Monday, July 13, 2026
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अखिल भारतीय अन्तरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन ने समाज हित में बनाई कार्ययोजना

कोटा। अखिल भारतीय अन्तरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन की एक बैठक रविवार को माहेश्वरी जलसा होटल पर सम्पन्न हुई। जिला अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी एवं महामंत्री संदीप अग्रवाल ने बताया कि कार्यकारिणी के पुनर्गठन में वैश्य समाज के सभी 22 घटकों को प्रतिनिधित्व देने पर चिंतन हुआ। माहेश्वरी ने कहा कि शीघ्र ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि सभी घटकों में आपस में विवाह संबंध बनाने के लिए एक परिचय सम्मेलन किया जाएगा एवं विवाह में मध्यम वर्गीय परिवारों को सहयोग करने एवं सामूहिक विवाह के आयोजन का भी प्रयास होगा।

बैठक में हुए निर्णय के अनुसार वैश्य समाज के प्रतिभावान छात्र- छात्राओं एवं अपने क्षेत्र में विलक्षण प्रतिभा के धनी लोगों को भी समाज के स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सहयोग दिया जाएगा। समाज के सभी जरूरतमंद लोगों को सहयोग करने के लिए वैश्य महासम्मेलन द्वारा प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अंतर्राष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन द्वारा संभाग के समस्त जिलों में निशुल्क वैश्य मित्र सदस्य बनाए जाएंगे। शीघ्र ही प्रदेश स्तरीय वैश्य महासम्मेलन का आयोजन कोटा में हो, जिसमें 40 जिलों के प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा।

बैठक में सम्भागीय अध्यक्ष गोवर्धन खण्डेवाल, सम्भागीय महिला विंग की अध्यक्षा कुन्ती मूंदड़ा, जिला चेयरमेन विशाल माहेश्वरी, जिला महिला विंग की अध्यक्ष ममता गुप्ता, अखिल भारतीय अंतर्राष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के युवा अध्यक्ष मनोज टोंग्या, महामंत्री शैलेंद्र विजयवर्गीय, प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील गर्ग सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।

लौकिक व आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र बनेगा भगवान ऋषभदेव गुरुकुलम

कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रवेश के लिए साक्षात्कार, 25 विद्यार्थियों को मिलेगा अवसर

कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित भगवान ऋषभदेव गुरुकुलम में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी के मंगल आशीर्वाद से नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रवेश की चयन प्रक्रिया के अंतर्गत रविवार को विद्यार्थियों के साक्षात्कार आयोजित किए गए। गुरुकुल में विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त एवं आधुनिक शिक्षा का समन्वित वातावरण निशुल्क प्रदान किया जाएगा।

अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार पाण्ड्या ने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों के लिए आवास एवं भोजन की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। गुरुकुल की दिनचर्या प्रातः 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक निर्धारित रहेगी, जिसमें अनुशासित एवं नियमित जीवनशैली पर विशेष बल दिया जाएगा।

प्रतिदिन की शुरुआत प्रातःकालीन देवदर्शन एवं जिनदर्शन से होगी।महामंत्री ताराचंद जैन बड़ला ने स्पष्ट किया कि प्रवेश केवल जैन धर्म के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, अन्य धर्मों के विद्यार्थी भी प्रवेश के पात्र होंगे।

महामंत्री बड़ला ने जानकारी दी कि गुरुकुल में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ लौकिक शिक्षा भी प्रदान की जाएगी। कक्षा 9वीं से 12वीं तक पाठ्यक्रम में कक्षा 9वीं में जैन धर्म एवं संस्कार, कक्षा 10वीं में जैन धर्म आचार संहिता, कक्षा 11वीं में जैन गणित तथा कक्षा 12वीं में जैन इतिहास शामिल रहेगा।

कोषाध्यक्ष निर्मल कुमार अजमेरा ने बताया कि प्रथम चरण में प्रवेश हेतु ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके आधार पर चयनित विद्यार्थियों के साक्षात्कार के पश्चात कक्षा 9वीं में 25 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा, जिनमें से 12 विद्यार्थियों को प्रथम चरण में प्रवेश प्रदान किया गया।

