Monday, July 13, 2026
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लाइटकॉइन ने सालभर में दिया 5700% रिटर्न

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नई दिल्ली। डिजिटल करंसी लाइटकॉइन ने आईओटीए को हटाकर क्रिप्टोकरंसी लिस्ट में चौथा स्थान हासिल कर लिया। मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में लिटकॉइन बिटकॉइन, इथेरियम और बिटकॉइन कैश के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरंसी बन गई है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 0.88 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ लिटकॉइन 16,313 रुपये के आसपास ट्रेड कर रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लिटकॉइन की कीमत करीब 253 डॉलर है। सालाना आधार पर 12 दिसंबर तक लिटकॉइन की कीमत 5700 प्रतिशत उछल गई जबकि इस दौरान बिटकॉइन को महज 1550 प्रतिशत मजबूत हुई थी।

आईओटीए और रिपल का मार्केट कैपिटलाइजेशन क्रमशः 0.75 लाख और 0.67 लाख करोड़ रुपये है। आईओटीए 270.59 रुपये जबकि रिपल 17.28रुपये के आसपास ट्रेड कर रही थी। बिटकॉइन और इथेरियम के बाद आईओटीए तीसरी पीढ़ी के ब्लॉकचेन का प्रतिनिधित्व करती है। यह कोई सामान्य ब्लॉकचेन नहीं, बल्कि पूरी तरह नया कॉन्सेप्ट है। स्टार ऑफ द ईयर बिटकॉइन की कीमत 10.73 लाख रुपये के करीब है।

सेंसेक्स में 227 अंकों की गिरावट, निफ्टी भी नीचे

मुंबई। औद्योगिक उत्पादन, मुद्रास्फीति के आंकडे़ आने से पहले मंगलवार को शेयर बाजारों में सुस्ती देखी गई। सेंसेक्स 227.80 अंक टूटकर 33,227.99 अंक पर बंद हुआ।

निफ्टी भी 82.10 अंक टूटकर 10,240.15 पर बंद हुआ। एशियाई बाजारों में मिलेजुले रुख और वृहद आर्थिक प्रभाव वाले आंकडे़ जारी होने से पहले शेयर बाजार में सतर्कता रही, जिससे शुरुआत ही कमजोर रही।

बंबई शेयर बाजार का 30-कंपनी शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक कारोबार की शुरुआत में 94.02 अंक यानी 0.28 प्रतिशत गिरकर 33,361.77 अंक पर रहा। पिछले तीन सत्रों में लगातार तेजी के साथ संवेदी सूचकांक में 858.61 अंकों की बढ़त दर्ज की गई थी।

मंगलवार को बैंकिंग, बिजली और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी 10,300 के स्तर से नीचे चला गया। कारोबार की शुरुआत में यह 30.40 अंक नीचे गिरकर 10,291.85 पर रहा।

गौरतलब है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और खुदरा मुद्रास्फीति के आंकडे़ जारी होने वाले हैं। इससे पहले कारोबारियों ने प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बिकवाली की।

उधर, अमेरिका में फेडरल रिजर्व की मौद्रिक समीक्षा बैठक शुरू हो गई है। उम्मीद की जा रही है कि वह ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है।

कारोबार की शुरुआत में हॉन्ग कॉन्ग का सूचकांक 0.55 प्रतिशत गिरा गया जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक 0.57 प्रतिशत लुढ़क गया था।

भारत की 60 करोड़ आबादी गरीबी रेखा से नीचे: सुरेश प्रभु

नई दिल्ली । विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर विकसित और विकासशील देश अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। इसे देखते हुए दोनों पक्षों के बीच किसी साझा एजेंडे पर सहमति बनने की संभावना कम है।

रविवार को यहां 164 सदस्य देशों की चार दिवसीय 11वीं मंत्रिस्तरीय बैठक शुरू हुई। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु कर रहे हैं।

प्रभु का जोर सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण सीमा के मुद्दे का स्थायी समाधान निकाले जाने पर है। भारत में खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह मुद्दा बेहद अहम है। इस बैठक में विकासशील देश विकसित मुल्कों के उन प्रयासों का खुलकर विरोध करेंगे, जिनके जरिये वे दोहा डेवलपमेंट एजेंडे (डीडीए) को औपचारिक तौर पर एक किनारे रख देना चाहते हैं।

