Monday, July 13, 2026
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निजी बैंकों से 7 गुना ज्‍यादा सरकारी बैंकाें का NPA

नई दिल्‍ली। कार्पोरेट डिफाल्‍ट बढ़ने से चालू वित्‍तीय वर्ष की सितबंर को खत्‍म हुई तिमाही में सरकारी बैंकों का बैड लोन (NPA) बढ़कर 7.34 लाख करोड़ रुपए हो गया है। हालांकि इसी दौरान निजी बैंकों का बैड लोन सरकारी बैंकों से काफी कम 1.03 लाख करोड़ रुपए रहा।
 

सरकारी बैंक                 NPA
एसबीआई                  1.86 लाख करोड़ रुपए
पीएनबी                       57,630 करोड़ रुपए
बैंक ऑफ इंडिया             49,307 करोड़ रुपए
बैंक ऑफ बड़ौदा             46,307 करोड़ रुपए
कैनरा बैंक                    39,164 करोड़ रुपए
यूनियन बैंक                   38,286 करोड़ रुपए

निजी बैंक                 NPA
आईसीआईसी बैंक          44,237 करोड़ रुपए
एक्सिस बैंक                 22,136 करोड़ रुपए
HDFC बैंक                  7,644 करोड़ रुपए
जेएंडके बैंक                 5,983 करोड़ रुपए

जारी डाटा के अनुसार सितंबर 2017 को खत्‍म तिमाही में सरकारी बैंकों को NPA 7,33,974 करोड़ रुपए रहा जबकि निजी बैंकों का NPA 1,02,808 करोड़ रुपए रहा। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने दी है।

 इस पूरे बैड लोन में काफी बड़ा हिस्‍सा कार्पोरेट्स और कंपनीज का है। जारी डाटा के अनुसार इस कुल बैड लोन का 77 फीसदी कार्पोरेट्स का ही है। जारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्‍यादा NPA भारतीय स्‍टेट बैंक का है।

रिकवरी के लिए हो रहे प्रयास
वित्‍त मंत्रालय के अनुसार बैड लोन की रिकवरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए देश में डेट रिकवरी ट्रिव्‍यूनल (DRTs) की संख्‍या बढ़ाई गई है। जहां 2016-17 में इनकी संख्‍या 33 थी वहीं इस वक्‍त इनकी संख्‍या बढ़कर 39 हो गई है। इससे पेंडिंग कैस सुलझाने में मदद मिलेगी। 

 किसानों को नहीं मिल रहे आलू के दाम, सड़क पर फेंकने को मजबूर

87% तक गि‍री कीमतें, कोटा और जयपुर में आलू रिटेल में 8 रुपये किलो

नई दि‍ल्‍ली/जयपुर / कोटा । देश में इन दि‍नों आलू के भाव जमीन पर आए हुए हैं। इससे उपभोक्‍ताओं को तो सस्‍ते रेट पर आलू मि‍ल जा रहा है मगर कि‍सानों की लागत भी नहीं नि‍कल रही है। दि‍ल्‍ली में आलू का फुटकर रेट 10 रुपए तक आ गया है।

जयपुर और कोटा में फुटकर रेट आठ रुपए और थोक में पंकज रुपए किलो बिक रहा है। यूपी में सड़कों कि‍नारे टनों आलू फेंका जा रहा है। कि‍सानों के लि‍ए हालात कि‍तने खराब हो गए हैं, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि‍ पि‍छले साल इसी सप्‍ताह के मुकाबले आलू के थोक भाव में 86 % तक की गि‍रावट आ गई है। आगरा की मंडी में पि‍छले साल के मुकाबले आलू का औसत थोक रेट 86.95% कम है।