संस्थान द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अंग्रेजी माध्यम से उच्च स्तरीय शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा, कंप्यूटर लैब, आर्ट एवं डांस रूम, डिजिटल स्मार्ट कक्षाएं तथा समय-समय पर ज्ञानवर्धक शैक्षणिक भ्रमण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही लौकिक शिक्षा के साथ चारित्रिक निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

साक्षात्कार प्रक्रिया में अधिष्ठाता पं. कमल कुमार, विषय विशेषज्ञ डॉ. पंकज जैन शास्त्री तथा अधीक्षक जगदीश शास्त्री ने सहभागिता करते हुए चयन प्रक्रिया सम्पन्न कराई। इस अवसर पर राजमल पाटौदी, अशोक सांवला, बाबूलाल जैन, महावीर प्रसाद बड़ला, राजेन्द्र गोधा, प्रकाश मेहरूवाला, अनिल ठौरा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कंपनियों में बदल जाएगा अप्रैल से कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर, जानिए कैसे

नई दिल्ली। Salary Structure change: अगले महीने 1 अप्रैल 2026 से नई वित्तीय साल की शुरुआत के साथ नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्लिप में बदलाव दिख सकता है। कंपनियां नए लेबर कानूनों और बजट में घोषित टैक्स नियमों के हिसाब से सैलरी स्ट्रक्चर अपडेट कर रही हैं। हालांकि कोशिश यही है कि हाथ में आने वाली सैलरी (टेक-होम) ज्यादा ना बदले, लेकिन टैक्स देने के तरीके और रकम में बड़ा फर्क आ सकता है।

इस बार सबसे बड़ा बदलाव ‘वेजेज’ की नई परिभाषा को लेकर है। नए नियम के अनुसार, किसी भी कर्मचारी की कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे और उससे जुड़े कंपोनेंट्स में होना जरूरी है। इसका मतलब है कि कंपनियां बेसिक सैलरी बढ़ाएंगी और बाकी अलाउंसेस (जैसे स्पेशल अलाउंस) को कम या मर्ज कर सकती हैं। इससे PF और ग्रेच्युटी जैसे फायदे बढ़ेंगे, लेकिन इन-हैंड सैलरी पर थोड़ा असर पड़ सकता है।

सैलरी स्ट्रक्चर के सरल होने के साथ एक और ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है—नया टैक्स रिजीम (New Tax Regime) अब डिफॉल्ट ऑप्शन बनता जा रहा है। यानी अगर कोई कर्मचारी खुद से पुराना टैक्स रिजीम नहीं चुनता, तो उसे अपने आप नए रिजीम में डाल दिया जाएगा। नए रिजीम में कम टैक्स रेट होते हैं, लेकिन ज्यादातर छूट और डिडक्शन खत्म हो जाते हैं, जिससे यह कई लोगों के लिए आसान और सीधा विकल्प बन जाता है।

पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है पुराना टैक्स रिजीम
हालांकि, पुराना टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कुछ खास लोगों के लिए यह अभी भी फायदेमंद साबित हो सकता है। खासकर वे लोग जिनकी सालाना इनकम 10 से 30 लाख के बीच है, जो मेट्रो शहरों में रहते हैं, ज्यादा किराया देते हैं या होम लोन चला रहे हैं, और 80C व NPS जैसी स्कीम्स का पूरा फायदा उठाते हैं—उनके लिए पुराने रिजीम में टैक्स बचत ज्यादा हो सकती है।

दूसरी ओर, जिन लोगों के पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, या जिनकी सैलरी स्ट्रक्चर पहले से ही सिंपल है, उनके लिए नया टैक्स रिजीम ज्यादा बेहतर और झंझट-फ्री रहेगा। फ्रीलांसर और कंसल्टेंट जैसे लोग भी आमतौर पर नए रिजीम को पसंद करते हैं क्योंकि इसमें कागजी काम और प्लानिंग कम करनी पड़ती है।

कुल मिलाकर, आने वाले समय में सैलरी स्लिप और टैक्स सिस्टम दोनों ही ज्यादा सरल होने वाले हैं। अलाउंसेस कम होंगे, स्ट्रक्चर सीधा होगा और टैक्स कैलकुलेशन आसान। ऐसे में हर कर्मचारी को अपनी इनकम, खर्च और निवेश को ध्यान में रखते हुए यह तय करना होगा कि उसके लिए नया टैक्स रिजीम सही है या पुराना।