विकसित देश ई-कॉमर्स जैसे नए मुद्दों को वार्ता की मेज पर लाने की तैयारी में हैं। प्रभु ने इसके खिलाफ विकसित देशों को चेताया है।  उन्होंने कहा कि ये मुद्दे न तो व्यापार से संबंधित हैं और न ही इन पर विस्तार में कोई चर्चा हुई है। उन्होंने अमेरिका के इस रवैये का भी विरोध किया जिसके तहत वह डब्ल्यूटीओ से भारत जैसे विकासशील देशों को मिलने वाली तरजीह को खत्म कराना चाहता है।

प्रभु के मुताबिक भले ही भारत की विकास दर काफी तेज है, फिर भी उसकी 60 करोड़ आबादी गरीबी की रेखा के नीचे गुजर-बसर करती है। मौजूदा विश्व व्यापार नियमों के तहत किसी सदस्य देश का खाद्य सब्सिडी बिल उत्पादन के कुल मूल्य के 10 फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

प्रभु ने यहां सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण सीमा और विशेष सुरक्षा उपाय (एसएसएम) जैसे मुद्दों पर समर्थन जुटाने के लिए द्विपक्षीय बैठकों व विचार-विमर्श को तेज कर दिया है। उन्होंने यूरोपीय संघ, दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों से मिलने के साथ ही विकासशील देशों के समूह जी-33 की बैठकों में हिस्सा लिया।

MRP से ज्यादा दाम पर पानी की बोतल बेची तो जेल

नई दिल्ली । आपने भी अनुभव किया होगा कि 1 लीटर की पानी की बोतल के दाम रेलवे स्टेशन, बस अड्डेस होटल एवं रेस्तरां और आपके घर के पास की दुकान में अलग अलग होते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

अब रेस्टोरेंट, होटल, मल्टीप्लेक्स आदि को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक पर पानी की बोतल बेचने पर जुर्माना देना होगा, यहां तक कि उन्हें जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी सर्वोच्च न्यायालय को दी है।

फेडरेशन ऑफ होटल और रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) की ओर से दायर एक याचिका के जवाब में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूल करना उपभोक्ता के अधिकारों का हनन है। यहां तक कि ये टैक्स चोरी को बढ़ावा देता है।

सरकार ने कहा कि पानी की बोतलों पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूलने के चलन से सरकार को भी सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में नुकसान उठाना पड़ता है। मंत्रालय का कहना है कि प्री-पैक्ड या प्री-पैकेज्ड प्रॉडक्ट्स पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूलना लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत एक अपराध माना जाता है।

गौरतलब है कि साल 2015 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कीमत से ज्यादा पैसे वसूल रहे विक्रेताओं पर कार्रवाई करने के सरकार के अधिकार को सही ठहराया था। होटल एसोसिएशन की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी।

क्या कहता है कानून:  लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम की धारा 36 बताती है कि कोई भी व्यक्ति अगर किसी प्री-पैक्ड वस्तु को उस कीमत पर बेचते या वितरित करते हुए पाया जाता है जो कि पैकेज पर अंकित घोषणाओं के अनुरूप नहीं है उसे दंड दिया जा सकता है।

उस पर पहले अपराध के रूप में 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं ऐसा अपराध दूसरी बार होने पर यह जुर्माना राशि 50,000 तक जा सकती है। इसके अलावा बार बार इस तरह का अपराध करने पर 1 लाख तक का जुर्माना या फिर जेल की सजा का प्रावधान या फिर दोनों तरह के दंड दिए जा सकते हैं।

लोगों के बैंक डिपॉजिट पर आंच नहीं आने देंगे: जेटली

नई दिल्ली। फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा कि भारत फिस्कल कंसॉलिडेशन की राह पर चल रहा है और दूसरे क्वॉर्टर में देश की इकनॉमिक ग्रोथ की जो पिक्चर रही है, उसके साथ ग्रोथ में गिरावट का ट्रेंड पलट गया है। जेटली ने फाइनैंशल रेजॉलूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) के प्रावधानों से जुड़ा डर दूर करने की कोशिश भी की।

