Sunday, July 12, 2026
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किसानों से नवीनतम गिरदावरी के आधार पर ही वास्तविक उपज MSP पर खरीदी जाएगी

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ऊर्जा मंत्री नागर के निर्देश पर किसानों की समस्याओं का हुआ निराकरण

​कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के प्रयासों से किसानो को गेंहू ख़रीद प्रक्रिया में आ रही समास्याओं से राहत मिली है। राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2026-27 के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीद के लिए नई मार्गदर्शिका जारी की गई है।

इस व्यवस्था के तहत विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों से उनकी नवीनतम गिरदावरी के आधार पर वास्तविक उपज की ही खरीद की जाएगी। जिसका आकलन राज्य खरीद पोर्टल द्वारा स्वतः किया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2026 की गिरदावरी को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके अभाव में वर्ष 2025 की गिरदावरी मान्य होगी।

उल्लेखनीय है कि ऊर्जा मंत्री नागर ने शुक्रवार को अधिकारियों की बैठक ली थी। बैठक में सामने आया था कि ऑनलाइन सिस्टम में कई किसानों ने अपनी मर्जी से अधिक मात्रा भर दी। जिसके कारण स्लॉट फुल हो गए और कई वास्तविक किसानों को मई-जून तक की लंबी तारीखें मिल रही हैं।

इस विसंगति को दूर करने के लिए मंत्री नागर ने निर्देश दिए थे कि पोर्टल को दोबारा खोलकर गिरदावरी और रजिस्ट्रेशन की त्रुटियों को सुधारा जाए। साथ ही, रकबे के अनुसार ही स्लॉट बुकिंग सुनिश्चित की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

इसके बाद जारी नई व्यवस्था के तहत् विभाग ने कहा है कि “पहले आओ पहले पाओ (FIFO)” के सिद्धांत पर पारदर्शी तरीके से स्लॉट बुकिंग सुनिश्चित करना हमारा उद्देश्य है।

​जिन तहसीलों या गाँवों में गिरदावरी का कार्य ऑनलाइन नहीं हो पाया है। वहाँ के किसानों को तहसीलदार द्वारा प्रमाणित ‘ऑफलाइन गिरदावरी’ पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। हालांकि तहसीलदार द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्रमाणीकरण की अनिवार्यता के कारण किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

इस प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में किसानों को तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। जिससे न केवल किसानों का समय और धन नष्ट होगा, बल्कि तहसील प्रशासन के अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है।

​प्रशासनिक दक्षता और किसान कल्याण को ध्यान में रखते हुए, अब इस मामले को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के समक्ष ले जाने का निर्णय लिया गया है। इस विशेष शर्त में ढील देने अथवा प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने का अनुरोध किया जा रहा है। ताकि किसानों को बेवजह परेशान न होना पड़े।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया सुगम बनी रहे और किसानों को उनके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से समय पर जानकारी मिलती रहे। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी पात्र किसान तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं के कारण अपनी फसल बेचने से वंचित न रहे।

भगवान श्रीराम के प्राकट्योत्सव पर मथुराधीश मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

कोटा। पाटनपोल स्थित शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर में शुक्रवार को श्रीराम नवमी का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के प्राकट्योत्सव की खुशी में मंदिर परिसर ‘मथुराधीश प्रभु’ और ‘जय श्री राम’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था, जो देर शाम तक अनवरत जारी रहा।

इस दौरान ठाकुर जी के स्वरूप शालिगराम जी के पंचामृत दर्शन हुए। प्रथम पीठ की परंपरा के अनुसार, मध्याह्न काल में शालिगराम जी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से दिव्य स्नान कराया गया। युवराज मिलन बावा के सान्निध्य में संपन्न हुए इन दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में वैष्णव जन उमड़े। पुष्टिमार्ग में श्रीराम अवतार को ‘पुष्टिलीला’ का अभिन्न अंग माना जाता है। यही कारण है कि मंदिर में इस दिन का विशेष श्रृंगार और भोग का क्रम देखते ही बन रहा था।