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, कमर्शियल LPG का कोटा बढ़ाकर दोगुना किया

कमर्शियल LPG के दबाव को कम करने के लिए अब 10 दिन में मिलेगा PNG कनेक्शन

नई दिल्ली। सरकार ने गैस की सप्लाई को पटरी पर लाने के लिए तेज कदम उठाए हैं। खासकर शहरों में पाइप्ड गैस पहुंचाने और कमर्शियल LPG के दबाव को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने अपने सभी ऑफिसों को आदेश दिया है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) के आवेदनों को महज 10 दिनों के अंदर निपटाया जाए। इससे पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को जल्दी घर-घर पहुंचाने में मदद मिलेगी।

साथ ही सरकार ने बड़े शहरों और कस्बों में कमर्शियल LPG यूजर्स को PNG अपनाने की सलाह दी है। इसका मकसद है LPG पर बोझ को धीरे-धीरे कम करना। सरकार ने दावा किया है कि अभी भी घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बिल्कुल ठीक चल रही है।

किसी डीलरशिप पर गैस खत्म होने की शिकायत नहीं आई। डिलीवरी का सिस्टम पहले जैसा ही है, ज्यादातर अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) से हो रही है। पहले वाली अफरा-तफरी और बार-बार बुकिंग अब काफी कम हो गई है।

सरकार ने कमर्शियल LPG की मात्रा को लगातार बढ़ाया है। पहले 20 फीसदी सप्लाई बहाल हुई, फिर 18 मार्च को PNG से जुड़े सुधारों के तहत 10 फीसदी और जोड़ा गया। 21 मार्च को एक बार में 20 फीसदी और क्लियर कर दिया। अब कुल मिलाकर कमर्शियल LPG 50 फीसदी तक पहुंच गई है।

इस बढ़ोतरी का फायदा सबसे पहले रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों, फैक्ट्री कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, डेयरी वाले, कम्युनिटी किचन और सरकारी सब्सिडाइज्ड खाने के ठिकानों को मिल रहा है। माइग्रेंट मजदूरों के लिए 5 किलो के सिलेंडर भी मुहैया कराए गए हैं।

करीब 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में नई व्यवस्था लागू हो चुकी है। बाकी इलाकों में पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियां सप्लाई संभाल रही हैं। पिछले आठ दिनों में करीब 15,440 टन कमर्शियल LPG उठाई गई है।

स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों को टॉप प्राथमिकता बनी हुई है। ये दोनों सेक्टर कुल कमर्शियल LPG का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं। दुनिया भर में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन सरकार का कहना है कि घरेलू स्तर पर चीजें कंट्रोल में हैं और शहरों में PNG की ओर शिफ्ट होने की कोशिशें तेज हैं।

यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रादेशिक सेवारत वैश्य संस्था का हल्ला बोल

प्रबुद्धजनों ने सवर्ण समाज व शैक्षणिक व्यवस्था के हितों के विरुद्ध बताया

कोटा। Protest against UGC rules: प्रादेशिक सेवारत वैश्य संस्था के तत्वावधान में रविवार को यूजीसी द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों के विरोध में जवाहर नगर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और आपातकालीन बैठक का आयोजन किया गया।

संस्था द्वारा इस कानून को ‘काला कानून’ करार देते हुए इसके विरुद्ध उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत जवाहर नगर थाना क्षेत्र के इंदिरा विहार में एक विशाल सभा के साथ हुई। जिसमें बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन और पदाधिकारी सम्मिलित हुए।

सभा के दौरान मुख्य वक्ता सुरेंद्र शर्मा, राजेंद्र सिंह, हुकुमचंद मंगल, मनोहर खंडेलवाल, अनिल तिवारी और विजय भारद्वाज ने अपने संबोधन में यूजीसी के नए प्रावधानों की कड़ी आलोचना की। वक्ताओं ने एकजुट होकर इस कानून का विरोध करने का आह्वान किया और इसे सवर्ण समाज व शैक्षणिक व्यवस्था के हितों के विरुद्ध बताया।

