Monday, July 13, 2026
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टीटीई के हाथ में होगी POS मशीन, यात्री कार्ड से भर सकेंगे जुर्माना

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नई दिल्‍ली। आने वाले दिनों में रेलवे के ट्रेवलिंग टिकट एक्‍जामनर (टीटीई) के हाथ में एक टैब और एक पीओएस मशीन होगी। ताकि पैसेंजर्स चलती ट्रेन में वसूला जाने वाला चार्ज या जुर्माने का पेमेंट डेबिट या क्रेडिट कार्ड से कर सकें। रेलवे को उम्‍मीद है कि इससे जहां पैसेंजर्स की परेशानी कम होगी, वहीं कैश में गड़बड़ी की संभावना भी कम हो जाएगी।

हाल ही में रेलवे बोर्ड की एक बैठक में इस प्रस्‍ताव पर मुहर लगाई गई और कहा गया कि 15 जनवरी से पहले  बोर्ड द्वारा इस फैसले को लागू करने की रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।

 बैठक में हुआ फैसला 
इसी सप्‍ताह रेल मंत्रालय ने संपर्क, समन्‍वय, संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग बैठकों का आयोजन किया गया। बैठक में कई तरह के प्रस्‍ताव रखे गए। इन बैठकों में जिन प्रस्‍तावों पर मुहर लगाई गई।

उन्‍हें समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने टारगेट डेट फॉर कम्‍प्‍लीशन (टीडीएस) तय कर सभी अधिकारियों से कहा है कि वे इस तय डेडलाइन तक फैसलों को लागू करें। इस बैठक में ही टीटीई को टैब और पीओएस मशीन देने का प्रस्‍ताव आया। 
 
क्‍या होगा POS का फायदा ? 
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि टीटीई को पीओएस मशीन देने से कई तरह के फायदे होंगे। जैसे कि- टीटीई बर्थ खाली रहने पर दूसरे पैसेंजर को बर्थ अलॉट कर देते हैं और उसका चार्ज ले लेते हैं। उस समय पैसेंजर अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड से चार्ज का पेमेंट कर सकेगा।

इसके अलावा किसी तरह का रिजर्वेशन फेयर या सप्‍लीमेंटरी चार्ज का पेमेंट भी पीओएस मशीन से किया जा सकता है। टीटीई द्वारा चेकिंग के दौरान गलत ढंग से यात्रा कर रहे लोगों से जुर्माना वसूला जाता है, लेकिन कई बार पैसेंजर के पास कैश नहीं होता, इस वजह से पैसेंजर को या तो छोड़ना पड़ता है या उन्‍हें पुलिस को सौंप दिया जाता है, लेकिन अब पीओएस मशीन होने पर टीटीई डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट ले सकेंगे। 
 
क्‍या होगा टैब का फायदा ? 
रेलवे ने टीटीई को टैबलेट (टैब) भी देने का निर्णय लिया है। रेलवे अधिकारी के मुताबिक रेलवे मिनिस्‍टर पीयूष गोयल चाहते हैं कि रेलवे में पेपर चार्ट का इस्‍तेमाल खत्‍म किया जाए। इसलिए न तो ट्रेनों के बाहर पेपर चार्ट लगेंगे और ना ही टीटीई के पास कोई चार्ट होगा।

स्‍टेशनों पर डिस्‍पले बोर्ड पर इलेक्‍ट्रॉनिक फीडिंग के जरिए पैसेंजर्स को कंफर्मेशन और वेटिंग के बारे में बताया जाएगा। जबकि टीटीई को टैब दिए जाएंगे, जिसमें पैसेंजर्स का पूरा डिटेल, रिजर्वेंशन चार्ट सहित ट्रेन की पूरी इंफॉर्मेशन होगी। इसी टैब के जरिए टीटीई रेवेन्‍यू का भी डाटा फीड करेंगे। 
 
रेवेन्‍यू लॉस रुकेगा 
अधिकारी ने कहा कि टीटीई के पास टैब और पीओएस मशीन की सुविधा उपलब्‍ध होने के बाद रेवेन्‍यू लॉस काफी हद तक कम हो जाएगा। आरोप लगता रहा है कि टीटीई अवैध वसूली करते हैं और पैसे लेकर पैसेंजर्स को फायदा पहुंचाते हैं। रेलवे को उम्‍मीद है कि इस पर काफी हद तक रोक लगेगी। 

