Sunday, July 12, 2026
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बंपर पैदावार से आलू का निकला दम, किसानों को लागत भी नहीं मिल रही

नई दिल्ली। Potato Price: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर आलू किसानों की बदहाली चरम पर है। बंपर पैदावार के बाद भी किसानों को बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पा रही है और मंहगे किराए के चलते कोल्ड स्टोरों में भी रखने की व्यवस्था नहीं बन पा रही है।

उत्तर प्रदेश के आलू बेल्ट कहे जाने वाले आगरा, फर्रुखाबाद, हाथरस, कन्नौज, फिरोजाबाद और इटावा में किसानों का हाल बदतर हो चला है। इन जिलों में किसानों को आलू की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है और आगे कीमतें बढ़ने के आसार न देखते हुए कोल्ड स्टोरों में रखना भी भारी लग रहा है। किसानों को इस समय आलू की कीमत बामुश्किल 5 से 7 रूपये किलो मिल रही है जबकि मंहगे बीज-खाद को देखते हुए लागत ही 10 रूपये किलो पड़ रही है।

इस बार आलू की कुफरी, चिप्सोना, सिंदूरी व फ्राईसोना जैसी वैराइटी के बीज 2200 रूपये क्विंटल बिके थे जबकि खाद 1800 रूपये बोरी मिली। इन हालात में किसानों के लिए एक क्विंटल आलू की लागत 1000 रूपये से ज्यादा की पड़ रही है। अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कीमतों में गिरावट को देखते हुए किसान आलू की खोदाई तक नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि 350 रूपये प्रतिदिन की मजदूरी देकर आलू की खोदाई करवाने के बाद लागत की आधी कीमत मिलना भी मुश्किल हो गया है।

भारतीय किसान यूनियन अवध क्षेत्र के पदाधिकारी उत्कर्ष तिवारी का कहना है कि किसानों के सामने कोल्ड स्टोरों में रखने का विकल्प भी नहीं बचा है। इसका बड़ा कारण आगे भी आलू की कीमतों को लेकर कोई भरोसा न दिखना है। वो कहते हैं कि कोल्ड स्टोर में 350 से 400 रूपये क्विंटल का भाड़ा देने के बाद लागत, ढुलाई वगैरा मिलाकर किसान को फायदा तभी होगा जब उसे दाम कम से कम 1700 से 2000 रूपये क्विंटल मिले।

तिवारी कहते हैं कि पैदावार, मांग और बाजार के हाल देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही है कि इतने दाम मिलें। उनका कहना है कि तमाम दावों-वादें के बाद भी प्रदेश में आलू के उत्पादों के कारखाने नहीं लगे हैं लिहाजा किसानों के पास घाटा उठाने का अलावा कुछ बचता नहीं है।

बंपर पैदावार से कीमतों में गिरावट
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में इस बार आलू की बोआई करीब 7 लाख हेक्टेयर में की गयी थी जोकि देश भर के रकबे का करीब 30 फीसदी है। आलू की इस बार की अनुमानित पैदावार 270 लाख टन की है जोकि पिछले साल के मुकाबले करीब 20 लाख टन अधिक है। उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के कुल आलू उत्पादन का 50 फीसदी से ज्यादा इटावा, आगरा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हाथरस व फिरोजाबाद में ही होता है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार पड़ोसी राज्यों में भी पैदावार अच्छी होने के चलते यूपी के आलू की बाहर मांग भी न के बराबर है जिसके चलते कीमतें खासी गिर चुकी हैं।

सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को देना होगा 40 गुना जुर्माना

लोकसभा में जन विश्वास विधेयक पेश

नई दिल्ली। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं है। केंद्र सरकार ने सरकारी परिसरों पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कहा गया है कि पहले महीने में संबंधित संपत्ति के लाइसेंस शुल्क का 40 गुना जुर्माना देना होगा, जो इसके बाद हर महीने 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता जाएगा।

केंद्र सरकार का यह प्रावधान जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 का हिस्सा है, जिसे वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक गैर-आवासीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करते पाया जाता है, तो उसे छह महीने तक की जेल या भूमि के मूल्य का हर वर्ष के हिसाब से पांच प्रतिशत तक का जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है।

यह कदम सरकारी परिसरों और भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता प्रशस्त करेगा। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य सरकारी जमीन और भवनों पर अवैध कब्जे को रोकने के लिए कानूनी ढांचे को काफी मजबूत करना है, जिसमें आवासीय और गैर-आवासीय संपत्तियों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।