प्रादेशिक अध्यक्ष हुकुमचंद मंगल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संस्था इन विसंगतिपूर्ण नियमों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा। सभा के पश्चात समाज के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जवाहर नगर थाने के सामने से मुख्य मार्ग होते हुए तलवंडी और सेंट्रल पब्लिक स्कूल तक एक विशाल जुलूस निकाला।

जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और यूजीसी के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। “यूजीसी मुर्दाबाद” और “काला कानून वापस लो” जैसे नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने अपना रोष प्रकट किया।

यह जुलूस वापस जवाहर नगर थाने के सामने पहुँचा। जहाँ एक संक्षिप्त सभा के बाद कार्यक्रम का विसर्जन किया गया। कोषाध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार ने इन नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।

विरोध प्रदर्शन और बैठक में कोषाध्यक्ष मुकेश कुमार गुप्ता, कैलाश चंद मंगल, राकेश गुप्ता, मनोज गुप्ता (पार्षद), रमेश गुप्ता, ओपी बंसल, एसके गुप्ता, बालकिशन शर्मा, रूपेंद्र खंडेलवाल, किशन चंद गुप्ता, रमेश विजय, बद्री प्रसाद गुप्ता, श्यामलाल गुप्ता, पुरुषोत्तम चित्तौड़ा, गोपाल लाल गर्ग और सत्यनारायण शर्मा सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

इलेक्ट्रॉनिक कांटे की जगह धर्मकांटे पर हो कृषि जिंस की तुलाई: भारतीय किसान संघ

लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने ली मंडी समिति की बैठक में हुए हंगामे की जानकारी

कोटा। भारतीय किसान संघ के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमण्डल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट कर उन्हें क्षेत्र के किसानों की समस्याओं से अवगत कराते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान बिरला ने मंडी समिति की बैठक में हुए हंगामे और विवादित घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संघ के पदाधिकारियों से इसकी पूरी जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि बैठक में किन बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई और हंगामा किन कारणों से हुआ।

प्रतिनिधिमण्डल में प्रान्त प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, सम्भाग अध्यक्ष गिरिराज चौधरी, जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा और जिला मंत्री रूपनारायण यादव शामिल थे। उन्होंने स्पीकर बिरला को बताया कि मंडी प्रशासन और किसानों के बीच तुलाई और हम्माली की राशि को लेकर गतिरोध बना हुआ है।

संघ ने स्पष्ट किया कि भामाशाह मंडी में किसानों के साथ हो रही ज्यादती और नियमों के विरुद्ध वसूली के कारण ही रोष व्याप्त है। बिरला ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में कहा कि मंडी में प्रति कट्टा 200 से 300 ग्राम अतिरिक्त वजन लेने की प्रथा को तुरंत बंद किया जाए और महिला श्रमिकों के नाम पर की जा रही 2 रुपए प्रति कट्टा की अवैध वसूली पर रोक लगे। इसके साथ ही, खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि और अतिवृष्टि के मुआवजे का भुगतान न होने का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया गया। संघ ने मांग की है कि किसानों के समय और धन की बचत के लिए मंडी में नीलामी की प्रक्रिया किसानों के वाहनों पर ही की जाए और धर्म कांटे पर तुलाई सुनिश्चित की जाए। ताकि बम्पर आवक के समय मंडी में जाम की स्थिति न बने।

लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने प्रतिनिधि मण्डल को आश्वस्त किया कि वे मंडी समिति के हंगामे और ज्ञापन में वर्णित अन्य समस्याओं को लेकर स्वयं प्रशासनिक अधिकारियों से फीडबैक लेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि मंडी में पारदर्शिता लाने और किसानों को उनके हक का पूरा दाम व सम्मान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

बिरला ने कहा कि जल्द ही मंडी प्रशासन के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी विषयों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि वे इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों से वार्ता कर समाधान सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा।