कोटा के नुकूल ने किया हार्ले डेविडसन बाइक पर 6000 किमी. का सफर

कोटा। कुछ नया करने का जुनून मन में हो तो जीवन में कुछ भी करना मुश्किल नहीं है। दृढ़ इच्छा शक्ति से सब हासिल किया जा सकता है। उम्र किसी भी टारगेट के लिए बाधा नहीं हो सकती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया कोटा के 21 साल के नकुल मेहरा ने।

वे 12 दिसंबर को हार्ले डेविडसन बाइक पर सवार होकर कन्याकुमारी से रवाना हुए थे और शनिवार को कोटा पहुंचे। इस अवसर पर नकुल मेहरा का अंटाघर पर ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जोरदार स्वागत किया गया। नकुल को इस राइड के लिए यंगेस्ट राइडर का अवॉर्ड दिया गया। इससे पहले वे पांच रैलियों में भाग ले चुके हैं।

मेहरा ने छह हजार किलोमीटर की यह यात्रा लगभग 11 दिनों में तय की। इस यात्रा में बूंदी के 60 साल के हरिप्रसाद तापड़िया भी उनके साथ रहे। हार्ले डेविडसन कंपनी ने नकुल मेहरा को लाइफ टाइम मेंबरशिप का प्रमाण-पत्र दिया है।

इस अवसर पर दिग्विजय मेहरा, वरूण मेहरा, अनिरुद्ध मेहरा, शमीम खान, वीरेंद्र सिंह शक्तावत, डॉ. जसबिंदर सरोया, संदीप भाटिया सहित अन्य ने स्वागत किया।

गौरतलब है कि नकुल ने पिछले साल गोवा में आयोजित रैली में पहला स्थान हासिल किया था। कोटा पहुंचने पर उनको फूल मालाओं से लाद दिया गया। सभी ने इसकाे कोटा के लिए बड़ी उपलब्धि बताई। नकुल ने इस अवसर पर यात्रा से जुड़ी रोचक यादों को शेयर किया। उनकी यह यात्रा रोमांच से भरी रही।

गौरव का क्षण : बेदी
सेंटपॉल ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुमीत सिंह बेदी ने बताया कि नकुल की यह उपलब्धि सेंट पॉल स्कूल एल्युमिनाई के लिए गौरव का क्षण है। आज के युग में जहां युवाओं का फोकस पढ़ाई पर रहता है, वहां नकुल ने आउट ऑफ बॉक्स सोचते हुए यह एडवेंचर ट्रिप की।

उन्होंने करीब छह हजार किलोमीटर की यात्रा तय की है। पसंद का काम करने से ही हम जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। नकुल 2013 बैच के स्टूडेंट हैं। चेतन चीता और शहीद अजय आहूजा भी इसी स्कूले के एल्युमिनाई रह चुके हैं।

पांच करोड़ तक टर्नओवर वाले उद्योग माइक्रो कहलाएंगे

नई दिल्ली। सरकार माइक्रो, स्मॉल, मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) की नई परिभाषा तैयार कर रही है। यह निर्धारण टर्नअोवर के आधार पर होगा। अभी प्लांट मशीनरी में होने वाले निवेश के आधार पर तय होता है कि कौन सी यूनिट माइक्रो, स्मॉल या मीडियम कहलाएगी।

फिलहाल माइक्रो यूनिट की श्रेणी में उन यूनिट को रखा जाता है जहां प्लांट मशीनरी में 25 लाख रुपए से कम का निवेश हुआ हो। स्मॉल वो होते हैं जिनके प्लांट-मशीनरी में 25 लाख रुपए से लेकर 5 करोड़ रुपए से कम निवेश हुआ हो। 5 करोड़ से अधिक लेकिन 10 करोड़ से कम निवेश होने पर उसे मीडियम यूनिट की श्रेणी में रखा जाता है।

फेडरेशन ऑफ स्मॉल, मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के पदाधिकारियों ने बताया कि इस कदम से सरकार और उद्यमी दोनों को फायदा होगा। अभी अनेक उद्यमी ऐसे हैं जिनका कारोबार तो बढ़ गया है, लेकिन वह माइक्रो श्रेणी में ही हैं।

इसी तरह अनेक उद्यमी ऐसे भी हैं जो निवेश के आधार पर स्मॉल श्रेणी में है, लेकिन उनका कारोबार कम हो गया है। नए वर्गीकरण से सरकार को फायदा यह होगा कि उसे टैक्स ज्यादा मिलेगा। जीएसटी की व्यवस्था में उसे सबके बिजनेस की जानकारी होगी।