विधेयक में कहा गया है कि ऐसे अपराधियों को दोषी ठहराने वाले मजिस्ट्रेट को कानून के तहत अन्य कार्रवाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना त्वरित बेदखली का आदेश देने का भी अधिकार होगा।

79 केंद्रीय कानूनों में बदलाव
जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत 23 मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव है। कुल 784 प्रावधानों में बदलाव किए जाने का प्रस्ताव है, जिनमें से 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाकर व्यवसाय सुगमता बढ़ाने के लिए संशोधित किया जाएगा। वहीं 67 प्रावधानों में आम लोगों की जीवन को सुगम बनाने के लिए संशोधन प्रस्तावित हैं।

मोटर वाहन अधिनियम में भी संशोधन का प्रस्ताव
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम के तहत 20 संशोधन प्रस्तावित हैं, जिनका उद्देश्य अधिनियम के कुछ नियमों में राहत देना और कानूनी अस्पष्टताओं को दूर करना है।

विधेयक के प्रस्ताव के अनुसार, अब वाहन का पंजीकरण पूरे राज्य में किया जा सकेगा, किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अलावा, यदि ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जाता है, तो लाइसेंस नवीनीकरण की तारीख से प्रभावी होगा, न कि समाप्ति की तारीख से।

लाइसेंस एक्सपायर होने के 30 दिन तक छूट
प्रवक्ता के अनुसार, विधेयक में यह भी प्रस्ताव किया गया है कि लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद 30 दिन की छूट अवधि दी जाएगी, इस दौरान लाइसेंस वैध बना रहेगा। इसके अलावा, विधेयक में वाहन पंजीकरण रद्द करने की सूचना देने की समय सीमा को 14 दिन से बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव है।

पीएम मोदी ने नोएडा में किया जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री से आत्मनिर्भर भारत को नई ताकत: पीएम मोदी

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर वालों के लिए आज का दिन बेहद खास है, क्योंकि आज उन्हें जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सौगात मिल गई है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन कर दिया है।

ये हवाई अड्डा चार चरणों में पूरा होगा और इसे पूरा होने में लगभग 2050 तक का समय लग सकता है। ऐसे में इस नोएडा इंटरनेशन एयरपोर्ट की किस चीज पर कितना खर्चा हुआ है या किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने शनिवार को जेवर एयरपोर्ट को देशवासियों को समर्पित करते हुए कहा, आज युवाओं को पता है कि यह जो काम हो रहा है, यह नौजवानों के भविष्य को नई उड़ान देने वाला काम है।

देशवासियों से पीएम मोदी ने कहा, देश का सबसे बड़ा प्रदेश आज सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाले राज्यों में से एक बन गया है। आज मेरे लिए गर्व और प्रसन्नता के दो कारण हैं।

पहला: इस एयरपोर्ट का शिलान्यास करने का सौभाग्य भी मुझे मिला था और इसका उद्घाटन करने का सौभाग्य भी मुझे मिला है।
दूसरा: जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे प्रतिनिधि बनाया, सांसद बनाया, उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस भव्य एयरपोर्ट का नाम भी जुड़ गया है।

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का जिक्र
पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर सेमीकंडक्टर उद्योग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तेजी से तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में नोएडा में एक बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का उद्घाटन किया गया है, जो देश को इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर बोले मोदी
उद्घाटन समारोह के दौरान पीएम मोदी ने कहा, आज पूरा विश्व चिंतित है, पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई देशों में खाने-पीने का सामान, पेट्रोल, डीजल, गैस, खाद जैसी कई जरूरी चीजों का चारों तरफ संकट पैदा हो गया है।

हर देश इस संकट का सामना करने की कोशिश कर रहा है, और हमारा भारत भी पूरी शक्ति से इसका मुकाबला कर रहा है। देशवासियों की ताकत के भरोसे कर रहा है।

पीएम मोदी ने आगे कहा, भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस युद्ध-प्रभावित क्षेत्रों से मंगाता है। इसलिए सरकार हर वह कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों और हमारे किसान भाई-बहनों पर बोझ न पड़े। संकट के इस समय में भी भारत ने अपने तेज विकास को निरंतर जारी रखा है।

भाजपा ने ममता सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी की, जानिए क्यों

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है। भाजपा ने ममता सरकार के खिलाफ विधानसभा चुनाव से पहले मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज एक आरोप पत्र ‘चार्जशीट’ जारी की है।

इस आरोप पत्र के जरिए शाह ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन को ‘अराजकता और भ्रष्टाचार का युग’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा को बचाने और इसे भयमुक्त बनाने का चुनाव है।