ऑनलाइन गिरदावरी में खेत में दिखा रही शून्य फसल
प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने बताया कि लोकसभा स्पीकर बिरला को बताया कि ऑनलाइन की गई गिरदावरी में खेत में शून्य फसल दर्ज हो रही है। जबकि खेतों में फसल खड़ी है। यह तकनीकी कारणों से हो रहा है।भारतीय किसान संघ ने यह भी मांग की कि ऑनलाइन गिरदावरी में तकनीकी त्रुटियों के कारण जो फसलें ‘शून्य’ दिखाई दे रही हैं, उन्हें पोर्टल खोलकर दुरुस्त किया जाए।

इसके साथ ही, किसान संघ ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद में गुणवत्ता शर्तों में छूट देने और सरसों व चने की खरीद सीमा को 25 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति किसान करने का आग्रह किया है। जिसे हर बार किसान की उपज बिकने के बाद बढ़ाया जाता है। साथ ही, चंद्रेशल में पूर्व निर्धारित भूमि पर थोक फल-सब्जी मंडी का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की भी मांग रखी गई।

ईरानी बंदरगाह पर अमेरिकी हमले से भारत-रूस के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को झटका

7 दिन में मुंबई से मॉस्को पहुंचने वाला 100 अरब डॉलर का प्लान खतरे में

नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के बंदर अंजाली पर मिसाइल हमला किया है। यह मुंबई से रूस के सेंट पीटर्सबर्ग को जोड़ने वाले 7,200 किमी लंबी इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का अहम ट्रांजिट हब है।

भारत और रूस ने इस कॉरिडोर के जरिए 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन जानकारों का कहना है कि ईरानी बंदरगाह पर मिसाइल हमले से भारत और रूस के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को झटका लग सकता है।

इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर स्वेज नहर को बाइपास करता है और माना जा रहा है कि इससे एशिया और यूरोप के बीच ट्रेड में तेजी आएगी। इजरायल और अमेरिका ने कैस्पियन सागर के तट पर स्थित बंदर अंजाली पर 18 मार्च को मिसाइल हमला किया। इससे वहां कस्टम हाउस और दूसरे स्ट्रक्चर्स को नुकसान पहुंचा है।

मुंबई से मॉस्को 7 दिन में
मॉस्को यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया, अफ्रीका स्टडीज के प्रोफेसर रेनात कारामुरजोव ने कहा कि स्वेज नहर को बाइपास करने वाले इस रूट से सुरक्षित माना गया था लेकिन इजरायली और अमेरिकी हमलों के कारण अब इंश्योरेंस और फ्रेट के रेट में तेजी आएगी। इससे रूस और सीआईएस के दूसरे देशों पर नकारात्मक असर होगा।

रूस के पॉलिटिकल एनालिस्ट सर्गेई स्ट्रोकन ने एक टीवी डिबेट में कहा, ‘यह कॉरिडोर भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए बहुत अहम है क्योंकि इसमें मॉस्को से मुंबई के बीच ट्रांजिट टाइम 25-30 दिन से घटकर महज 7 दिन रह जाता है।’ रूस के डिप्टी पीएम विताली सेवलियेव ने कहा कि 2025 के अंत तक इस रूट से 7.5 मिलियन टन से अधिक कार्गो की आवाजाही हुई थी।

क्या है यह प्रोजेक्ट
INSTC के तहत रूस एक ऐसी रेल लाइन बना रहा है जो रूस को सीधे ईरान के बंदरगाहों से जोड़गी। इससे मुंबई तक उसकी पहुंच आसान जाएगी। रूस ने इस प्रोजेक्ट के लिए ईरान को 1.4 अरब डॉलर का लोन देने पर सहमति जताई थी। इस रूट के जरिए सामान को सेंट पीटर्सबर्ग से मुंबई पहुंचने में महज 10 दिन का समय लगेगा। अभी इसमें 30 से 45 दिन का समय लगता है।

सनकी डोनाल्ड ट्रंप के बयान से क्रिप्टो मार्केट लड़खड़ाया, बिटकॉइन 68000 डॉलर से नीचे

नई दिल्ली। Bitcoin Price: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान से क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है और ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू हो गई। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने 48 घंटे के भीतर होर्मुज की खाड़ी को नहीं खोला तो अमेरिका उसके पावर प्लांट तबाह कर देगा।