​दर्शनों का बदला क्रम, शयन के दर्शन रहेगें बन्द
सुबह मंगला के दर्शन निर्धारित समय पर खुले। जिसके बाद मध्याह्न उत्सव के विशेष दर्शनों के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर के बाद राजभोग के दर्शनों में प्रभु का अलौकिक स्वरूप निहारने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। शाम को उत्थापन और भोग-आरती के दर्शनों के साथ उत्सव का क्रम आगे बढ़ा। साथ ही, मंदिर प्रबंधन द्वारा यह महत्वपूर्ण सूचना भी साझा की गई कि चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी से ऋतु परिवर्तन के कारण शयन के दर्शन बंद कर दिए गए हैं। अब कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी तक शयन के दर्शन नहीं खुलेंगे।

उत्कृष्ट सिबिल स्कोर एवं स्थायी नौकरी-पेशा व्यक्तियों को प्राथमिकता से ऋण मिलेगा

कोटा नागरिक सहकारी बैंक की संचालक मण्डल व ऋण समिति की बैठक में हुआ निर्णय

कोटा। कोटा नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड की संचालक मण्डल एवं ऋण समिति की बैठक शुक्रवार को रावतभाटा रोड स्थित प्रधान कार्यालय में बैंक अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

बैंक अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला ने बताया कि ऋण धारकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लागू एकमुश्त ऋण वसूली योजना (ओटीएस) के अंतर्गत सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। योजना के तहत 27 सदस्यों को लगभग 56.51 लाख रुपये की ऋण माफी प्रदान की गई है, जिससे संबंधित ऋण धारकों को आर्थिक संबल मिला है।

बिरला ने बताया कि ओटीएस योजना का लाभ लेने के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने अपील की कि जिन ऋण धारकों के खाते गत तीन वर्षो से एनपीए की श्रेणी में हैं, वे निर्धारित समयावधि में बैंक से संपर्क कर इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं।

बिरला ने बताया कि बैठक में ऋण नीति संशोधन पर गहन विचार-विमर्श किया गया। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य एवं बैंकिंग मानकों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि उत्कृष्ट सिबिल स्कोर वाले एवं स्थायी नौकरी पेशा व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि राष्ट्रीयकृत बैंकों की तर्ज पर पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाते हुए ऋण वितरण किया जाएगा, ताकि पात्र व्यक्तियों को समयबद्ध एवं सहज रूप से आर्थिक सहायता मिल सके। इसके तहत दस्तावेज़ीकरण को सरल बनाने, स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करने एवं डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

प्रबंध संचालक बीना बैरवा ने बताया कि बैंक की वित्तीय स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। बैंक का एनपीए घटा है फरवरी माह की तुलना में एनपीए में नेट एनपीए 3.95 से घटकर 2.50 हो गया है। बैठक में 7 नए सदस्यों को सदस्यता प्रदान की गई, वहीं 7 सदस्यों को कुल 22 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया।

प्रबंध संचालक ने बताया कि बैठक में सीआरआर एवं एसएलआर की अनुपालना, ओटीएस योजना,आय-व्यय की तुलनात्मक समीक्षा, जमाओं की समीक्षा, एनपीए वसूली, बैंक ग्राहक सेवा, सुरक्षा व्यवस्था, इंटर-ब्रांच एवं बैंक रीकन्सिलिएशन,एनपीए समीक्षा, यूपीआई सहमति सहित कुल 31 बिंदुओं के एजेंडे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में बोर्ड संचालक महेन्द्र कुमार शर्मा, सुरेश चंद्र काबरा, राकेश जैन, ओमप्रकाश मेहरा, महावीर सुवालका एवं नंदलाल प्रजापति,पद्मनी हाडा, महेश अजमेरा, अरुण भार्गव एवं सुरेन्द्र गोयल विचित्र आदि उपस्थित रहे।

कोटा में मदर डेयरी सफल डिवीजन के आउटलेट खुलेंगे, फोडर प्लांट स्थापित होंगे

अमूल मॉडल की तर्ज में कोटा-बून्दी में होगा डेयरी उद्योग का विकास

नई दिल्ली। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कोटा-बूंदी में डेयरी उद्योग के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की। संसद भवन कार्यालय में हुई इस बैठक में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह के साथ विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में डेयरी सहकारी कवरेज के विस्तार, दुग्ध प्रसंस्करण व विपणन के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने तथा डेयरी मूल्य श्रृंखला के डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही खाद प्रबंधन, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।