बहस की गुंजाइश : फोर्टी
फैडरेशनआॅफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार एमएसएमई की नई परिभाषा पर बहस की काफी गुंजाइश है।

अभी मौजूद नियम इनकी निवेश सीमा से जुड़े हैं और अब नए स्वरूप में टर्नओवर की परिभाषा लागू हाेने से 15 फीसदी इंडस्ट्री एमएसएमई के दायरे से बाहर हो जाने के आसार हैं। दुनिया में लेबर बेस्ड है एमएसएमई का फार्मूला, ऐसे में इस बारे में अभी और गहन विचार-विमर्श जरूरी है।

दो वर्ष से लंबित है मामला : एलबीयू
लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष योगेश गौतम के अनुसार यह मामला दो साल से लंबित है और अब इसे टर्नओवर के आधार पर परिभाषित करने से हमारी एक मांग पूरी हो रही है।

ऐसे होगा नया वर्गीकरण

  • 5 करोड़ रुपए तक सालाना कारोबार वाले माइक्रो श्रेणी में आएंगे।
  • 5-50 करोड़ तक बिजनेस वालों को स्मॉल श्रेणी में रखा जाएगा।
  • 50-100 करोड़ रुपए तक के कारोबारियों मीडियम श्रेणी में होंगे।

कारोबारियोंको फायदा
-सरकार माइक्रो उद्यमियों को नई मशीनरी की खरीदारी पर 15 फीसदी तक छूट देती है।
-आधुनिकीकरण में भी माइक्रो उद्यमियों को इन्सेंटिव मिलता है।
– बैंकों को कर्ज का निश्चित हिस्सा एमएसएमई को देना पड़ता है। ज्यादा कारोबारी इसके दायरे में आएंगे।

कमजोर उठाव से चना और उड़द 200 रुपये टूटा

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को लहसुन की आवक 4000 हजार कट्टे की रही । माल की कुल आवक 50000 हजार बोरी की रही । कमजोर उठाव से चना 200 रुपये, उड़द 200 रुपये, सोयाबीन 50 रुपये,धान सुगंधा 150 रुपये प्रति क्विंटल मंदे रहे ।

गेहूं मिल 1500 से 1560 लोकवान 1600 से 1650 पीडी 1600 से 1650 टुकडी 1600 से 1655 रुपये प्रति क्विंटल। धान सुगंधा 2100 से 2400 पूसा -1 2500 से 2670 पूसा -4 (1121) 2500 से 3070 धान (1509) 2000 से 2671 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 2400 से 3020 सरसो 3200 से 3600 तिल्ली 7000 से 8300 रुपये प्रति क्विंटल। मैथी 2000 से 3200 धनिया बादामी 4400 से 4900 ईगल 4800 से 5050 रंगदार 5000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल।मूंग 3300 से 4400 उडद 2400 से 3900 चना 4000 से 4250 चना काबुली 7000 से 10500 रुपये प्रति क्विंटल।

चना पेपसी 4000 से 4400 चना मौसमी 4000 से 4400 मसूर 3000 से 3600रुपये प्रति क्विंटल। ग्वार 2500 से 3450 मक्का नई 1000 से 1250 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल।  लहसुन 800  से 2500 रुपये प्रति क्विंटल। 

कोटा सर्राफा
चांदी 38500 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 29800 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 34760 रुपये प्रति तोला।
सोना शुद्ध 29950 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 34930 रुपये प्रति तोला।

10 दिन में काली मिर्च 80 रुपये किलोग्राम तक महंगी

चेन्नई। पिछले 10 दिनों में काली मिर्च के दाम 80 रुपये तक चढ़ चुके हैं। किसानों का कहना है कि इतिहास में पहली बार कीमतों में इतनी मजबूती आई है। कीमतों में इस इजाफे का श्रेय मुख्य रूप से आयातित काली मिर्च पर न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) को जाता है। इस महीने की शुरुआत में एमआईपी की घोषणा की गई थी।

इस घोषणा के बाद घरेलू काली मिर्च के दाम 10-12 प्रतिशत तक बढ़कर 420 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ चुके हैं। केपीए के पूर्व कार्यकारी समिति सदस्य और कर्नाटक क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक रोहन कोलैको कहते हैं कि आज ज्यादातर हाजिर बाजारों में काली मिर्च के दाम 500 रुपये प्रति किलोग्राम बोले जा रहे हैं।

