Monday, July 13, 2026
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ईसाई धर्म अपनाने के बाद कोई व्यक्ति SC-ST का सदस्य नहीं माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई शख्स अगर ईसाई धर्म अपना लेता है और उस धर्म का सक्रिय तौर पर पालन और प्रचार करता है तो उसे अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस मामले में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी जोड़ा कि किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने से अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है।

अदालत ने उल्लेख किया कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 इस बात को स्पष्ट करता है और इस आदेश के तहत लगाया गया प्रतिबंध पूर्ण (absolute) है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1950 के आदेश की धारा 3 में निर्दिष्ट धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने पर, जन्म की परवाह किए बिना, अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है।

कोई भी व्यक्ति जो धारा 3 के तहत अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाता, उसे संविधान या संसद अथवा राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी कानून के तहत कोई भी वैधानिक लाभ, संरक्षण, आरक्षण या अधिकार प्राप्त नहीं हो सकता और न ही उसे दिया जा सकता है। यह प्रतिबंध पूर्ण है और इसमें कोई अपवाद नहीं है। कोई व्यक्ति एक साथ धारा 3 में निर्दिष्ट धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन और प्रचार करते हुए अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा नहीं कर सकता।

यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के मामले में दिया गया, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और पादरी (पास्तर) के रूप में कार्य कर रहा था, लेकिन उसने कुछ व्यक्तियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था, जिन पर उस पर हमला करने का आरोप था।

उसने इस अधिनियम के तहत संरक्षण का दावा किया, जिसे आरोपियों ने इस आधार पर चुनौती दी कि वह पादरी धर्म परिवर्तन कर चुका है और सक्रिय रूप से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है।

इसके खिलाफ पादरी ने विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने यह नहीं कहा कि उसने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल धर्म में पुनः प्रवेश किया है।

इसके विपरीत, साक्ष्य से स्पष्ट है कि अपीलकर्ता लगातार ईसाई धर्म का पालन करता रहा और एक दशक से अधिक समय से पादरी के रूप में कार्य कर रहा है, तथा गांव में नियमित रूप से रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित कर रहा है। यह भी स्वीकार किया गया है कि कथित घटना के समय वह घर पर प्रार्थना सभा आयोजित कर रहा था। ये सभी तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि घटना के दिन भी वह ईसाई ही था।”

क्या था मामला
यह निर्णय एक आपराधिक याचिका से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता पर एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं 3(1)(r), 3(1)(s), 3(2)(va) और भारतीय दंड संहिता की धाराएं 341, 506, 323 सहपठित धारा 34 के तहत अपराध का आरोप था। शिकायतकर्ता जो पिट्टलावनिपालेम गांव में रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित करने वाला एक पादरी था, ने अपनी प्रारंभिक शिकायत में आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने उस पर कई बार हमला किया, उसे और उसके परिवार को बार-बार जान से मारने की धमकी दी और जाति के आधार पर अपमानित किया।

पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए 7 नए समूह का गठन: पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने राज्यसभा में बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए सात नए समूहों का गठन किया गया है। ये समूह एलपीजी, जरूरी सामानों की सप्लाई, महंगाई और अन्य अहम क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर सरकार को सुझाव देंगे।

मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके चलते भारत के सामने आई चुनौतियों पर राज्यसभा में अपनी ओर से वक्तव्य देते हुए कहा कि तीन सप्ताह से ज्यादा समय हो चुका है और इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की रेगुलर सप्लाई प्रभावित हो रही है।

हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत हैं और सरकार पल पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए है। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म प्रभावों पर नजर रखने के लिए एक रणनीति के तहत काम कर रही है। सरकार ने एक अंतर मंत्रालयी समूह बनाया है जो नियमित बैठक कर आयात-निर्यात में आने वाली बाधाओं का आकलन करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों की चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के विभिन्न समूह बने थे, वैसे ही कल सात नये समूहों का गठन किया गया है।

ये समूह गैस, महंगाई जैसे विषयों पर विचार कर समाधान के लिए काम करेंगे। मोदी ने कहा कि जिस प्रकार कोरोना काल में केंद्र एवं राज्य की सरकारों ने मिलकर ‘टीम इंडिया’ की तरह काम किया था, वैसे ही आगे भी काम करते रहना पड़ेगा।