गत वर्ष हुई बैठक में दिए निर्देशों की पालना की जानकारी देते हुए डेयरी बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि कोटा-बून्दी में डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए कार्ययोजना बनी है।

इसी क्रम में कोटा में मदर डेयरी के सफल डिवीजन के 15 आउटलेट खुलेंगे, जिनकी संख्या को कोटा-बून्दी में 100 तक ले जाया जाएगा। कोटा-बूंदी क्षेत्र में छोटी बायोगैस इकाइयों और वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चारा उत्पादन प्लांट स्थापित किए जाएंगे।

मदर डेयरी द्वारा दिल्ली की तर्ज पर कोटा में फार्मर टू कंज्यूमर मॉडल को स्थापित किया जाएगा इसके लिए वेल्यू चैन बनाई जा रही है, बीते कुछ माह में 105 टन से अधिक फल औऱ सब्जी की खरीद की गई है।

बिरला ने दुग्ध सहकारिता के सफल मॉडल के रूप में स्थापित अमूल का उदाहरण देते हुए निर्देशित किया कि कोटा दुग्ध संघ भी उसी प्रकार अपने कार्यों का विस्तार करे।

इसके साथ उन्होंने कोटा दुग्ध संघ एवं उजाला एमपीओ के माध्यम से गांव-गांव में डेयरी सहकारिता का विस्तार करने, उत्पादक सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने तथा मिल्क कलेक्शन पॉइंट्स पर इलेक्ट्रॉनिक दूध परीक्षण उपकरण एवं बल्क मिल्क कूलर्स स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही दुग्ध उत्पादकों को उनके बैंक खातों में 100 प्रतिशत डिजिटल भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इन कार्यों की प्रगति रिपोर्ट ली। बिरला ने कहा कि दुग्ध संकलन को अधिकतम किया जाए, ताकि कोटा-बूंदी के किसान एवं पशुपालक पशुपालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

इस दिशा में उन्होंने कोटा-बून्दी दुग्ध संघ के अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि क्षेत्र में कैटल फीड प्लांट के माध्यम से वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर कार्य किया जा रहा है।

पशुओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं तथा 100 नए युवाओं को आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्नीशियन के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। लोक सभा अध्यक्ष ने कोटा में प्रस्तावित एनिमल वेटरनरी कॉलेज की बजट घोषणा पर चल रही कार्यवाही की भी समीक्षा की और प्रगति की जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता, लोकसभा के संयुक्त सचिव गौरव गोयल एवं केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग के अधिकारी, कोटा दुग्ध संघ के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।

Red Chilli: उत्पादन कम होने से लालमिर्च की कीमतों में और तेजी का अनुमान

नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान लालमिर्च के भाव तेजी के साथ बोले गए। उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के दौरान देश में लालमिर्च का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 30/35 प्रतिशत तक रहने के समाचार हैं। जबकि भविष्य में अच्छी तेजी आने के अनुमानों के चलते स्टॉकिस्टों की बराबर लिवाली चल रही है।

हालांकि चीन की मांग कम है लेकिन बांग्ला देश की मांग बराबर बनी हुई है। जिस कारण से कीमतों में तेजी बनी रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य आंध्र-प्रदेश की गुंटूर मंडी में लालमिर्च तेजा का भाव 192/193 रुपए प्रति किलो पर बोला जाने लगा है।

सप्ताह के शुरू में भाव 190 रुपए चल रहा था। गत वर्ष गुंटूर मंडी में इसी समयावधि में लालमिर्च तेजा का भाव 128/130 रुपए प्रति किलो बोला जा रहा था।

तेलंगाना की खम्मम मंडी में लालमिर्च तेजा का भाव 190 रुपए बढ़कर 193 रुपए हो गया है जबकि गत वर्ष इसी समयावधि में भाव 134/135 रुपए बोला जा रहा था। इसके अलावा वारंगल में लालमिर्च तेजा के दाम 194 रुपए से मजबूती के साथ 196 रुपए पर बोले गए। दिल्ली बाजार में भी भाव मजबूत रहे।