इससे पश्चिम एशिया में 23 दिन से चल रहे युद्ध को और भीषण होने की आशंका बढ़ गई है और दुनियाभर में निवेशकों के हाथपांव फूल गए हैं। दुनिया की सबसे बड़ी, सबसे पुरानी और सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमत 68,000 डॉलर से नीचे आ गई और पूरे क्रिप्टो मार्केट में भूचाल आ गया।

ट्रंप ने महज 24 घंटे में ईरान मामले में यू-टर्न लिया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वह ईरान में लड़ाई खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन उनके आज के बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है।

इससे पूरी दुनिया में निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि ट्रंप के बयान के महज 60 मिनट के भीतर 240 मिलियन डॉलर की लेवर्ड क्रिप्टो पोजीशन लिक्विडेट हो गई। इससे बिटकॉइन $68,000 से नीचे आ गई।

क्यों गिर रही है बिटकॉइन
इस हफ्ते की शुरुआत में यानी 18 मार्च को बिटकॉइन $76,000 के ऊपर चली गई थी जो उसका छह हफ्ते का हाई लेवल था। मगर पिछले तीन दिन से इसमें गिरावट आई है। बिटकॉइन और क्रिप्टो मार्केट तेल की बढ़ती कीमत और पश्चिम एशिया में बढ़ रहे संकट का असर दिख रहा है। माना जा रहा है कि अगर ईरान युद्ध जल्दी समाप्त नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

Stock Market: अगले सप्ताह शेयर बाजार गिरेगा या चमकेगा, जानिए एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली। Stock Market This Week : आने वाले सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा पर कई अहम वैश्विक और घरेलू कारकों का असर देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित करते रहेंगे। यही वजह है कि बाजार में सतर्कता का माहौल बना रह सकता है।

यह सप्ताह छुट्टियों के कारण छोटा रहने वाला है, क्योंकि गुरुवार को श्री राम नवमी के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेगा। ऐसे में सीमित कारोबारी दिनों में ही बाजार की चाल तय होगी, जिससे उतार-चढ़ाव की संभावना भी बढ़ सकती है।

अजीत मिश्रा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच यह सप्ताह आंकड़ों के लिहाज से काफी अहम रहेगा। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव बाजार के लिए प्रमुख बाहरी कारक बने रहेंगे और यही निकट अवधि के ट्रेंड को तय करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो इसका असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ेगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बन सकता है।

भारतीय शेयर बाजार में इस महीने विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है। अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक करीब 88,180 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। बाजार से इस बड़ी निकासी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को मुख्य वजह माना जा रहा है।

पोनमुडी आर के मुताबिक, आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और यह पूरी तरह घटनाओं पर निर्भर रहेगा। उन्होंने कहा कि खासतौर पर मध्य पूर्व की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास के हालात पर बाजार की दिशा तय होगी।

अगर वहां तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती हैं। इससे महंगाई और चालू खाते का दबाव बढ़ेगा और निवेशकों का रुख जोखिम से दूर रहने वाला हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों को विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल और वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार का माहौल भी अहम रहेगा। अगर तनाव कम होता है या कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है। वहीं, हालात बिगड़ने पर बाजार में और गिरावट आ सकती है।

पिछले हफ्ते भी शेयर बाजार में हल्की कमजोरी देखने को मिली थी। बीएसई सेंसेक्स करीब 31 अंक गिरा, जबकि एनएसई निफ्टी में लगभग 37 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक सावधानी बरत रहे हैं।

WhatsApp पर आ रहा ऑफ्टर रीडिंग टाइमर फीचर, जानिए कैसे करेगा काम

नई दिल्ली। WhatsApp After reading feature: वॉट्सऐप अपने यूजर्स को बेहतरीन एक्सपीरियंस देने के लिए अपने प्लेटफॉर्म को नए-नए फीचर्स के साथ तेजी से अपडेट कर रहा है। एक खबर है कि WhatsApp अपने ‘डिसअपीयरिंग मैसेज’ फीचर के लिए एक बड़े प्राइवेसी अपग्रेड पर काम कर रहा है।