उन्होंने कहा कि सरकार फाइनैंशल इंस्टिट्यूशंस में पब्लिक के डिपॉजिट्स की पूरी हिफाजत करेगी। फाइनैंस मिनिस्ट्री के एक बयान के मुताबिक, बजट से पहले अर्थशास्त्रियों के साथ चर्चा में जेटली ने कहा, ‘हम फिस्कल कंसॉलिडेशन के रोडमैप के मुताबिक चल रहे हैं।

इसके तहत फिस्कल डेफिसिट 2015-16 में जीडीपी के 3.9 पर्सेंट और 2016-17 में 3.5 पर्सेंट पर था। उसे मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 3.2 पर्सेंट पर रोकने का लक्ष्य बजट में तय किया गया है।’ कुछ हलकों में चिंता जताई गई है कि सरकार वित्त वर्ष 2018 के लिए फिस्कल डेफिसिट के टारगेट से चूक सकती है।

अप्रैल-अगस्त के दौरान फिस्कल डेफिसिट मौजूदा वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान के 96.1 पर्सेंट पर पहुंच गया था। हालांकि प्रधानमंत्री की इकनॉमिक अडवाइजरी काउंसिल के मेंबर रथिन रॉय ने कहा कि सरकार फिस्कल डेफिसिट टारगेट हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा, ‘इसके संबंध में एक राजनीतिक प्रतिबद्धता है। मुझे भरोसा है कि वे यह टारगेट हासिल कर लेंगे।’

मिनिस्ट्री के बयान के मुताबिक, जेटली ने कहा, ‘खर्च को तर्कसंगत बनाकर, सरकारी खर्च में लूपहोल्स को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसपर और पब्लिक फाइनैंशल मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए दूर कर और रेवेन्यू बढ़ाने के इनोवेटिव कदमों के जरिए हमने फिस्कल टारगेट्स हासिल किए हैं।’

एफआरडीआई बिल के बारे में जेटली ने कहा कि इस ड्राफ्ट लॉ के प्रावधानों के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं। जेटली ने कहा कि सरकारी बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये लगाने के सरकार के प्लान से ये बैंक मजबूत होंगे और किसी भी बैंक के फेल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

जेटली ने कहा कि अगर ऐसी कोई स्थिति पैदा होती है तो सरकार कस्टमर्स के डिपॉजिट्स की ‘पूरी हिफाजत’ करेगी। उन्होंने कहा, ‘इस संबंध में सरकार की सोच बिल्कुल साफ है।’ एफआरडीआई बिल 2017 को अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था और उसे बाद में संसद की ज्वाइंट कमेटी के पास भेज दिया गया था। जेटली ने कहा, ‘कमेटी की जो भी सिफारिश होगी, सरकार उस पर विचार करेगी।’

इस बिल का मकसद एक फ्रेमवर्क बनाना है, जिसके जरिए बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों, नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों और स्टॉक एक्सचेंजों जैसे फाइनैंशल इंस्टिट्यूशंस की इनसॉल्वेंसी की किसी भी स्थिति में निगरानी की जा सकेगी। ड्राफ्ट लॉ में बेल-इन क्लॉज की कुछ हलकों में आलोचना हुई है।

इस बिल में एक रेजॉलूशन कॉर्पोरेशन बनाने का प्रस्ताव किया गया है, जो प्रोसेस पर नजर रखेगा और ‘लायबिलिटीज को राइट डाउन’ करते हुए बैंकों को दिवालिया होने से बचाएगा। ‘लायबिलिटीज को राइट डाउन’ करने की व्याख्या कुछ लोगों ने बेल-इन के रूप में की है।