एमआईपी के बाद दो हफ्ते की अवधि में कीमतों में यह उछाल बहुत तेजी से आई है। उस वक्त दाम 380 रुपये पर बोले जा रहे थे। बाजार में मांग अच्छी है और आपूर्ति कम लग रही है क्योंकि किसान अपनी उपज बेचने के इच्छुक नहीं है, उन्हें दाम 600 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छूने की उम्मीद है।

कोलैको ने कहा कि तकरीबन 50-60 प्रतिशत किसान पहले ही उपज बेच चुके हैं और बाकी को इस उम्मीद से रोक लिया गया है कि दाम और बढ़ेंगे। पूर्व में आयात की वजह से काली मिर्च के दाम लगभग 600 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर करीब 380 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए थे।

हालांकि आयातित काली मिर्च की गुणवत्ता कम थी। काली मिर्च के किसानों के हितों की रक्षा के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने काली मिर्च पर एमआईपी के रूप में प्रति किलोग्राम 500 रुपये मूल्य का सीआईएफ (लागत, बीमा, भाड़ा) निर्धारित करने का मसाला बोर्ड का प्रस्ताव मंजूर कर लिया।

केरल के एक किसान ने कहा कि हाल के समय में दूसरे देशों से सस्ते आयात की वजह से घरेलू काली मिर्च के दामों में गिरावट आना काली मिर्च के किसानों के बीच प्रमुख चिंता का विषय रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि काली मिर्च के दाम एक साल में करीब 35 प्रतिशत तक गिर चुके हैं और इसके परिणामस्वरूप काली मिर्च के किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
 
केरल के एक किसान ने कहा कि कॉफी के दामों में गिरावट को काली मिर्च की अच्छी आमदनी से सहारा मिला था, लेकिन काली मिर्च के दामों में 50 प्रतिशत तक की गिरावट से भविष्य अंधकारमय दिखता है। कोलैको का कहना है कि इससे किसानों पर काफी दबाव आ गया है।

मौजूदा रुख देखकर किसानों ने काली मिर्च की बिक्री रोक ली है। अब और आने वाली उपज के सीजन में उन्हें 600 रुपये प्रति किलोग्राम दाम की उम्मीद है। किसी भी भागीदार के स्टॉक न निकालने की वजह से विक्रेताओं के लिए बाजार काफी फायदेमंद नजर आ रहा है। 
 
भारत की काली मिर्च की सालाना मांग में करीब चार प्रतिशत का इजाफा हो रहा है। वर्तमान में 60,000 टन प्रति वर्ष मांग होने का अनुमान है। बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सीजन में वियतनाम का अपेक्षित काली मिर्च उत्पादन 1,70,000-1,90,000 टन रहने का अनुमान जताया गया है, जबकि भारत के लिए यह अनुमान 65,000-70,000 टन है।

युवक-युवती परिचय सम्मेलन में रिश्तों की तलाश

कोटा। अग्रवाल समाज सेवा संस्था के तत्वावधान में 201 वां विशाल एवं भव्य दो दिवसीय विवाह योग्य युवक-युवती परिचय सम्मेलन शनिवार को कोटा में झालावाड़ रोड पर अग्रवाल सेवा सदन परिसर में परिचय सम्मेलन प्रारम्भ हुआ। अतिथियों ने परिचय पुस्तिका रिश्तों का संग्रह का विमोचन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उद्योगपति गोविंद राम मोदी ने कहा कि परिचय सम्मेलन से समाज को संगठित होने में मदद मिलती है। समाज में एकता को कायम रखना आज की आवश्यकता है। अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय अग्रवाल समाज पूर्वी राजस्थान के अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल ने कहा कि युवक युवतियों के विवाह संबंधी समस्या के हल में निः शुल्क परिचय सम्मेलन काफी मददगार होते है।

अध्यक्ष रमेश अग्रवाल ने कहा कि पूरे भारत में 200 से अधिक परिचय सम्मेलन कराने का श्रेय समाज को मिला है। महामंत्री सुरेश अग्रवाल ने समाज की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि 1180 प्रविष्ठियां प्राप्त हुई जिनमें से 747 युवक एवं 433 युवतियां है।

विशिष्ठ अतिथि डॉ. नीता जिंदल ने युवतियों का कर्मठ बनाने का आव्हान किया। भाजपा के शहर महामंत्री जगदीश जिंदल ने कहा कि देश में समाज सेवा के नाम पर अग्रवाल समाज को देश में सेवा कार्यों के लिए जाना जाता है।