मोदी ने कहा, ”हम खाड़ी के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के जरिए क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने संघर्ष को कम करने और होर्मुज मार्ग को खोलने के बारे में भी बातचीत की है।”

खाड़ी के देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनका जीवन एवं आजीविका भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है। होर्मुज जलडमरूमध्य में दुनिया के कई जहाज फंसे हुए हैं। उनमें भारतीय चालक दल की संख्या भी बहुत अधिक है तथा यह भी भारत की एक बड़ी चिंता का विषय है।

होर्मुज व्यापार जैसे रूट में रुकावट अस्वीकार्य
पश्चिम एशिया संकट पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला और होर्मुज व्यापार जैसे अंतरराष्ट्रीय मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। भारत ने नागरिकों, असैन्य ढांचों, ऊर्जा एवं परिवहन से जुड़ी अवसरंचना पर हमलों का विरोध किया है। युद्ध के इस माहौल में भारत कूटनीति के जरिये भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सतत प्रयास कर रहा हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में देश-विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक लगभग एक हजार भारतीय सुरक्षित वापस आए हैं।

इनमें मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 700 से अधिक युवा हैं। इन हमलों में कुछ भारतीयों की जान गयी है और कुछ घायल हुए हैं तथा उनके परिवार की सहायता के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

मोदी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दुनिया के विभिन्न देशों से तेल एवं एलपीजी गैस से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। तेल, गैस और उर्वरक लाने वाले जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें, सरकार इसके लिए हर तरह से प्रयास कर रही है।

उन्होंने आगाह किया कि अगर इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहती हैं तो गंभीर दुष्परिणाम तय हैं। इसलिए भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपना जुझारूपन बनाने के लिए जो प्रयास किए हैं, वह उन्हें और गति दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी संकट हमारे हौसले और धैर्य की परीक्षा लेता है।

मोदी ने कहा कि देश ऐसे संकटों का सामना कर सके, इसके लिए पिछले 11 वर्ष में निरंतर निर्णय किए गए हैं तथा ऊर्जा आयात का विविधिकरण ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। देश की कच्चे तेल एवं गैस की मांग को 27 देशों से आयात करके पूरा किया जाता था, वहीं आज भारत 41 देशों से ऊर्जा आयात करता है।

बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। उन्होंने आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है।

कच्चे तेल के भंडारण पर दिया भरोसा
प्रधानमंत्री ने उच्च सदन के जरिए देश को आश्वासन दिया कि भारत के पास कच्चे तेल के भंडारण एवं आपूर्ति की व्यवस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कई वर्षों से पीएनजी को बढ़ावा देने तथा रसोई गैस के उत्पादन को बढ़ाने के लिए काफी काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास रहा है कि हर क्षेत्र में दूसरों पर निर्भरता को कम से कम किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने विदेशी जहाजों पर व्यापार से बचने के लिए देश में 70 हजार करोड़ रूपये से भारत में निर्मित जहाज बनाने का कार्यक्रम शुरू किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया और सरकार इस बात को ध्यान में रख कर काम कर रही है कि इसका भारत पर कम से कम प्रभाव हो। उन्होंने देश में उर्वरक की कमी नहीं होने देने के लिए किये जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, ”मैं देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी।”

भारत की ऊर्जा जरूरतों को 41 देशों से पूरा करने के प्रयास

आत्मनिर्भरता के लिए विदेशी जहाजों पर निर्भरता घटाने की भी कोशिश

नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में संकट के बीच भारत ने ऊर्जा आपूर्ति के लिए विदेशी निर्भरता को लगातार कम करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। पहले भारत क्रूड ऑयल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा जरूरतों के लिए 27 देशों पर निर्भर था, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है।

इससे आपूर्ति स्रोतों में विविधता आई है और किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता कम हुई है। सरकार ने घरेलू गैस आपूर्ति को मजबूत करने के लिए LPG के साथ PNG को बढ़ावा दिया है।

साथ ही, समुद्री परिवहन में आत्मनिर्भरता के लिए विदेशी जहाजों पर निर्भरता घटाने का संकल्प लिया गया है, क्योंकि वर्तमान में भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों से होता है।