अमित शाह ने बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश की सुरक्षा बंगाल के चुनावी नतीजों से अटूट रूप से जुड़ी हुई है। आज देश में घुसपैठियों के प्रवेश का केवल एक ही मुख्य रास्ता बचा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता हो रहा है।

अगर बंगाल को घुसपैठ से मुक्त करना है, तो यहां सत्ता परिवर्तन अनिवार्य है। अमित शाह ने आरोप लगाया कि ममता सरकार ने वोट बैंक की राजनीति के लिए सीमावर्ती इलाकों में डेमोग्राफी के साथ खिलवाड़ होने दिया।

तंज कसते हुए गृह मंत्री ने कहा कि ममता बनर्जी ने हमेशा विक्टिम कार्ड की पॉलिटिक्स खेली हैं। कभी उनका पैर टूट जाता है, कभी उनके सिर पर पट्टी बंध जाती है, कभी वह बीमार पड़ जाती हैं और कभी वह चुनाव आयोग के सामने खड़ी होकर बेबसी का नाटक करती हैं।

चुनाव आयोग को गालियां देती हैं। लेकिन मैं उन्हें यह बताने आया हूं कि बंगाल के लोग अब विक्टिम कार्ड की इस पॉलिटिक्स को अच्छी तरह समझ चुके हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह चार्जशीट, टीएमसी सरकार के 15 वर्षों के काले कारनामों का संकलन है। सोनार बांग्ला का स्वप्न दिखाकर सिंडिकेट राज स्थापित कर बंगाल की जनता का शोषण करने वाले शासन की कहानी है। टीएमसी के कुशासन में बंगाल भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुका है। ऊपर से नीचे तक आपराधिक सिंडिकेट जनता को परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विकास के अभाव में बंगाल उद्योग के लिए एक प्रकार से कब्रिस्तान बन चुका है। अमित शाह ने कहा कि यह चार्जशीट केवल भाजपा की नहीं, बल्कि बंगाल की पीड़ित जनता की आवाज है। 2011 से ही भाजपा इस अराजकता के खिलाफ संघर्ष कर रही है और अब समय आ गया है कि जनता इसका हिसाब ले।

भारत का पड़ौसी देश पाकिस्तान आतंकियों का गढ़ अभी भी: अमेरिकी रिपोर्ट

नई दिल्ली। पाकिस्तान अभी भी भारत के खिलाफ सक्रिय आतंकवादी समूहों का गढ़ बना हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान में कई प्रमुख आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं, जो जम्मू-कश्मीर और भारत पर केंद्रित हैं।

इस रिपोर्ट में एक परेशान करने वाला संदेश है। भारत, विशेषकर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाने वाले आतंकी संगठन पाकिस्तानी धरती से बेखौफ और बिना किसी रोक-टोक के अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

25 मार्च को जारी CRS की ‘इन फोकस’ रिपोर्ट में 15 आतंकी संगठनों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इनमें से कई गुटों को अमेरिका द्वारा ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ (FTO) घोषित किया जा चुका है। रिपोर्ट में ‘भारत और कश्मीर-केंद्रित आतंकी समूहों’ से लगातार बने हुए खतरों की ओर इशारा किया गया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-

  1. लश्कर-ए-तैयबा (LeT)
  2. जैश-ए-मोहम्मद (JeM)
  3. हरकत-उल जिहाद इस्लामी (HUJI)
  4. हरकत उल-मुजाहिदीन (HuM)
  5. हिज्बुल मुजाहिदीन (HM)

प्रमुख आतंकी संगठनों की स्थिति

लश्कर-ए-तैयबा (LeT): 1980 के दशक के अंत में बने इस संगठन को 2001 में FTO घोषित किया गया था। यह अभी भी पाकिस्तान के पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्तमान में जेल में बंद हाफिज सईद के नेतृत्व वाले इस गुट ने प्रतिबंधों से बचने के लिए अपना नाम बदलकर ‘जमात-उद-दावा’ कर लिया है।’ इसके पास ‘कई हजार लड़ाके’ हैं और इसी संगठन ने 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रची थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे।

जैश-ए-मोहम्मद (JeM): साल 2000 में मसूद अजहर द्वारा स्थापित इस गुट को भी 2001 में FTO घोषित किया गया था। इसने 2001 के भारतीय संसद हमले में लश्कर का साथ दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जैश के पास लगभग 500 हथियारबंद आतंकी हैं जो भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में काम करते हैं। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में ‘मिलाना’ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘जैश ने खुले तौर पर अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की हुई है।’