महाराष्‍ट्र की नासि‍क मंडी में पि‍छले साल इसी दौरान आलू का थोक रेट 2607 रुपए प्रति‍ क्‍विंटल था, जो अब 576 रुपए है। यानी रेट में 77.88% की गि‍रावट आई है। दि‍ल्‍ली में आलू के फुटकर रेट इस समय 15 रुपए के आसपास हैं। थोक रेट प्रति‍ क्‍विंटल 550 रुपए (सप्‍ताह का औसत) चल रहा है। वहीं पंजाब में फुटकर रेट 10 रुपए प्रति‍ कि‍लो तक गि‍र गए हैं। ये रेट भी अच्‍छे आलू के मि‍ल रहे हैं, जो आलू थोड़ा लो स्‍टैंडर्ड है उसके रेट तो और नीचे आ गए हैं।  

आलू के फुटकर रेट – 22 दि‍संबर
राज्‍य                 रेट प्रति‍ कि‍लो
दि‍ल्‍ली               17 रुपए
चंडीगढ़             12 रुपए
शि‍मला              10 रुपए
आगरा                 8 रुपए
मुंबई                 18 रुपए
जयपुर                 8 रुपए
कोटा                  8 रुपए
स्रोत – डि‍पार्टमेंट ऑफ कंज्‍यूमर अफेयर्स

आगरा की मंडी में भी आवक पि‍छले साल के मुकाबले काफी बढ़ गई। देशभर की मंडि‍यों में ऐसे ही हालत हैं, जि‍सकी वजह से रेट कम हो गए हैं। इस बार कि‍सानों ने आलू का अच्‍छा प्रोडक्‍शन कि‍या, मगर दाम इतने नीचे गि‍र गए कि‍ लागत तक नहीं नि‍कल पा रही है।

आवक बढ़ने से गि‍रे दाम
मंडि‍यों में आलू की आवक बढ़ जाने की वजह से आलू की कीमतें नीचे आ गई हैं। यूपी की फतेहाबाद मंडी में नवंबर की आवक वर्ष 2016 के मुकाबले 3752.79 फीसदी ज्‍यादा रही। वहीं दि‍संबर के महीने की आवक देखें तो पि‍छले साल के मुकाबले यह 937 फीसदी ज्‍यादा रही। आगरा की मंडी में भी आवक पि‍छले साल के मुकाबले काफी बढ़ गई। देशभर की मंडि‍यों में ऐसे ही हालत हैं, जि‍सकी वजह से रेट कम हो गए हैं। इस बार कि‍सानों ने आलू का अच्‍छा प्रोडक्‍शन कि‍या, मगर दाम इतने नीचे गि‍र गए कि‍ लागत तक नहीं नि‍कल पा रही है।

मुफ्त में ले जाएं आलू
यूपी के कि‍सान बी डी सिंह ने बताया, ‘जब तक आलू कि‍साने के घर में नहीं आता तब तक तो उसके रेट ठीक रहते हैं मगर जैसी ही कि‍सान के दरवाजे पर आलू आना शुरू हो जाता है रेट नीचे आ जाते हैं। इस बार प्रदेश के आलू कि‍सानों की हालत बहुत खराब है। लोग कोल्‍ड स्‍टोर से अपनी फसल नहीं उठा रहे। मंडी के हालात तो आप जान ही रहे हैं। आगरा में आप मुफ्त में आलू पा सकते हैं। आलू को कोल्‍ड स्‍टोर में रखने का आम रेट 115 रुपए प्रति‍ बोरी है। एक बोरी में 50 कि‍लो आलू आता है। आलू के एक कट्टे का रेट इस समय 150 रुपए तक गि‍र गया है। ऐसे में कि‍सान कोल्‍ड स्‍टोर में रखा हुआ आलू उठा ही नहीं रहे हैं, जि‍सकी वजह से कोल्‍ड स्‍टोर वाले इन्‍हें सड़कों पर फेंक रहे हैं।‘

बैंक लगाएंगे सिक्कों का मेला, रिजर्व बैंक ने जारी की गाइडलाइन

जयपुर । भारतीय रिजर्व बैंक ने सिक्कों की समस्या सुलझाने के लिए बैंक शाखाओं पर सिक्का मेला लगाने के लिए एडवाइजरी जारी की है। इस संबंध में बैंकों को निर्देश दिए जा चुके हैं।