इस अपग्रेड से यूजर्स किसी नए मैसेज को पढ़ने के कुछ ही देर बाद उसे अपने-आप डिलीट कर पाएंगे। इस नए फीचर को “After reading” नाम दिया गया है।

वॉट्सऐप के नए फीचर ट्रैक करने वाली वेबसाइट WABetaInfo ने ऐप के लेटेस्ट बीटा बिल्ड में इस फीचर को देखा है और उम्मीद है कि मेटा के इस पर्सनल मैसेजिंग ऐप में यह फीचर जल्द ही आ जाएगा। कैसे काम करेगा नया फीचर, चलिए एक नजर डालते हैं सामने आई डिटेल्स पर…

नया ‘ऑफ्टर रीडिंग’ टाइमर क्या है
वॉट्सऐप अभी यूजर्स को 24 घंटे, 7 दिन या 90 दिन के लिए ‘disappearing message timers’ चालू करने की सुविधा देता है। इसका मतलब है कि रिसीवर को भेजे गए कोई भी मैसेज उस तय समय-सीमा के अंदर अपने-आप गायब हो जाएंगे।

हालांकि यह समय-सीमा ज्यादातर लोगों के लिए काफी काम की है, लेकिन ‘one-time password’ (OTP), ‘verification code’ या ऐसी ही दूसरी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी शेयर करने के लिए यह शायद उतनी सही न हो।

ऑफ्टर रीडिंग’ टाइमर फीचर
इस समस्या को हल करने के लिए, वॉट्सऐप कथित तौर पर “After reading” (पढ़ने के बाद) विकल्प पर काम कर रहा है। यह एक सख्त टाइमर सेट करेगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मैसेज रिसीवर द्वारा देखे जाने के तुरंत बाद ही गायब हो जाए, ताकि वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ न लगे।

खास बात यह है कि वॉट्सऐप में पहले से ही ‘View Once’ का ऑप्शन मौजूद है, जो इसी तरह का काम करता है, इसके जरिए यूजर्स किसी मीडिया फाइल या वॉयस नोट को सिर्फ एक बार देखने के लिए शेयर कर सकते हैं, लेकिन यह नया फीचर अब मैसेज के लिए भी यही फंक्शनैलिटी ले आएगा।

कैसे काम करेगा फीचर
खबरों के मुताबिक, यह फीचर 15 मिनट का एक सख्त काउंटडाउन शुरू करेगा। 15 मिनट बाद, मैसेज भेजने वाले और पाने वाले, दोनों की चैट से गायब हो जाएगा। हालांकि, अगर मैसेज पढ़ा नहीं जाता है, तो वह 24 घंटे तक चैट में बना रहेगा, इसके बाद वह अपने-आप खत्म हो जाएगा और गायब हो जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि WABetaInfo की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह फीचर तब भी बिना किसी रुकावट के काम करेगा, भले ही यूजर्स ने अपनी ‘रीड रिसीट्स’ (ब्लू टिक्स) बंद कर रखी हों। सिस्टम तब भी यह ट्रैक करेगा कि मैसेज कब खोला गया है, ताकि पाने वाले के फोन पर 15 मिनट का ‘सेल्फ-डिस्ट्रक्ट’ काउंटडाउन शुरू हो सके, इस तरह, रिसीवर की ‘रीड रिसीट’ सेटिंग्स चाहे जो भी हों, भेजने वाले की प्राइवेसी बनी रहेगी।

खबरों के अनुसार, यूजर्स के पास यह सुविधा होगी कि वे इस फीचर को या तो हर चैट के लिए अलग से चालू कर सकें या फिर सभी बातचीत के लिए एक साथ।

कब उपलब्ध होगा यह फीचर
WABetaInfo ने Android 2.26.12.2 अपडेट के लिए वॉट्सऐप बीटा में ‘After reading’ फीचर को देखा। हालांकि, यह फिलहाल अभी डेवलपमेंट के दौर में है और अभी बीटा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। खबरों के मुताबिक, वॉट्सऐप इस नए टाइमर को लागू करने के तरीके को बेहतर बना रहा है ताकि यह भरोसेमंद तरीके से काम करे, ऐसा माना जा रहा है कि यह ऐप के आने वाले किसी अपडेट के साथ रोल आउट किया जा सकता है।