इस संकट के दौरान भारत की आर्थिक मजबूती और तैयारियों ने विश्वास बढ़ाया है। पिछले एक दशक में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए क्रूड ऑयल का भंडारण प्राथमिकता दी गई। वर्तमान में देश के पास 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक पेट्रोलियम भंडार हैं, जो तीन स्थानों (विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर) पर स्थित हैं। तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के पर्याप्त स्टॉक बनाए रखती हैं।

सरकार ने क्रूड ऑयल और अन्य जरूरी सामानों के परिवहन के लिए स्वदेशी जहाजों के निर्माण पर जोर दिया है। लगभग 70,000 करोड़ रुपये की योजना के तहत मेड इन इंडिया जहाजों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वैश्विक संकट में आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित रहेगी।

भारत ने उठाए कई कदम
मौजूदा पश्चिम एशिया संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और परिवहन संबंधी सुविधाओं पर किसी भी हमले का विरोध किया है। डिप्लोमेसी के माध्यम से भारत अपनी जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है और बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दे रहा है।

सरकार का प्रयास है कि तेल, गैस, उर्वरक जैसे आवश्यक सामानों से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें। ऐसे समय में कालाबाजारी और जमाखोरी करने वाले सक्रिय हो जाते हैं, इसलिए जहां भी ऐसी शिकायतें आएं, त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

भारत का आर्थिक आधार मजबूत है और सरकार एकल ईंधन स्रोत पर निर्भरता से बचने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले 11 वर्षों में लिए गए निरंतर निर्णयों से देश किसी भी संकट का बेहतर सामना करने में सक्षम हुआ है। प्रधानमंत्री ने सदन और राष्ट्र को आश्वासन दिया कि क्रूड ऑयल की पर्याप्त स्टोरेज और निरंतर सप्लाई व्यवस्था है।

मार्च में PMI गिरकर साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर

नई दिल्ली। Purchasing Managers Index: मार्च महीने में भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार करीब साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई ऊर्जा संकट और बाजार में अनिश्चितता का असर मांग और लागत दोनों पर देखने को मिला है। यह जानकारी S&P Global द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है।

HSBC का फ्लैश इंडिया कंपोजिट पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI मार्च में घटकर 56.5 रह गया, जो फरवरी में 58.9 था। यह स्तर अक्टूबर 2022 के बाद सबसे कम है। हालांकि, यह आंकड़ा अब भी 50 से ऊपर है, जो यह दिखाता है कि गतिविधियां लगातार 56 महीनों से बढ़त में बनी हुई हैं।

फ्लैश PMI शुरुआती संकेत देता है और इसे अंतिम आंकड़ों से करीब एक हफ्ता पहले जारी किया जाता है। यह कुल सर्वे प्रतिक्रियाओं के लगभग 90 प्रतिशत के आधार पर तैयार किया जाता है।

सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि बाजार में अस्थिरता, महंगाई का दबाव और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से बनी अनिश्चितता के कारण आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।

HSBC की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी के अनुसार, ऊर्जा से जुड़ी समस्याओं के चलते मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों में उत्पादन की रफ्तार धीमी हुई है। घरेलू मांग कमजोर रही, जिससे नए ऑर्डर की वृद्धि भी तीन साल से अधिक समय के सबसे धीमे स्तर पर रही, हालांकि निर्यात ऑर्डर में अच्छी बढ़त देखी गई।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का फ्लैश PMI मार्च में गिरकर 53.8 हो गया, जो फरवरी में 56.9 था। यह करीब साढ़े चार साल का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले सितंबर 2021 में यह 53.7 पर था।

वहीं, सर्विस सेक्टर का PMI भी मार्च में घटकर 57.2 रह गया, जो फरवरी में 58.1 था। यह जनवरी 2023 के बाद का सबसे कम स्तर है।

सबसे ज्यादा असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा है। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया के तनाव से बाजार प्रभावित हुआ है, महंगाई बढ़ी है और मांग में कमी आई है। इसके चलते फैक्ट्री उत्पादन की वृद्धि अगस्त 2021 के बाद सबसे धीमी रही है।

अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ती लागत के दबाव के बीच देश में कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार मार्च में कुछ धीमी रही। सर्विस सेक्टर में बढ़ोतरी जनवरी 2025 के बाद सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई। कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा में बाधाएं और अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव का असर कारोबार पर पड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर में नए ऑर्डर की रफ्तार कम हुई है। कुल बिक्री नवंबर 2022 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़ी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिलने वाले ऑर्डर में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें सर्विस सेक्टर की भूमिका सबसे ज्यादा रही।

कंपनियों की लागत में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई। करीब चार साल में पहली बार इनपुट कॉस्ट इतनी तेजी से बढ़ी है। एल्युमिनियम, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऊर्जा, खाद्य पदार्थ, आयरन ओर, लेदर, तेल, रबर और स्टील जैसी चीजों की कीमतों में उछाल इसका बड़ा कारण रहा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनियां बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल रही हैं और अपने मुनाफे में कटौती कर इसका कुछ हिस्सा खुद वहन कर रही हैं। इसके बावजूद मार्च में उत्पाद और सेवाओं की कीमतों में सात महीने की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सर्विस सेक्टर में कीमतों का दबाव मैन्युफैक्चरिंग के मुकाबले ज्यादा रहा। यह स्थिति लागत और ग्राहकों से वसूली जाने वाली कीमत दोनों मामलों में देखी गई।

रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर रही। मार्च में कंपनियों ने तेजी से भर्ती की और रोजगार सृजन अगस्त 2025 के बाद सबसे तेज रहा। कंपनियों का कहना है कि भविष्य में कारोबार बढ़ने की उम्मीद, लंबित ऑर्डर और नए काम मिलने की संभावना के चलते भर्ती में तेजी आई है।

यह सर्वे एसएंडपी ग्लोबल द्वारा किया जाता है, जिसमें करीब 400 मैन्युफैक्चरिंग और 400 सर्विस कंपनियों से जानकारी ली जाती है। जनवरी के मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के अंतिम आंकड़े 2 अप्रैल को जारी होंगे, जबकि सर्विस और कंपोजिट पीएमआई के आंकड़े 6 अप्रैल को जारी किए जाएंगे।

Stock Market: सेंसेक्स 1372 अंक चढ़कर 74068 पर बंद, निफ्टी 22900 के पार

नई दिल्ली। Stock Market Closed, 24 Marchm 2026: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन यानी मंगलवार को घरेलू बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1372.06 अंक या 1.89 प्रतिशत बढ़कर 74,068.45 पर बंद हुआ। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 445.15 अंक या 1.98 प्रतिशत चढ़कर 23,912 पर बंद हुआ।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों से बाजार को राहत मिली। इंडेक्स हैवी वेट एलएन्डटी, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में तेजी से भी बाजार को सपोर्ट मिला। आईटी शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को ऊपर खींचा।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 500 से ज्यादा अंक चढ़कर 74,212.47 पर खुला। खुलते ही इंडेक्स में और तेजी देखी गई। कारोबार के दौरान यह 74,489 अंक तक चढ़ गया था। अंत में 1372.06 अंक या 1.89 फीसदी की बढ़त लेकर 74,068.45 पर बंद हुआ।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) 22,878 अंक पर खुला। इंट्रा-डे ट्रेड में यह 23,057 अंक के हाई लेवल तक गया। अंत में 399.75 अंक या 1.78 फीसदी की बढ़त लेकर 22,912 पर बंद हुआ।

टॉप गेनर्स एंड लूजर्स
सेंसेक्स की कंपनियों में इंडिगो, एल एंड टी, इटरनल और बजाज फाइनेंस सबसे ज्यादा बढ़त में रहने वाले शेयरों में रहे। दूसरी तरफ, पावर ग्रिड और एसबीआई लाल निशान में बंद हुए। ब्रोडर मार्केटस में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 2.68 प्रतिशत और 2.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टर-वार देखें तो ऑटो सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। निफ्टी मीडिया और निफ्टी बैंक सेक्टर ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, निफ्टी फार्मा सेक्टर ने अपने समकक्षों की तुलना में सबसे कम बढ़त हासिल की।

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अमेरिका व ईरान युद्ध के बीच भारत किसके साथ, जानिए पीएम मोदी का जवाब

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के शिखर सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने देश की चिंता नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने की फिक्र में रहकर गलत फैसले लिए।