बैंक शाखा स्तर पर लगने वाले इस मेले में न केवल खाताधारकों के पास इकट्ठा हुए सिक्का जमा किए जाएंगे बल्कि उन्हें बाजार में सिक्कों की जरूरत और अहमियत भी बताई जाएगी। बैंक सिक्का जमा करने में परेशानी अनुभव न करें, इसके लिए करेंसी चेस्ट के मुख्य प्रबंधकों को भी निर्देशित किया गया है कि वे शाखाओं से सिक्के लें।

नोटबंदी के दौरान उत्पन्न नकदी संकट से निपटने के लिए बैंकों ने अपनी शाखाओं के जरिये खाताधारकों को सिक्कों में भी भुगतान किया था। कुछ समय तक बाजार में सिक्कों में भुगतान होता रहा। ऐसे में कारोबारियों ने भी सिक्के लिए। दिक्कत तब शुरू हुई जब बैंकों ने इन सिक्कों को जमा करने से मना कर दिया।

इसका असर यह हुआ है कि कारोबारियों ने बाजार से सिक्के लेने से मना कर दिया और छोटे दुकानदारों, एजेंसियों के पास सिक्के जमा होने लगे। इससे करोड़ों रुपये की कार्यशील पूंजी फंसी और कारोबार में नुकसान की स्थिति आने लगी।

अमेरिका में जॉब करना होगा मुश्किल, H-1B वीजा प्रक्रिया कठिन

बेंगलुरु।अमेरिका में जॉब जॉइन करने की उम्मीद लगाए भारतीय प्रफेशनल्स के लिए एक और बुरी खबर है। अमेरिकी का होमलैंड सिक्यॉरिटी डिपार्टमेंट (डीएचएस) एक ऐसा प्रस्ताव तैयार कर रहा है जो H-1B वीजा प्राप्त करना बहुत कठिन बना देगा। इस प्रस्ताव में H-1B वीजा आवेदनों की छंटनी की प्रक्रिया को बहुत कड़ा करने का रास्ता तलाशा जा रहा है।

इंटरनैशनल इमिग्रेशन फर्मा फ्रोगोमेन ने ताजा अपडेट में अपनी वेबसाइट पर कहा है कि डीएचएस ने 2011 के एक प्रस्ताव में संशोधन करने का संकेत दिया है जिसमें अपनी H-1B वीजा के लिए आवेदन करने से पहले H-1B कैप लॉटरी का रजिस्ट्रेशन करवाकर कैप आवेदन जमा करने होंगे, तभी उन्हें कैप नंबर मिल पाएंगे।

उसने बताया, ‘डीएचएस H-1B कैप नंबर आवंटन के लिए एक प्रायॉरिटी सिस्टम लाने की योजना भी बना रहा है जिसमें उन आवेदनों को प्रायॉरिटी मिलेगी जो सबसे ज्यादा सैलरीवाली नौकरियों के लिए हो और जो उच्च कौशल प्राप्त प्रफेशनल्स ने दिए हों। इनके अलावा आवेदनों की छंटनी में राष्ट्रपति ट्रंप के ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ के कार्यकारी आदेश का भी ध्यान रखा जाएगा।’

डीएचएस ने अपने सेमी-ऐनुअल रेग्युलेटरी अजेंडे में कुछ प्रस्तावों के ऐलान किए। वह H-1B वीजा प्राप्त प्रफेशनल्स के वेतन सीमा में भी सुधार पर विचार कर सकता है। फ्रेगोमेन वर्ल्डवाइड में पार्टनर स्कॉट जे फिट्जगेराल्ड ने कहा कि H-1B कैप लॉटरी सिस्टम में बदलाव का ऐलान फरवरी 2018 तक नहीं होना है।

अगर इन बदलावों का ऐलान उस आदर्श प्रक्रिया के तहत होता है जिसमें ‘नोटिस ऐंड कॉमेंट’ की अनुमति दी जाती है तो अगले H-1B कैप में बदलावों को लागू नहीं किया जा सकेगा जिसकी फाइलिंग अप्रैल 2018 में शुरू होगी क्योंकि ‘नोटिस ऐंड कॉमेंट’ में कुछ महीने लगते हैं।