– सभी वर्गा से आए वर वधु खोजने
परिचय देने वालों में 18 गौत्रों के शिक्षित, व्यवसायी नौकरीशुदा,तलाक और विकलांग तथा परित्यक्ता भी पहुंचे। देश के विभिन्न 13 राज्यों से प्रविष्ठियां आई है। महामंत्री सुरेश अग्रवाल ने बताया कि प्रविष्ठियां में आाईएएस और आरएएस तथा सीए,डाक्टर्स व इंजीनियर्स की भी है।

युवक युवतियों ने अपना परिचय बॉयोडेटा के साथ बेझिझक दिया। दिन भर कार्यक्रम में मेले जैसा महौल रहा। रविवार को एक विशेष सत्र आईएएस और आरएएस के लिए दोपहर बाद रखा जाएगा। शनिवार को परिचय के साथ ही पुस्तिका लेकर गुण मिलान के कार्य भी शुरू हो गए। ज्योतिषचार्य डॉ. प्रमिला गुप्ता ने गण मिलान में अपनी सेवाऐं दी।

747 युवक एवं 433 युवतियां हैं इनके अलावा विदुर, विधवा तथ परित्यक्ता भी परिचय के लिए प्रस्तुत होने वाले है। मुख्य संयोजक जगदीश मित्तल ने धन्यवाद ज्ञापित कियां मंच संचालन मुकेश गुप्ता ने किया। माधवी मंच की अनिता मित्तल दीप्ति मंगल आदि ने परिचय दिलवाने में युवतियों की मदद की। मित्तल ने बताया कि रविवार को प्रातः 9.30 बजे से परिचय सम्मेलन की गतिविधियां शुरू हो जाऐंगी।

चारा घोटाले से जुड़े दूसरे मामले में भी लालू दोषी: 3 को होगा सजा का एलान

पटना/रांची। बिहार के चारा घोटाला से जुड़े एक और मामले में शनिवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसमें लालू प्रसाद यादव समेत 15 आरोपियों को दोषी करार दिया। वहीं, 7 को बरी कर दिया। ये सभी 22 आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट 3 जनवरी को सजा सुनाएगी। लालू को यहांं से होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल ले जाया गया।

बता दें कि इस फैसले के पहले ही रांची पुलिस ने सेंट्रल जेल के आसपास सिक्युरिटी सख्त कर दी थी। फैसले के कुछ मिनट बाद ही लालू के ट्विटर से बीजेपी पर हमला बोला गया। इसमें लिखा- “बीजेपी विपक्ष का पब्लिक पर्सेप्शन बिगाड़ने के लिए गंदी राजनीति कर रही है।”

पूरा मामला 9 प्वॉइंट में समझें
लालू प्रसाद यादव किस केस में दोषी करार?
-चारा घोटाले में 900 करोड़ रुपए के हेरफेर का आरोप है। इस दौरान देवघर ट्रैजरी (कोषागार) से अवैध तरीके से 1991 से 1994 के बीच 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए। जबकि बिहार सरकार की ओर से दवा और चारा की खरीदारी के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए गए थे।

– चाईबासा ट्रैजरी से गलत तरीके से पैसा निकालने के मामले में लालू यादव को सजा सुनाई जा चुकी है। 1997 में वह पहली बार जेल गए थे। उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। फिलहाल वो जमानत पर हैं
– केस की सुनवाई सीबीआई कोर्ट में 1996 से चल रही है। सीबीआई ने 100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए हैं। आरोपियों की ओर से भी बचाव में गवाह पेश किए गए।

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
-लालू प्रसाद यादव समेत 15 आरोपियों को दोषी करार दिया।
– 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, ध्रुव भगत, विद्या सागर आदि शामिल हैं।

दोषियों को सजा कब सुनाई जाएगी?
– सभी दोषियों को 3 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी।
लालू आगे क्या कर सकते हैं?
– बिहार के एडवोकेट राजेश कुमार के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव को तीन साल से कम या तीन साल की सजा हुई, तो उन्हें रांची की सीबीआई कोर्ट जमानत दे सकती है। अगर सजा तीन साल से ज्यादा होती है, तो उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ सकता है। बता दें कि कोर्ट की शनिवार से छुट्टी शुरू हो रही हैं। अब 3 जनवरी को कोर्ट खुलेगा।