पीएम मोदी ने विशेष रूप से यूपीए काल में जारी किए गए तेल बांडों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने अपने पत्ते खोले और साफ-साफ बताया कि वे किसके साथ हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2010 के बीच कांग्रेस सरकार ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किए थे। उन्होंने कहा कि उस समय पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें संकट में थीं, लेकिन कांग्रेस देश की नहीं, अपनी सत्ता की चिंता कर रही थी। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हवाले से कहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह फैसला गलत था और इससे आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ पड़ेगा।

पीएम मोदी ने ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार चलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूर से सरकार चला रहे थे, उन्होंने सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय लिया, क्योंकि उस समय कोई जवाबदेही नहीं थी।

उन्होंने खुलासा किया कि इन बांडों का भुगतान 2020 के बाद शुरू हुआ और ब्याज सहित कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस के इस ‘पाप’ को धोने का काम किया है, जिसकी कीमत कम नहीं रही।

वैश्विक परिदृश्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया कई गुटों में बंटी हुई है, लेकिन भारत ने मजबूत और व्यापक साझेदारियां बनाई हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच भारत ने खाड़ी देशों से लेकर वैश्विक पश्चिम और दक्षिण तक सभी के साथ विश्वसनीय साझेदारी कायम की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि हम किसके साथ हैं? मेरा जवाब है- हम भारत के साथ हैं। हम भारत के हितों, शांति और संवाद के साथ हैं।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लड़खड़ा रही है, लेकिन भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है। ऊर्जा, उर्वरक और आवश्यक वस्तुओं के मामले में सरकार ने नागरिकों को न्यूनतम परेशानी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। कोरोना महामारी के बाद से लगातार चुनौतियां आईं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के एकजुट प्रयास से देश हर विपदा से पार पा रहा है।

उन्होंने हाल की 23 दिनों की उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में भी भारत ने अपनी कूटनीति, निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन की ताकत दिखाई है। दुनिया भारत की नीति और रणनीति से आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत प्रगति, विकास और विश्वास के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

अमेरिका की वालेरो रिफाइनरी में धमाके साथ लगी आग, जानिए किसकी है साजिश

नई दिल्ली। US-Iran War: अमेरिका के टेक्सास में स्थित वालेरो एनर्जी रिफाइनरी में जोरदार धमाका हुआ है। यह धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की जमीन हिल गई। घटना का विडियो भी सामने आया है। धमाके के बाद रिफाइनरी में आग लग गई।

यहां से काला धुआं उठता देखा गया है। हालांकि इस धमाके की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। फिलहाल इसका कोई लिंक ईरान के साथ नहीं पाया गया है। जानकारी के मुताबिक यह धमाका 23 मार्च को स्थानीय समय के मुताबिक शाम के 7 बजकर 22 मिनट पर हुआ।

आसपास के लोगों ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि आसपास के घर हिल गए और खिड़कियां टूट गईं। इसके बाद रिफाइनरी से भयंकर काला धुआं उठता हुआ देखा गया। पोर्ट आर्थर में फायर डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने कहा, यह धमाका किस वजह से हुआ, इसका पता लगाया जा रहा है। फिलहाल आग बुझाने की कोशिश जारी है।

अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक इस धमाके में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। आसपास के घरों को खाली कराया गया है। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस विस्फोट के बाद लगी आग से हवा में कोई जहरीला पदार्थ तो नहींघुला है। प्रशासन ने लोगों को घरों के अंदर रहने की हिदायत दी है।

अमेरिका की सबसे बड़ी रिफाइनरी में से एक
वालेरो पोर्ट आर्थर रिफाइनरी टेक्स्सा गल्फ कोस्ट से लगभग 90 मील की दूरी पर स्थित है। यहां लगभग 770 कर्मचारी का मकरते हैं। एक दिन में यहां 435000 बैरेल गैसोलीन, डीजल और जेट फ्यूल रिफाइन किया जाता है। जानकारों का कहना है कि इस रिफाइनरी में आग लगने के बाद ऑपरेशन रुक सकता है। इसका असर क्षेत्रीय फ्यूल सप्लाई पर भी पड़ सकता है।

एक जानकार ने अनुमान लगाया है कि हीटिंग यूनिट में विस्फोट आग लगने की वजह हो सकती है। बता दें कि ईरान से युद्ध के बीच अफवाह यह भी फैल रही है कि ईरान ने ही यह हमला किया है। हालांकि अगर ईरान की सैन्य क्षमता देखें तो उसकी मिसाइलें अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं।