बढ़ रहे हैं एजुकेशन लोन के डिफाल्टर

नई दिल्ली। बैंकों के लिए शिक्षा कर्ज भी अब समस्या बनती जा रही है। कर्ज लौटाने में चूक बढ़कर मार्च 2017 में कुल बकाए का 7.67 प्रतिशत हो गया जो दो साल पहले 5.7 प्रतिशत था। भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के आंकड़े के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 के अंत में कुल शिक्षा कर्ज 67,678.5 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें 5,191.72 करोड़ रुपये एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) हो गया।

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बढ़े फंसे कर्ज से पहले ही जूझ रही है और उन्हें मजबूत करने के लिए पूंजी डालने की बड़ी योजना तैयार की है। आईबीए के आंकड़े के अनुसार क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) कुल कर्ज के प्रतिशत के रूप में लगातार बढ़ रही है।

वित्त वर्ष 2014-15 में एनपीए 5.7 प्रतिशत थी जो 2015-16 में 7.3 प्रतिशत तथा पिछले वित्त वर्ष में 7.67 प्रतिशत पहुंच गई। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पूर्व में आईबीए की शिक्षा कर्ज योजना के माडल में संशोधन किया जिसका मकसद इस क्षेत्र में एनपीए के प्रभाव को कम करना था।

योजना में जो बदलाव किए गए, उसमें भुगतान की अवधि बढ़ाकर 15 साल करना तथा 7.5 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फार एजुकेशन लोन (सीजीएफईएल) की शुरूआत शामिल हैं। सीजीएफएल कर्ज में चूक होने पर 75 प्रतिशत की गारंटी उपलब्ध कराता है।

आईबीए के आंकड़े के अनुसार शिक्षा ऋण के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक का एनपीए मार्च 2017 के अंत में सर्वाधक 671.37 करोड़ रुपये रहा। उसके बाद क्रमश: एसबीआई (538.17 करोड़ रुपए) तथा पंजाब नेशनल बैंक (478.03 करोड़ रुपए) का स्थान रहा। 

आईआईटी कैंपस प्लेसमेंट में इस साल 4% गिरावट

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नई दिल्ली। इस साल 17 इंडियन इस्टिट्यूट्स ऑफ टेक्नॉलजी (आईआईटी) के प्लेसमेंट में 4.94 फीसदी की गिरावट आई है। यह जानकारी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने संसद में दी। प्लेसमेंट में आई गिरावट का कारण छात्रों का उद्यमिता और स्टार्टअप्स के प्रति बढ़ती रूचि को बताया गया।

जावडेकर ने बताया कि 2014-15 में 17 आईआईटी में 72.82 फीसदी प्लेसमेंट हुआ था जो 2015-16 में बढ़कर 75.79 फीसदी हो गया और 2016-17 में गिरकर 70.85 फीसदी हो गया। राज्य सभा में उठाए गए एक लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, आईआईटीज में कैंपस प्लेसमेंट में वृद्धि और गिरावट के कई कारण हैं जैसे मार्केट की मौजूदा स्थिति, उच्चतर अध्ययन को प्राथमिकता और स्टार्ट अप्स एवं उद्यमिता के प्रति छात्रों की दिलचस्पी का फिर से पैदा होना।

पिछले साल के मुकाबले इस साल छात्रों को विदेश में जॉब के ऑफर में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल के यूएसए, जापान, कोरिया, सिंगापुर और ताइवान से मिले 65 ऑफर के मुकाबले इस साल आईआईटी बॉम्बे में विदेश में जॉब के लिए 74 ऑफर मिले हैं। इस साल पहली बार आईआईटीज ने औपचारिक रूप से प्सेलमेंट सीजन के शुरू होने से पहले ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कैंपस विजिट की अनुमति दी थी।