जानकारों का कहना है कि पैदावार में कमी एवं बकाया स्टॉक भी कम रह जाने के करण हाल-फिलहाल लालमिर्च की कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में संभावना व्यक्त की जा रही है कि चीन में मांग में सुधार होगा। साथ ही अप्रैल माह में मंडियों में आवक भी घटनी शुरू हो जाएगी। सूत्रों का मानना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि आगामी दिनों में लालमिर्च तेजा का भाव 220/225 रुपए का स्तर छू सकता है।

निर्यात : मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम दस माह में लालमिर्च का निर्यात मात्रात्मक रूप में 18 प्रतिशत बढ़ा है जबकि आय में 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल-जनवरी- 2026 के दौरान लालमिर्च का निर्यात 572757 टन का हुआ। और निर्यात से प्राप्त आय 8150.34 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-ंजनवरी 2025 में निर्यात 484219 टन का हुआ था। और प्राप्त आय 7879.78 करोड़ की रही। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024-25 (मार्च-अप्रैल) के दौरान लालमिर्च का कुल निर्यात 715506 टन का रहा था।

Edible Oil: डॉलर बढ़ने एवं आयात महंगा होने से खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी

मुम्बई। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण विदेशों से न केवल खाद्य तेलों के आयात में बाधा पड़ रही है, बल्कि ऊंचे शिपिंग खर्च के कारण आयात महंगा भी बैठ रहा है। डॉलर के सापेक्ष रुपया की विनिमय दर घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने से भी आयात खर्चीला साबित हो रहा है।

पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और निकट भविष्य में इसके समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इससे भारत जैसे देश के लिए समस्या गंभीर होती जा रही है। भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश है

और अपनी घरेलू जरूरत के करीब 60 प्रतिशत खाद्य तेल का आयात विदेशों से करता है। इसके तहत इंडोनेशिया-मलेशिया से पाम तेल, अर्जेन्टीना-ब्राजील से सोयाबीन तेल तथा रूस- यूक्रेन से सूरजमुखी तेल मंगाया जाता है। पाम तेल का आयात तो सामान्य ढंग से हो रहा है लेकिन सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल के आयात में कठिनाई हो रही है।

पिछले चार सप्ताह के अंदर विभिन्न खाद्य तेलों के दाम में 6 से 14 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है। 27 फरवरी से 25 मार्च के दौरान पाम तेल का भाव 16 प्रतिशत एवं सोया तेल का दाम 14 प्रतिशत उछल चुका है।

टॉप-3 को मोशन एजुकेशन देगा 51 हजार तक के नकद पुरस्कार

जेईई मेन स्टूडेंट्स के लिए 172 शहरों में एक साथ हुआ सीबीटी

कोटा। मोशन एजुकेशन (Motion Education) की ओर से गुरुवार शाम जेईई मेन स्टूडेंट्स के लिए देश के 172 शहरों में एक साथ ऑल इंडिया सीबीटी (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) आयोजित किया गया। इसमें हजारों विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी तैयारी को परखा।

परीक्षा पूरी तरह जेईई मेन के पैटर्न और वास्तविक माहौल पर आधारित रही, ताकि छात्रों को असली परीक्षा से पहले रियल अनुभव मिल सके। टेस्ट की सबसे खास बात इसकी थीम रही- ‘वन नेशन, वन टाइम, वन पेपर’। यानी देश के सभी शहरों में एक ही समय पर, एक ही प्रश्नपत्र के साथ परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक हुई, जो जेईई मेन की सेकंड शिफ्ट के अनुरूप है।

मोशन एजुकेशन के फाउंडर और एजुकेटर नितिन विजय ने बताया कि यह जेईई मेन से पहले की एक नेशनल रिहर्सल है। इससे छात्रों को न केवल प्रश्नों के स्तर का अंदाजा मिला, बल्कि समय प्रबंधन और दबाव में प्रदर्शन करने की भी प्रैक्टिस भी हुई। अप्रैल अटेम्प्ट से पहले ऐसे प्रयास छात्रों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