फैसला आने के बाद क्या था कोर्ट का माहौल?
– कोर्ट का फैसला आते ही आरजेडी वर्कर्स निराश हो गए। एक शख्स रोने लगा। कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। पार्टी के सीनियर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि एक ही मामले में लालू को जेल और जगन्नाथ मिश्रा को बेल मिला है। ये कैसा इंसाफ है। ये कैसा फैसला है। ये बीजेपी की साजिश है। हम इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

लालू का कितने केस में नाम है?
– 900 करोड़ के चारा घोटाले में यह 33वां और लालू से जुड़ा दूसरा फैसला है। लालू पर चारा घोटाले के 7 केस दर्ज हैं। एक केस में उन्हें 6 साल की सजा हो चुकी है। लालू के खिलाफ 5 अन्य केस में सुनवाई जारी है।

आरजेडी सुप्रीमो पर क्या आरोप था?
– बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इंक्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 96 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया, तब तक चारा घोटाले का मामला सामने आ चुका था।

कुल कितने आरोपी थे?
– चारा घोटाले में कुल 34 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, एक आरोपी ने गुनाह कबूल कर खुद सरकारी गवाह बन गया।

ये आरोपी थे: लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र के अलावा अन्य आरोपियों में बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, जगदीश शर्मा, आरके राणा, ध्रुव भगत, फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, बेक जूलियस, एसी चौधरी, डॉ. कृष्ण कुमार प्रसाद, सुधीर भट्टाचार्य, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, संजय अग्रवाल, ज्योति झा, गोपीनाथ दास, सुनील गांधी, सरस्वती चंद्र, साधना सिंह, राजाराम जोशी और सुशील कुमार शामिल हैं।

जीएसटी: कंपनियां मार्च तक अपने प्रॉडक्ट पर लगा सकेंगी MRP स्टिकर

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नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कंपनियों को अनुमति दी है कि वो अपने बिना बिके हुए प्रॉडक्ट पर मार्च 2018 तक एमआरपी का स्टिकर चिपका सकेंगे। इस एमआरपी स्टिकर पर जीएसटी के बाद कीमतों में आए बदलाव की कीमत छपी हुई होगी। उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने यह जानकारी दी है।

1 जुलाई 2017 से जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के देशभर में लागू किए जाने के बाद कंपनियों से कहा गया था कि वो अपने बिना बिके हुए उत्पादों पर एक अलग से स्टिकर चिपकाएं जिसमें जीएसटी के बाद बदली हुई कीमत अंकित हो, ऐसा उन्हें सितंबर तक करने के लिए कहा गया था, लेकिन बाद में इसमें इजाफा कर इसे दिंसबर 2017 तक के लिए बढ़ाया गया था।

नवंबर के मध्य में जब लगभग 200 वस्तुओं की कीमतों में कटौती की गईं थी, तो मंत्रालय ने लीगल मैट्रोलॉजी (पैकेजयुक्त कमोडिटीज) नियम, 2011 के तहत बिना बिके हुए उत्पादों पर अतिरिक्त स्टिकर पेस्ट करने की अनुमति दी गई थी।

पासवान ने बताया, “जीएसटी के संदर्भ में, हमने कंपनियों को अनुमति दी थी कि वो अपने बिना बिके हुए उत्पादों पर दिंसबर तक अतिरिक्त एमआरपी स्टिकर चिपकाएं। आखिरी जीएसटी काउंसिल बैठक में करीब 200 से अधिक वस्तुओं की कर दरों में बदलाव किया गया था। इसलिए अब हमने फैसला किया है कि इस डेडलाइन को बढ़ाकर मार्च 2018 कर दिया जाए।”

गौरतलब है कि पिछले महीने मंत्रालय ने कंपनियों को अनुमति दी थी कि वो अपने बिना बिके हुए उत्पादों पर एक अतिरिक्त स्टीकर चिपकाएं जिसमें बदले हुए दाम लिखे हुए होंगे।

चारा घोटाले में लालू यादव दोषी करार, जगन्नाथ मिश्रा, ध्रुव भगत, विद्या सागर बरी

पटना/रांची। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद से जुड़े चारा घोटाला में शनिवार को रांची की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाया। लालू प्रसाद यादव दोषी करार दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, ध्रुव भगत और विद्या सागर को बरी कर दिया है।
 
