को जल्द इंसेंटिव देगा। रेलवे पहले से डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए मंथली ट्रैवल पास बनवानेवालों को 0.5 फीसदी का डिस्काउंट दे रहा है।

गैर-आरक्षित श्रेणी में इसी तरह की सुविधा दी की जा सकती है। बाकी इंसेंटिव में कैशलेस के जरिए टिकट खरीदनेवालों को फ्री पैसेंजर इंश्योरेंस दिया जा सकता है।

रेल बोर्ड के मेंबर (ट्रैफिक) मोहम्मद जमशेद ने ईटी को बताया, ‘हम यथासंभव कैश का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। लिहाजा, पैसेंजर्स के लिए कुछ इंसेंटिव दिए जा रहे हैं।’

रेलवे को आईआरसीटीसी के जरिये टिकट खरीदने पर सर्विस चार्ज खत्म किए जाने के कारण रेलवे को सालाना 400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

फिलहाल, पैसेंजर सेगमेंट में 60 फीसदी सालाना ट्रांजैक्शंस कैशलेस होता है। नोटबंदी के बाद इसमें 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। नवंबर 2016 से पहले ज्यादातर डिजिटल ट्रांजैक्शन आईआरसीटीसी पोर्टल के जरिए होते थे।

नोटबंदी के बाद रेलवे ने टिकट काउंटरों पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन मुहैया कराकर डिजिटल वॉलिट के जरिए पेमेंट स्वीकार करना शुरू किया था। रेलवे अपने सभी 15,000 टिकट काउंटरों पर पॉइंट ऑफ सेल मशीन मुहैया करा रहा है।

रेलवे ने अब अपने टोटल पेमेंट का 85-90 फीसदी हिस्से को कैशलेस ट्रांजैक्शन बनाने का टारगेट तय किया है। रेलवे को पैसेंजरों से सालाना 48,000 करोड़ का रेवेन्यू मिलता है और उसके फ्रेट सेगमेंट के 95 फीसदी ट्रांजैक्शंस पहले ही कैशलेस हैं।

जमशेद ने बताया, ‘पहले हमारे ज्यादातर कैशलेस ट्रांजैक्शन आईआरसीटीसी के जरिए आते थे। हालांकि अब भी यही मामला है, लेकिन हमने बिना रिजर्वेशनवाले टिकट काउंटरों कार्ड और भीम ऐप से पेमेंट स्वीकार करना शुरू किया है।

रेलवे को इससे फायदा हो रहा है क्योंकि हम कैश हैंडल करने की लागत कम कर रहे हैं।’रेलवे ने बैंकों से भी अनुरोध किया है कि वे रेल टिकट के लिए डिजिटल पेमेंट पर चार्ज में कटौती करें।

रेलवे का कहना है कि अगर बैंक चार्ज में कटौती या इसे खत्म करते हैं तो उन्हें और बिजनस दिया जाएगा। रेलवे का कहना है कि इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा और बैंकों को भी फायदा होगा।

अब आपके यूटिलिटी बिल भी भरेगा गूगल “तेज”

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नई दिल्‍ली। गूगल की डिजिटल भुगतान ऐप तेज के जरिये अब बिजली, पानी, मोबाइल व इंटरनेट जैसे बिलों का ऑनलाइन भुगतान भी किया जा सकेगा। गूगल ने इसके लिए टाटा पावर, एयरटेल एमटीएनएल व डिशटीवी सहित 17 कंपनियों से गठजोड़ किया है।

गूगल ने अपने सालाना कार्यक्रम गूगल फोर इंडिया के तीसरे संस्करण में आज यहां यह घोषणा की। गूगल के उपाध्यक्ष सीजर सेनगुप्ता ने कहा कि तेज में बिलों के भुगतान की सुविधा आने वाले कुछ सप्ताह में शुरू कर दी जाएगी।

कंपनी ने तेज ऐप इसी साल 18 सितंबर को पेश की थी और उसका कहना है कि यूपीआई आधारित इस ऐप के उपयोक्‍ताओं की संख्या 1.2 करोड़ से अधिक हो गई है। देश में तेज के जरिये 14 करोड़ से ज्यादा लेनदेन हो चुके हैं।

सेनगुप्ता ने कहा कि टाटा पावर, एयरटेल, टाटा डोकोमो, एमटीएनएल, डिशटीवी व एक्ट सहित 70 से अधिक कंपनियों की सेवाओं के बिलों का भुगतान गूगल तेज के जरिये किया जा सकेगा। कंपनी तेज में इस फीचर को अगले महीने क्रमिक आधार पर जोड़ेगी।