टीवी पर अब कंडोम के विज्ञापन सिर्फ रात 10 बजे के बाद

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कंडोम विज्ञापन पर एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने टेलीविजन चैनलों पर कंडोम के विज्ञापन के लिए रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक का समय तय कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बच्चों को इनसे दूर रखा जा सके।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा टीवी चैनलों को सोमवार को जारी एक परामर्श में कहा है कि ‘सभी टीवी चैनलों को सलाह दी जाती है कि कंडोम के ऐसे विज्ञापन जो एक खास आयु वर्ग के लिए हो और जिनका प्रदर्शन बच्चों के लिए अनुचित हो सकता है उनका प्रसारण रात 10 बजे से सुबह छह बजे के बीच ही किया जाए।

इसमें 1994 के केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।’ इसमें यह भी स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर नियमानुरूप कार्रवाई की जायेगी। मंत्रालय ने कहा है कि उसके ध्यान में यह बात लायी गयी थी कि कुछ टेलीविजन चैनल विशेषकर बच्चों के लिए, अभद्र समझे जाने वाले विज्ञापन दिखा रहे हैं।

उसने केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली के नियम 7(7) का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है ‘कोई भी केबल सेवा प्रदाता ऐसा विज्ञापन का प्रसारण नहीं कर सकते जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ती हो या गलत व्यवहार के प्रति उनकी रुचि पैदा करे अथवा जिनमें उन्हें भीख माँगते हुये या अभद्र या अपमाजनक परिस्थितियों में दिखाया गया हो।’

बिजनस स्कूलों के महज 20% स्टूडेंट्स को जॉब ऑफर्स: एसोचैम

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नई दिल्ली। उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि बिजनस स्कूलों को अपने स्टूडेंट्स को रोजगार दिलाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन के अनुसार महज 20 प्रतिशत स्टूडेंट्स को ही जॉब ऑफर्स मिल पा रहे हैं। हाल के समय में यह साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा।

एसोचैम ने कहा कि नोटबंदी, कमजोर कारोबारी धारणा और नए प्रॉजेक्ट्स में कमी के चलते इन बिजनस स्कूलों के स्टूडेंट्स के लिए रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। पिछले साल 30 प्रतिशत विद्यार्थियों को जॉब के ऑफर मिले थे। बिजनस स्कूलों में इस साल इसमें भी गिरावट देखी गई।

एसोचैम के अनुसार, बिजनस स्कूलों और इंजिनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों को मिलने वाले सैलरी ऑफर में भी पिछले साल की तुलना में 40-45 प्रतिशत की कमी आई है।

एसोचैम एजुकेशन काउंसिल (AEC) ने कहा है कि किसी कोर्स पर 3-4 साल लगाने और लाखों रुपये खर्च करने को लेकर अब अभिभावक और स्टूडेंट्स गंभीरता से सोचने लगे हैं।

चेंबर ने कहा कि 400 से ज्यादा संस्थान काफी पिछड़ गए हैं और उन्हें अब पर्याप्त स्टूडेंट्स भी नहीं मिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में बिजनस स्कूल और इंजिनियरिंग कॉलेज स्टूडेंट्स को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं।

दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, कोलकाता, लखनऊ, देहरादून समेत कई बड़े शहरों में 2015 के बाद 250 से ज्यादा बिजनस स्कूल बंद हो चुके हैं। 99 ऐसे स्कूल हैं, जो बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।

इसका सबसे बड़ा कारण तेजी से बढ़ते संस्थान हैं, जो मैनेजमेंट एजुकेशन की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते। चेंबर ने कहा  समस्या यह है कि ऐसे संस्थान सिर्फ सीटें भरने पर ही फोकस करते हैं और स्टूडेंट्स की क्वॉलिटी पर ध्यान नहीं देते हैं।

एसोचैम ने सुझाव दिया है कि रिसर्च पर ध्यान देने के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया जाए, टीचर्स को प्रशिक्षण दिया जाए, इंडस्ट्री से बेहतर तालमेल हो और स्टूडेंट्स को रोजगार पाने के योग्य बनाने पर ध्यान दिया जाए।