इससे पहले, रांची पुलिस ने होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल के आसपास सिक्युरिटी सख्त कर दी गई। बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स को तैनात किया गया। इलाके में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अगर इस केस में लालू दोषी करार दिए जाते हैं और पांच साल से ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो उन्हें बेल के लिए हाईकोर्ट में ही अपील करनी होगी।
कोर्ट में हाजिरी लगाकर गेस्ट हाउस लौट गए लालू और तेजस्वी

– बता दें कि 900 करोड़ के चारा घोटाले में यह 33वां और लालू से जुड़ा दूसरा फैसला होगा। लालू पर चारा घोटाले के 7 केस दर्ज हैं। एक केस में उन्हें 6 साल की सजा हो चुकी है। लालू के खिलाफ 5 अन्य केस में सुनवाई जारी है।
– सुबह लालू प्रसाद और उनके बेटे तेजस्वी कोर्ट पहुंचे, लेकिन फैसला दोपहर 3 बजे आने पर वह हाजिरी लगाकर गेस्ट हाउस लौट गए।

फैसले से पहले लालू ने क्या कहा?
– रांची के रेलवे गेस्ट हाउस में लालू ने मीडिया से कहा, ”मुझे ज्यूडिशियरी सिस्टम पर पूरा भरोसा है। सभी को इंसाफ मिल रहा है, हमें भी मिलेगा। मैं पिछड़ी जाति से हूं, मुझे भी इंसाफ मिलेगा। एक ही मुर्गी को 9 बार हलाल किया जा रहा है। वकीलों में सभी जरूरी सबूत कोर्ट को दिए हैं, जो बरी होने के लिए काफी हैं।”

– वहीं, शुक्रवार शाम रांची एयरपोर्ट पर लालू ने कहा था, ”अगर मैंने किसी से पैसा लिया तो सीबीआई सबूत दे। आखिर किस बात की मुझे सजा दिलाना चाहते हैं। 20 साल से मुझे परेशान किया जा रहा है। ज्यूडीशियरी सिस्टम पर पूरा भरोसा है। टू जी की तरह इसमें भी फैसला आएगा। बीजेपी और सीबीआई मुझे और परिवार को परेशान कर रही है।”

What Next: दोषी ठहराए गए तो क्या करेंगे लालू?
– बिहार के एडवोकेट राजेश कुमार के मुताबिक, अगर लालू प्रसाद को चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराया जाता है तो उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया जाएगा। सजा अगर तीन साल से अधिक मिली तो उन्हें जेल जाना होगा। तुरंत जमानत नहीं मिलेगी। 

– कुमार ने बताया- सजा अगर तीन साल से कम की हुई तो कोर्ट उन्हें तुंरत बेल भी दे सकता है। पांच साल से ज्यादा की सजा पर जमानत के लिए लालू प्रसाद हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। रविवार से कोर्ट में छुट्टियां हो जाएंगी, इसलिए तीन साल से ज्यादा की सजा पर लालू प्रसाद को नए साल में ही जमानत मिल सकेगी।
CBI ने 100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए

-केस की सुनवाई सीबीआई कोर्ट में 1996 से चल रही है। सीबीआई ने 100 से ज्यादा गवाहों का बयान दर्ज कराया है। कई दस्तावेज भी अदालत में चिह्नित कराए हैं। आरोपियों की ओर से भी बचाव में गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसले की तारीख तय की गई।

चारा घोटाले में कौन-कौन आरोपी?
– लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र के अलावा अन्य आरोपियों में बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, जगदीश शर्मा, आरके राणा, ध्रुव भगत, फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, बेक जूलियस, एसी चौधरी, डॉ कृष्ण कुमार प्रसाद, सुधीर भट्टाचार्य, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, संजय अग्रवाल, ज्योति झा, गोपीनाथ दास, सुनील गांधी, सरस्वती चंद्र, साधना सिंह, राजाराम जोशी और सुशील कुमार शामिल हैं।

आरजेडी सुप्रीमो पर पद के दुरुपयोग का आरोप
– तब बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इंक्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 96 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया, तब तक चारा घोटाले का मामला सामने आ चुका था।

– आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले से जुड़े 7 मामले हैं। एक में फैसला आ चुका है। शनिवार को देवघर जिले के दूसरे केस में फैसला आना है। पांच में सुनवाई जारी है।
कैसे हुआ था चारा घोटाला?