ई- मित्र संचालकों को भी देनी होगी ऑनलाइन परीक्षा

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कोटा। राज्य सरकार अब ई-मित्र संचालकों की प्रवेश परीक्षा लेने जा रही है। पास हुए तो ही वे अपना कियोस्क चला सकें गे। इस परीक्षा में लगातार तीन बाद फेल होने वाले संचालकों का ई-मित्र लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। परीक्षा ऑनलाइन होगी।

हालांकि सरकार ई-मित्र संचालकों को प्रोत्साहित करने के लिए यह परीक्षा आयोजित करवा रही है। सरकार का मानना है कि कियोस्क पर तीन सौ तरह की सर्विसेज देने की बात कही जाती है, लेकिन आधी सर्विसेज भी नहीं मिलती है।

इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि कई संचालक ऐसे है जिन्हें सुविधाओं की जानकारी नहीं है। ऐसे में सरकार ने सभी ई-मित्र कियोस्क संचालकों की परीक्षा करवाने का निर्णय लिया है, ताकि आमजन को सुविधाएं मिल सके।

इन्हें देनी होगी परीक्षा
कोटा जिले के 1919 ई-मित्र कियोस्क संचालित है। जिन्हें इस परीक्षा से गुजरना होगा। इसके अलावा नए कियोस्क के लिए एप्लाई करने वाले ई-मित्र संचालकों को भी परीक्षा के दौर से गुजरना होगा।

यह रहेगा परीक्षा का टाइम शेड्यूल
सरकार ने ई-मित्रों की परीक्षा के लिए अलग-अलग जिलों में ई-मित्र संचालकों की ऑनलाइन परीक्षा का टाइम शेड्यूल जारी कर दिया है। कोटा जिले में 9 व 10 दिसम्बर तथा 16 व 17 दिसम्बर को यह परीक्षा होगी।

परीक्षा का समय दोपहर 1 से 2 व 3 दोपहर से शाम 4 बजे तक का रहेगा। पांच दिसम्बर तक एप्लाई का अवसर प्रदान किया गया था।

दो चरण में परीक्षा, मिलेंगे अवसर
पहले चरण में 100 ऑब्जेटिव प्रश्नों के जवाब देने होंगे। पास होने पर छह माह बाद मेन परीक्षा होगी। इसमें कम्प्यूटर के बेसिक सवाल व सरकार की योजनाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।

इसमें पास होने के लिए कियोस्क धारकों को तीन अवसर मिलेंगे। पहले अवसर में फेल होने पर दूसरा अवसर मिलेगा। अगर इसमें कियोस्क धारण 30 प्रतिशत से कम अंक तो तीसरा अवसर नहीं मिलेगा और उसका ई-मित्र कियोस्क निलंबित कर दिया जाएगा।

नहीं तो एलएसपी रहेगी निशाने पर
सरकार की ओर से ली जाने वाली परीक्षा में यदि किसी एलएसपी के कियोस्क में से 50 प्रतिशत संचालक परीक्षा में फेल हो जाते है तो सरकार उस एलएसपी को भी हटा देगी। ऐसे में अब इस परीक्षा में एलएसपी की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग कोटा असिटेंड प्रोग्रामर धीरज कुमार यादव का कहना है कि सरकार की योजना का आमजन को लाभ मिले। इसी उद्देश्य को लेकर ई-मित्रों कियोस्क धारकों की ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसका टाइम शेड्यूल जारी कर दिया है। यदि कोई कियोस्क धारक फेल होता है तो इसकी जिम्मेदारी एलएसपी पर रहेगी।

एमपीसी की बैठक शुरू, रेपो रेट में कटौती पर फैसला आज

विशेषज्ञों ने कहा, रिजर्व बैंक का महंगाई दर नियंत्रण पर ध्यान

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की दो दिन की बैठक मंगलवार को शुरू हुई। इस बीच, कई विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा, क्योंकि उसका मुख्य ध्यान मुद्रास्फीति के नियंत्रण पर है। एमपीसी की दो दिन की बैठक के नतीजे बुधवार को आएंगे।

यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकिरण राय ने कहा कि केंद्रीय बैंक यथास्थिति कायम रखेगा। प्रणाली में तरलता काफी निचले स्तर पर है। जमा पर ब्याज दरें मजबूत हो रही हैं और मुद्रास्फीति को लेकर चिंता है।

क्रेडिट रेटिंग कंपनी इक्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक मुख्य नीतिगत दर को छह फीसदी पर कायम रखेगा, क्योंकि ऐसी संभावना है कि आगामी महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति मजबूत होगी।

एमपीसी की बैठक ऐसे समय हो रही है जबकि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में छह महीने के उच्चस्तर 3.59 फीसदी पर पहुंच गई है। इस दौरान अक्टूबर के लिए खुदरा मुद्रास्फीति सात माह के उच्चस्तर 3.58 फीसदी पर पहुंच गई।