जीएसटी और नोटबंदी के झटके से उबरने में लगेंगे दो साल: रेड्डी

मुंबई। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई.वी रेड्डी ने जीएसटी और नोटबंदी जैसे कदमों से अर्थव्यवस्था को लगे झटके को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाने से इंकार करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को इस स्थिति से पूरी तरह उबरने और उच्च वृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए दो साल के समय की और जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इस समय आर्थिक वृद्धि को लेकर कोई अनुमान लगाना काफी मुश्किल काम है, या फिर यह कहना कि अर्थव्यवस्था फिर से 7.5 से 8 फीसदी की संभावित उच्च वृद्धि के रास्ते पर कब लोटेगी। बहरहाल, यह स्थिति अगले 24 माह के दौरान बनती नहीं दिखाई देती है।

उन्होंने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा कि यह एक एक झटका है, जिसकी नकारात्मक धारणा के साथ शुरुआत हुई है। इसमें कुछ सुधार सकता है और उसके बाद कुछ फायदा मिल सकता है। फिलहाल इस समय इसमें परेशानी है और लाभ बाद में आएगा। कितना फायदा होगा और कितने अंतराल के बाद यह होगा यह देखने की बात है।

उन्होंने कहा कि मेरा अनुमान है कि इसमें कुछ साल लग सकते हैं। कुछ साल में हम फिर से 7.5- 8 फीसदी वृद्धि पर पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि झटके से जो परेशानी खड़ी हुई थी वह कम हो रही है जबकि सकारात्मक माहौल अभी आना बाकी है।

मेरी उम्मीद है कि यह माहौल आएगा। अर्थव्यवस्था को तीन साल तक एक प्रकार का सकारात्मक झटका कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट के रूप में मिला है। लगातार तीन साल तक विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम आश्चर्यजनक रूप से नीचे रहे।

नकल करके तैयार किए गए थीसिस को पकड़ेगा सॉफ्टवेयर

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सभी तकनीकी विश्वविद्यालय में लगेगा यह सॉफ्टवेयर

कोटा। टेक्निकल यूनिवर्सिटी रिसर्च सेंटर्स पर रिसर्च और प्रोजेक्ट वर्क की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने सख्ती बरती है। अब सभी तकनीकी यूनिवर्सिटी को प्लैगरिज्म सॉफ्टवेयर के जरिए थीसिस और प्रोजेक्ट वर्क को क्रॉस चेक करना होगा। इस साॅफ्टवेयर के जरिए पुरानी थीसिस की नकल पकड़ी जाएगी।

ये साॅफ्टवेयर लगने के बाद छात्र-छात्राओं का वास्तविक काम सामने जाएगा। अभी तक प्लैग चेक की सुविधा नहीं होने के कारण थीसिस की चैकिंग अन्य जगहों पर करवानी पड़ती थी। खास बात यह है कि टेक्निकल यूनिवर्सिटी होने के बावजूद नकल काे रोकने के लिए यह साॅफ्टवेयर अब तक यूनिवर्सिटी नहीं लगा पाई थी।

इस साल रिसर्च कर रहे हैं आरटीयू के 50 स्टूडेंट्स
2016-17 में आरटीयू के 50 स्टूडेंट्स ने रिसर्च वर्क शुरू किया है। साल 2009 से 2016 तक मात्र 15 स्टूडेंट्स ही पीएचडी हासिल कर पाए हैं। 10 पीएचडी थीसिस सबमिट की जा चुकी है। शेष स्काॅलर्स की पीएचडी अभी चल रही है।

सभी यूनिर्सिटी का डेटा रहता है प्लैगरिज्म सॉफ्टवेयर में : इस सॉफ्टवेयर में देश की सभी प्राइवेट और सरकारी यूनिवर्सिटी की थीसिस का डेटा रहता है। यूनिवर्सिटी की ओर से नई थीसिस अपलोड करके एक कमांड देते ही सॉफ्टवेयर बता देता है कि ये किसी पुरानी थीसिस की नकल है या नहीं।

कॉपी किए गए सेंटेंस परपल कलर में हो जाते हैं। यूनिवर्सिटीज आम तौर पर 20 से 30% कंटेंट मैच होने की छूट देती हैं। इससे ज्यादा कंटेंट मैच होने पर थीसिस रिजेक्ट होती है।