कोटा के रानपुर में 200 करोड़ से बनेगी स्मार्ट टाउनशिप

कोटा। स्मार्ट सिटी योजना में शहर से 20 किमी. दूर रानपुर में 200 करोड़ की लागत से स्मार्ट टाउनशिप तैयार की जाएगी। इस पर काम शुरू कर दिया गया है। यूआईटी इसके लिए करीब 140 हैक्टेयर जमीन उपलब्ध करवा रहा है। इसे पीपीपी मोड पर तैयार करवाया जाएगा। 26 दिसंबर को जयपुर में होने वाली स्मार्ट सिटी जनरल बॉडी की मीटिंग में प्रोजेक्ट पर मुहर लगने की संभावना है।

कोटा स्मार्ट सिटी लिमिटेड की बुधवार को हुई बैठक में भी रानपुर प्रोजेक्ट पर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि इस टाउनशिप को पूरी तरह ग्रीन बनाया जाएगा, जिसमें अलग-अलग योजनाओं को शामिल किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक कोचिंग सेंटर को भी शामिल किया जाएगा।

इसके लिए अब कंसल्टेंट नियुक्त किया जा रहा है। यूआईटी अध्यक्ष आरके मेहता का कहना है कि इस टाउनशिप को पूरी तरह से स्मार्ट सिटी के रूप में बनाया जाएगा। इसमें सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी और अन्य शहरों के लिए यह माॅडल होगा। इसमें स्कूल और मकान भी स्मार्ट तरीके से बनाए जाएंगे।

कोटा के डेजर्ट पार्क में 15 करोड़ से बनेगा शिल्पग्राम

कोटा। कई साल से उपेक्षित कचरा डालने के काम रहे डेजर्ट पार्क के दिन जल्द ही फिरने वाले हैं। यूआईटी 15 करोड़ रुपए से इसका विकास करेगी। इस क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण हाट बाजार को शामिल करके उदयपुर के शिल्पग्राम की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। जेडीबी काॅलेज वाले छोर पर पूर्व राजमाता विजयाराजे सिंधिया की प्रतिमा लगाई जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिया गया है।

यूआईटी अध्यक्ष आरके मेहता के अनुसार डेजर्ट पार्क एवं ग्रामीण हाट बाजार को शामिल करते हुए उदयपुर के शिल्पग्राम की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इस परिसर में शिल्पकारों, दस्तकारों एवं हस्तकला कारीगरों को पूरे साल अपने उत्पादों को बेचने एवं प्रदर्शित करने की सुविधा होगी।

हम इस प्रोजेक्ट के जरिये शिल्पकला, हस्तकला एवं दस्तकारी को प्रोत्साहन देना चाहते हैं। परिसर के एक छोर पर कैफेटेरिया का भी निर्माण किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद पर्यटकों को आकर्षित करेगा, क्योंकि इसके पास ही म्यूजियम और आर्ट गैलरी हैं। इसमें कंसल्टेंट नियुक्त कर दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई चल रही है।

10 साल से डाला जा रहा है कचरा
करीब दस साल पहले तत्कालीन कलेक्टर ने शहर में रेगिस्तानी पार्क की कल्पना करके बड तिराहे के पास डेजर्ट पार्क विकसित किया था। सरकारी लापरवाही की हद ये है कि तब से इसका शुभारंभ भी नहीं हो पाया। इस कारण यहां हरियाली छा गई और डेजर्ट पार्क गुम हो गया।

अब यूआईटी प्रशासन ने इसके विकास का जिम्मा उठाया है। जब न्यास अधिकारियों ने इसकी डीपीआर बनाने का काम शुरू किया तो कलेक्टर रोहित गुप्ता ने इसमें ग्रामीण हाट बाजार को भी शामिल करके इसे कल्चरल सेंटर के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। इस पर यूआईटी ने फिर से योजना बनाई है।

कोलाना हवाई पट्टी : बड़े एयरक्राफ्ट-एयरबस भी उतरेंगी

झालावाड़। कोलाना हवाई पट्टी के विस्तारीकरण का काम किस तरह से होगा इसके लिए कंसल्टेंट ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट पर उच्चाधिकारियों द्वारा फैसला लिया जाएगा। उसके बाद यहां पर काम शुरू हो जाएगा।
कोलाना हवाई पट्टी के विस्तारीकरण की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है।