एमसीएक्स पर चांदी 9500 रुपये सस्ती, सोना भी औंधे मुंह गिरा, जानिए आज के भाव

नई दिल्ली। एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार 24 मार्च को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच निवेशकों की सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग कमजोर पड़ी, जिससे दोनों कीमती धातुओं के दाम टूट गए।

एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में गिरावट जारी रही, जो 4.21% या 9,474 रुपये टूटकर 215,693 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि एमसीएक्स सोना भी 1.77% या 2,460 रुपये फिसलकर 136,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

इससे पहले ब्लूमबर्ग के मुताबिक सिंगापुर में सुबह 9:16 बजे हाजिर सोना 1.5% गिरकर 4,340.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 3.3% फिसलकर 66.81 डॉलर पर आ गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट आई।

इससे पहले एशियाई कारोबार के दौरान कॉमेक्स पर सोना करीब 1.5% गिरकर 4,370 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 3.3% फिसलकर 67 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखी।

मार्च 2026 में सोना और चांदी के बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महीने अब तक दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में 20% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जो करीब 45 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इस तेज गिरावट के साथ ही गोल्ड और सिल्वर अब ‘बेयर मार्केट’ के दायरे में प्रवेश कर चुके हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में लगातार चौथे सप्ताह गिरावट जारी है। इसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है, जहां मार्च के दौरान कीमतें करीब 12% से 17% तक टूट चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा माहौल में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है, जिससे बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है।

हाल ही में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद सोने की कीमतें अपने ऑल टाइम हाई से करीब 20–25% तक नीचे आ चुकी हैं। वहीं चांदी में गिरावट और भी तेज रही है, जिसने निवेशकों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। यह गिरावट बताती है कि बाजार में तेजी के बाद अब बड़ा करेक्शन चल रहा है।

गिरावट के पीछे बड़े कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस भारी गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोना अन्य देशों के लिए महंगा हो गया, जिससे इसकी मांग कमजोर पड़ी। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई का दबाव बढ़ा है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं।

ऊंची ब्याज दरों का माहौल सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक माना जाता है। इसके अलावा, बाजार में नकदी की जरूरत बढ़ने पर निवेशकों ने सोने-चांदी में मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर और दबाव आया।

आमतौर पर वैश्विक तनाव के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार अमेरिका-ईरान और मध्य पूर्व के तनाव के बावजूद सोना अपनी चमक बरकरार नहीं रख पाया। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत डॉलर और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की ‘सेफ हेवन’ वाली छवि को इस बार झटका लगा है।

बाजार जानकारों के अनुसार, मौजूदा गिरावट शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बढ़ा सकती है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अवसर भी साबित हो सकती है। हालांकि, फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतने और चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

Stock Market: सेंसेक्स 1516 अंक उछल कर 74200 के पार, निफ्टी 22878 पर खुला

नई दिल्ली। Stock Market, March 24, 2026 : शेयर मार्केट मंगलवार को बड़ी उछाल के साथ खुला। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1516 अंकों की बंपर बढ़त के साथ 74212 पर खुला। जबकि, एनएसई का 50 स्टॉक्स वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 365 अंक ऊपर 22878 के लेवल पर खुलने में कामयाब रहा।

सेंसेक्स में इंडिगो, ईटरनल, एशियन पेंट्स करीब 3 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट, टेक महिंद्रा, अडानी पोर्ट्स, टाइटन, कोटक बैंक, एलएंडटी, ट्रेंट, बीईएल और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी है। सेंसेक्स पर केवल पावर ग्रिड ही लाल निशान पर है और इसमें 1.41 प्रतिशत की गिरावट है।