इस परीक्षा का प्रश्नपत्र उन अनुभवी शिक्षकों द्वारा तैयार किया गया, जो वर्षों से जेईई पैटर्न पर काम कर रहे हैं। पेपर का स्तर, प्रश्नों की विविधता और टाइमिंग पूरी तरह जेईई के मानकों के अनुरूप रखी गई, ताकि छात्रों को किसी भी तरह का अंतर महसूस न हो।

कोटा में भी यह परीक्षा मोदी कॉलेज केंद्र पर आयोजित की गई, जहां छात्रों ने अनुशासित माहौल में परीक्षा दी। कई विद्यार्थियों ने इसे आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनुभव बताया। उनका कहना था कि इस तरह की मॉक परीक्षा से उन्हें अपनी कमजोरियों और मजबूत पक्षों को समझने में काफी मदद मिली।

शुक्रवार शाम तक प्राप्त जानकारी के अनुसार एग्जाम में 60 हजार से अधिक स्टूडेंट्स ने भाग लिया। परीक्षा का परिणाम 28 मार्च को जारी किया जाएगा। रिजल्ट में छात्रों को स्कोर, ऑल इंडिया रैंक की जानकारी दी जाएगी। इससे वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी वास्तविक स्थिति समझ सकेंगे और अप्रैल अटेम्प्ट के लिए सुधार की दिशा तय कर पाएंगे।

प्रतियोगिता को और अधिक प्रेरक बनाने के लिए टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्रों के लिए आकर्षक नगद पुरस्कार भी घोषित किए गए हैं। ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त करने वाले छात्र को 51,000 रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 21,000 और तीसरे स्थान पर आने वाले को 11,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे।

सेंसेक्स 1690 अंक टूटकर 73583 पर बंद, निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूबे

नई दिल्ली। Stock Market Closed : शुक्रवार का दिन शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा है। स्टॉक मार्केट में आज भारी गिरावट देखने को मिली है। 30 संवेदी सूचकांक वाला सेंसेक्स आज शुक्रवार को 1690.23 अंक या फिर 2.25 प्रतिशत की गिरावट के बाद 73583.22 अंक पर बंद हुआ है।

वहीं, निफ्टी 2.09 प्रतिशत या फिर 486.85 अंक की गिरावट के साथ 22819.60 अंक पर बंद हुआ है। स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट की वजह से आज शुक्रवार बीएसई की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 8 लाख करोड़ रुपये तक घट गया। बता दें, सेंसेक्स का इंट्रा-डे लो लेवल आज 73534.41 अंक रहा है।

बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 500 से ज्यादा अंक गिरकर 74,883.79 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 73,534 अंक तक फिसल गया था। अंत में 1690.23 अंक या 2.25 प्रतिशत की गिरावट लेकर 73,583.22 पर बंद हुआ।

इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) पर 23,173.55 खुला। इंट्रा-डे ट्रेड में 22,804 अंक के लो लेवल तक गया। अंत में 486.85 अंक या 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819 पर बंद हुआ।

जियोजित इंवेस्टमेंट्स में रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, ”बढ़ती बॉन्ड यील्ड, पश्चिमी बाजारों से नकारात्मक संकेत और एशियाई बाजारों के मिश्रित प्रदर्शन के बीच उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए।

टॉप लूजर्स एंड गनर्स
सेंसेक्स की कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), इंडिगो, बजाज फाइनेंस, इटरनल, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, एशियन पेण्ट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अदाणी पोर्ट्स प्रमुख रूप से लाभ में रहे। दूसरी तरफ, टीसीएसी और भारती एयरटेल बढ़त में रहने में कामयाब रहे। जबकि पावर ग्रिड 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त लेकर बंद हुआ।

सेक्टोरल मोर्चे पर सभी इंडेक्स लाल निशान में रहे। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स, पीएसयू बैंक इंडेक्स और निफ्टी केमिकल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई। इनमें क्रमश: 3.17 फीसदी, 3.86 प्रतिशत और 3.44 प्रतिशत की गिरावट आई। ब्रोडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 2.24 प्रतिशत और 1.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

हेल्थ इंश्योरेंस नियम: इलाज के लिए 1 घंटे में देनी होगी मंजूरी, 3 घंटे में फाइनल सेटलमेंट