इसी के लिए नवंबर माह में इसके लिए नया डिविजन खोला गया। उसके बाद अब कंसल्टेंट से फाइनल रिपोर्ट ली जा चुकी है। विस्तारीकरण में 169 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अभी कोलाना हवाई पट्टी का रन-वे 1700 मीटर है। इसको 3 हजार मीटर किया जाना है।

कंसल्टेंट की रिपोर्ट में बताया गया है कि इसमें लार्जेस्ट एयरक्राफ्ट, एयरबस भी उतारी जा सकेगी। अभी भी संभाग में यह सबसे लंबी हवाई पट्टी है। इसके लिए कंसल्टेंट संगीता एविएशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को नियुक्त किया गया था। करीब चार माह तक स्टडी के बाद यह रिपोर्ट तैयार हो पाई है।

आधुनिक तकनीक से बनेगा: कोलाना हवाई पट्टी के विस्तारीकरण की डिजाइन भी फाइनल हो चुकी है। इसके तहत इसका टर्मिनल पिरामिड के आकार का बनेगा जो विश्व स्तरीय इमारत के रूप में देखा जा सकता है। सीएम की मंशा थी कि कोलाना हवाई पट्टी की यूनिक डिजाइन बने।

इसी को लेकर कैप्टन आकाश अग्रवाल ने इसको पिरामिड के आकार में डिजाइन किया है। इसकी डिजाइन इस हिसाब से बनाई गई है कि इसको भविष्य में कभी भी कहीं भी बढ़ाया जा सकेगा। यहां सभी आधुनिक तकनीक लोगों को देखने को मिलेंगी।

देश की एक हजार से अधिक मंडियां होंगी हाईटेक

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नई दिल्ली । किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार देश की एक हजार से अधिक कृषि मंडियों को हाई टेक बनाकर इन्हें ई-मंडी में तब्दील करेगी। कृषि सुधारों की दिशा में सरकार का यह एक बड़ा कदम है। इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। जल्दी ही इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है।

आगामी वित्त वर्ष के आम बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। मंडियों में कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए उसे इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों से लैस किया जा रहा है, ताकि किसानों को घर बैठे उनकी उपज के मूल्य का पता चल सके। इससे किसान मनमाफिक मूल्य होने पर अपनी उपज को बाजार में लाएगा। वे बाजार जाए बगैर भी सौदा घर बैठे कर सकेंगे।

ई-मंडी के तौर पर पहले चरण में 14 राज्यों की 585 मंडियों को लिया गया था, जिन्हें तीन चरणों में 31 मार्च 2017 तक पूरा कर दिया गया था। इनकी शुरुआत 14 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ राज्यों की 21 मंडियों से की थी।  वर्ष 2020 तक एक हजार से अधिक मंडियों को ई-मंडी में तब्दील करने की योजना है।

कुल 69 कृषि जिंसों में इलेक्ट्रॉनिक कांटें पर तौल शुरू हो गया है, जिसके नतीजे बहुत उत्साहजनक साबित हुए। इसी को देखते हुए सरकार ने देश की एक हजार से अधिक मंडियों को ई-मंडी में तब्दील किया जाएगा। दूसरे चरण में कारोबार के लिए कृषि जिंसों की संख्या को बढ़ाकर 100 किये जाने की संभावना है।

कृषि मंत्रालय में इस पर लगातार विचार-विमर्श हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्दी ही मंजूरी मिलने की संभावना है। प्रत्येक ई-मंडी विकसित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से पहले जहां सिर्फ 30 करोड़ की धनराशि आवंटित होती थी, उसे बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि इस राशि में और वृद्धि हो सकती है ताकि ऐसी मंडियां पूरी तरह संसाधनों से लैस हों। इसमें पूरे राज्य के लिए एक मंडी कानून होगा, जिसमें व्यापारियों को मिलने वाला एक लाइसेंस पूरे राज्य में लागू होगा।