ग्लोबल मार्केट के संकेत

  • एशियाई बाजारों में जोरदार उछाल
    तनाव कम होने के संकेतों के बाद एशियाई बाजारों में मंगलवार को अच्छी तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 में 2.2%, टॉपिक्स में 2.47%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी में 3.5%, कोस्डैक में 3.29% की भारी तेजी दर्ज की गई। हांगकांग के हैंग सेंग फ्यूचर्स भी मजबूत शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।
  • गिफ्ट निफ्टी दे रहा पॉजिटिव संकेत
    गिफ्ट निफ्टी करीब 22,909 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद स्तर से लगभग 395 अंकों का प्रीमियम दिखाता है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार में अच्छी ओपनिंग हो सकती है।
  • वॉल स्ट्रीट में मजबूत तेजी
    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले टालने के फैसले के बाद वॉल स्ट्रीट में मजबूती आई। डॉऊ जोन्स 1.38% ऊपर 46,208.47 पर बंद हुआ और S&P 500 1.15% ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। नैस्डैक भी 1.38% की तेजी के साथ बंद हुआ।

जंगल कटाई के खिलाफ हुंकार, बारां से शाहबाद तक जनजागृति विरासत यात्रा

जयपुर /बारां। Save Shahabad Forest: शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत अंतरराष्ट्रीय जल दिवस एवं विश्व वानिकी दिवस पर शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर बारां से शाहबाद तक आयोजित जनजागृति विरासत यात्रा ने पूरे क्षेत्र में जनचेतना की लहर दौड़ा दी।

सैकड़ों की संख्या में जुटे आंदोलनकारियों ने सरकार और ग्रीनको के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि शाहबाद के जंगल किसी भी कीमत पर कटने नहीं दिए जाएंगे।

यात्रा की शुरुआत श्रीराम स्टेडियम बारां से हुई, जहां समिति के संरक्षक पर्यावरणविद बृजेश विजयवर्गीय ने अपने उद्बोधन में कहा कि विकास के नाम पर विनाश अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जंगल बचेंगे तभी जीवन बचेगा। उन्होंने सरकार से पर्यावरणीय संतुलन के साथ निर्णय लेने की मांग की।

किशनगंज में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोबिन सिंह ने आंदोलन को राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए कहा कि शाहबाद घाटी केवल बारां की नहीं, पूरे देश की प्राकृतिक धरोहर है। यहां पावर प्लांट लगाना पर्यावरणीय अपराध होगा।

भंवरगढ़ में जागो किसान आंदोलन के अध्यक्ष वरदान सिंह हाडा ने किसानों की पीड़ा सामने रखते हुए चेताया कि जंगल कटे तो खेती, पानी और भविष्य तीनों खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान इस लड़ाई में पीछे हटने वाला नहीं है।

केलवाड़ा में लेडी इंटेक की चेयरमैन नीता शर्मा ने महिला शक्ति की ओर से पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि जंगल बचाना हमारी पीढ़ी की जिम्मेदारी है, नहीं तो आने वाली नस्लें हमें माफ़ नहीं करेंगी।

पर्यावरण प्रेमियों ने किशनगंज, भंवरगढ़, केलवाड़ा एवं समरानिया के बाजारों में जुलुस निकाला और नागरिकों से समर्थन मांगा। स्थानीय नागरिकों ने इन लोगों का स्वागत किया।
समरानियां में गब्बरसिंह यदुवंशी के जोशीले और उत्तेजक उद्बोधन ने आंदोलन में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि जंगल काटने का प्रयास हुआ तो जनआंदोलन और उग्र रूप लेगा।

यात्रा का समापन शाहबाद में हुआ, जहां सभी वक्ताओं और आंदोलनकारियों ने संयुक्त रूप से हुंकार भरते हुए प्रशासन को चेताया। इसके पश्चात एडीएम जब्बरसिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पावर प्लांट को अन्यत्र स्थापित करने तथा शाहबाद जंगल की कटाई तत्काल रोकने की मांग की गई।

आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि शाहबाद घाटी के जंगल केवल हरियाली नहीं, बल्कि जीवन, पानी और भविष्य की गारंटी हैं और इनके संरक्षण के लिए संघर्ष निर्णायक मोड़ तक जारी रहेगा।

इस कार्यक्रम को समर्थन देने कोटा से पर्यावरण प्रेमी डॉ. सुधीर गुप्ता, डॉ. अनुज खण्डेलवाल, पृथ्वी पाल सिंह, चम्बल संसद के कोचिंग शिक्षक मुकेश सुमन समेत सैकड़ों किसान , आदिवासी लोग भी पहुंचे। बाघ -चीता मित्र, राष्ट्रीय जल बिरादरी, कोटा एनवायरनमेंटल सेनीटेशन सोसायटी आदि के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।