नई दिल्ली। Health Insurance Rules: अब अस्पताल में इलाज और डिस्चार्ज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। बीमा नियामक IRDAI ने नए नियम तय किए हैं। फाइनेंस मंत्रालय ने कहा कि पॉलिसीधारकों को जरूरी सपोर्ट देने के लिए IRDAI ने कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम की प्रोसेसिंग के लिए समयसीमा तय की हैं।

IRDAI ने कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन की मंजूरी एक घंटे के भीतर और फाइनल ऑथराइजेशन की मंजूरी 3 घंटे के भीतर करने की समय सीमा रखी है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी टाइमलाइन तय करने का उद्देश्य देरी घटाना और यह पक्का करना है कि मरीजों को समय से इलाज मिले।

वहीं दूसरी ओर हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर तेजी से तरक्की कर रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 9% की ग्रोथ रेट के साथ टोटल हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रहा। सरकार ने बताया कि हेल्थ इंश्योरेंस की मांग बढ़ने के पीछे लोगों में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता, बेहतर हेल्थकेयर फाइनेंसिंग तक पहुंच और मेडिकल खर्चों से सुरक्षा की जरूरत मुख्य कारण हैं।

कैशलेस क्लेम के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ नियम

मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने के दौरान होने वाली देरी से बचाने के लिए IRDAI ने सख्त समय-सीमा निर्धारित की है:

  • बीमा कंपनियों को कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन अनुरोधों को एक घंटे के भीतर मंजूर करना होगा।
  • अस्पताल से छुट्टी यानी डिस्चार्ज के समय अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया अधिकतम तीन घंटे में पूरी करनी होगी।

इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने का कारण

  1. सबसे बड़ा कारण पॉलिसीधारकों की उम्र है। उम्र बढ़ने के साथ रिस्क फैक्टर में बढ़ोतरी होती है जिससे प्रीमियम बढ़ता है।
  2. लोग अब गंभीर बीमारियों के लिए ज्यादा राशि (Sum Insured) का बीमा ले रहे हैं।
  3. नई पॉलिसियों में ओपीडी और वेलनेस जैसे आधुनिक फीचर जुड़ गए हैं। इससे भी बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी हुई है।

शिकायतों का त्वरित निपटारा

IRDAI के बीमा भरोसा (Bima Bharosa) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में सामान्य और स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी कुल 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 93% शिकायतों का समाधान उसी वित्तीय वर्ष के भीतर कर दिया गया।

अभी भी रिजेक्ट हो रहे क्लेम

सुधारों के बावजूद कुछ क्लेम अब भी रिजेक्ट हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण पॉलिसी की शर्तें जैसे- को-पेमेंट क्लॉज, सब-लिमिट्स, रूम रेंट कैपिंग और नॉन-मेडिकल खर्च हैं। अगर आप कोई हेल्थ इंश्योरेंस खरीद रहे हैं तो उसकी सभी शर्तों और नियमों को ध्यान से पढ़ें और समझें। अगर कोई चीज समझ ना आए तो इंश्योरेंस कंपनी से बात करें। नहीं तो बाद में परेशानी हो सकती है।

मोदी सरकार का फैसला, राजनाथ सिंह की अगुवाई में बना इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप

नई दिल्ली। सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच पैदा होने वाले मामलों पर नजर रखने के लिए कमिटी का गठन किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में ये इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया गया है। ये कमिटी मिडिल ईस्ट में जारी जंग जैसे हालात से देश पर पड़ने वाले असर पर नजर रखेगी।

इस कमिटी की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ दूसरे मंत्री भी सदस्य हैं।

सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जिस तरह से ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का युद्ध चल रहा है। उससे कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा है। भारत में भी एनर्जी क्राइसिस गंभीर न हो जाए।

इसे लेकर कोई पैनिक नहीं फैले, ऐसे मामलों पर खास निगरानी के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप एक्टिव रहेगी। इस कमिटी में राजनाथ सिंह को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस ग्रुप में अमित शाह भी शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, मध्य पूर्व संघर्ष से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया गया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर दिया है।

डीजल निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर और विमानन टरबाइन ईंधन पर लगने वाले करों में भी संशोधन किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ईंधन की कीमतों को स्थिर करना है।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी
सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि शुल्क में यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है।