– चारा घोटाले में 900 करोड़ रुपए के हेरफेर का आरोप है। इस दौरान देवघर ट्रैजरी (कोषागार) से अवैध तरीके से 1991 से 1994 के बीच 6 फर्जी आवंटन पत्र से 89,04,413 रुपए निकाले गए। जबकि बिहार सरकार की ओर से दवा और चारा की खरीदारी के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए गए थे।

– चाईबासा कोषागार से गलत तरीके से पैसा निकालने के मामले में लालू यादव को सजा सुनाई जा चुकी है। 1997 में वह पहली बार जेल गए थे। उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। फिलहाल वो जमानत पर हैं

कोटा स्टोन की स्लरी से बनेगी स्मार्ट टाइल्स, घर की खूबसूरती में लगा देगी चार चांद

कोटा । पर्यावरण के लिए मुसीबत बनी कोटा स्टोन स्लरी से निकट भविष्य में आसानी से निजात मिल सकेगी। स्मार्ट सिटी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत कोटा में स्लरी से टाइल्स बनाने का प्लांट स्थापित किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और रीको ज्वॉइंट वेंचर बनाकर प्लांट की स्थापना करेंगे। 50 महिलाओं का स्वयं सहायता समूह इसका संचालन करेगा।
 
जिला कलक्टर रोहित गुप्ता ने बताया कि प्लांट की स्थापना के लिए रीको से जगह ली जाएगी। प्लांट के उत्पादों का उपयोग स्मार्ट सिटी के कार्यों में होगा। इस तरह के प्लांट लगाने के लिए निजी क्षेत्र के इंजटरप्राइजेज ने भी रुचि दिखाई है। मंगलम सीमेंट से भी बात चल रही है। कोटा में 490 पत्थर कारखाने दिन-रात पत्थर तराशने का काम करते हैं।

पत्थरों की घिसाई के बाद इन कारखानों से हर रोज 20 से 25 टन स्लरी निकलती है। दशकों तक खुले में फेंकी जा रही स्लरी जब पर्यावरण के लिए खतरा बनने लगी तो राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर रीको ने इंडस्ट्रीयल एरिया में डम्पिंग यार्ड तैयार किया। लेकिन इसके बाद भी स्लरी की समस्या खत्म नहीं हुई तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के साथ इसका समाधान तलाशने के लिए करार किया।
 

तकनीक विकास पर खर्च हुए 70 लाख
सीबीआरआई के ऑर्गेनिक बिल्डिंग मैटेरियल ग्रुप की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रजनी लखानी और उनकी टीम ने दो साल तक चले शोध के बाद कोटा स्टोन स्लरी से बेहद सस्ते और टिकाऊ रेडी फॉर यूज टाइल्स और पेवर ब्लॉक टाइल्स बनाने में सफलता हासिल की।

एनजीटी से हरी झंडी मिलने और शोध की प्रमाणिकता साबित होने के बाद सीबीआरआई ने पीसीबी को तकनीक ट्रांसफर कर दी है। इस तकनीक के विकास में 70 लाख रुपए का खर्च आया। इसमें 35 लाख रुपए पीसीबी और 35 लाख रुपए राजस्थान विज्ञान एवं तकनीकी विभाग ने खर्च किए हैं।

अब इस तकनीक का इस्तेमाल कर स्लरी की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए कोटा में टाइल्स और पेवर ब्लॉक प्रोडक्शन प्लांट स्थापित किया जाएगा।
 
एमओयू होते ही शुरू हो जाएगा काम
प्लांट स्थापना और संचालन करने वाले चारों संस्थानों के बीच इसी माह एमओयू हो जाएगा। इसके बाद प्लांट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। स्लरी से टाइल्स और पेवर ब्लॉक बनाने वाला यह देश का पहला प्लांट होगा। प्लांट की शुरुआती क्षमता एक शिफ्ट में 25 हजार टाइल्स बनाने की होगी।
 
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में होगा स्थापित
प्लांट की स्थापना स्मार्ट सिटी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत की जाएगी। प्लांट चार संस्थानों का साझा उपक्रम होगा, जिसकी नोडल एजेंसी नगर निगम को बनाया गया है। निगम ही मशीनरी और भवन निर्माण पर आने वाला करीब 50 लाख रुपए का खर्च वहन करेगा।

रीको प्लांट की स्थापना के लिए इंडस्ट्रीयल एरिया के स्लरी डंपिंग यार्ड में जमीन देगा। वहीं स्लरी से टाइल्स और पेवर ब्लॉक बनाने की तकनीक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुहैया कराएगा।