हिज्बुल मुजाहिदीन (HM): 1989 में बने इस कश्मीर-केंद्रित समूह को 2017 में अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके पास लगभग 1500 कैडर (आतंकी) हैं जो ‘कश्मीर की आजादी या जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में विलय’ की मांग करते हैं।

ये समूह अल-कायदा और भारतीय उपमहाद्वीप में इसके सहयोगी संगठन (AQIS) जैसे वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं।

मदरसों की भूमिका
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान आतंकी गुटों को खत्म करने में नाकाम रहा है। हवाई हमलों और लाखों ‘खुफिया-आधारित ऑपरेशनों’ सहित कई बड़े सैन्य अभियान, अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इन आतंकवादी समूहों को हराने में विफल रहे हैं। 2014 के ‘नेशनल एक्शन प्लान’ का उद्देश्य भी इन गुटों को खत्म करना था, लेकिन ये आज भी मौजूद हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए “कुछ कदम” उठाए थे, लेकिन वहां के मदरसे अभी भी ऐसे सिद्धांत पढ़ा रहे हैं जो “हिंसक चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा” दे सकते हैं।

पाकिस्तान का दोहरा चरित्र
दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के. एलन क्रोनस्टेड द्वारा तैयार की गई यह CRS रिपोर्ट पाकिस्तान को ‘पीड़ित और समर्थक’ दोनों के रूप में चित्रित करती है। एक तरफ जहां इस्लामाबाद खुद घरेलू हिंसा (अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववाद और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ते हालात) से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह उन आतंकी नेटवर्कों की मेजबानी कर रहा है जो लंबे समय से भारत को निशाना बनाते आए हैं।

भारत का रुख
पाकिस्तान की इन गुटों को पूरी तरह से खत्म करने में अक्षमता या अनिच्छा के कारण पड़ोसियों के साथ उसका तनाव बना हुआ है। भारत लगातार इस बात पर कायम है कि स्थायी शांति के लिए सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। पाकिस्तानी धरती पर मौजूद आतंकी ढांचे के बारे में अमेरिका के इस ताज़ा आकलन ने भारत के इस रुख को और मजबूती दी है।

तिलहन और दलहन की MSP पर 100% खरीद हो, आयात पर लगे लगाम

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संसद की कृषि संबंधी स्थायी समिति ने की बड़ी सिफारिश

नई दिल्ली। संसद की कृषि संबंधी स्थायी समिति ने आयात लागत को कम करने के लिए तिलहन और दलहन की 100 प्रतिशत खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर करने का आह्वान किया है जबकि अभी वर्तमान में यह 25 प्रतिशत है।

समिति ने घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए पॉम ऑयल का वैश्विक मूल्य 800 डॉलर प्रति टन से कम होने की स्थिति में इस पर 20 प्रतिशत शुल्क सहित डायनॉमिक आयात शुल्क तंत्र स्थापित करने की सिफारिश की है।

संसदीय समिति ने अत्याधुनिक तकनीकों में अधिक निवेश करने का भी आह्वान किया है। इसके तहत जलवायु-अनुकूल, उच्च उपज देने वाली और कीट-प्रतिरोधी फसल किस्मों को विकसित करने के लिए क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स (सीआरआईएसपीआर)-सीएएस 9 और मार्कर-असिस्टेड सिलेक्शन (एमएएस) का आग्रह किया गया है। इसमें आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों से निपटने और उनके प्रसार को रोकने के लिए मजबूत नियामक तंत्र की भी मांग की गई, जो वर्तमान में मौजूद नहीं है।

संसद की समिति ने लोक सभा में अपनी 33वीं रिपोर्ट शुक्रवार को पेश की। इसमें खाद्य तेल के आयात पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता जताई गई। भारत खाद्य तेल की खपत का 56 प्रतिशत आयात से पूरा करता है।

संसद में उठी क्राइसिस फेयर कैप कानून की मांग, आपदा में महंगे टिकट पर लगाम लगे

नई दिल्ली। आरजेडी के राज्यसभा सांसद संजय यादव ने शुक्रवार को राज्यसभा के शून्यकाल में आपदा और संकट के समय एयरलाइंस, एंबुलेंस और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं में लागू डायनामिक प्राइसिंग पर रोक लगाने की मांग उठाई।

उन्होंने कहा कि जब देश किसी आतंकी हमले, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना से जूझ रहा होता है तब नागरिक पहले ही भय और असुरक्षा के माहौल में होते हैं लेकिन उसी समय कुछ कंपनियां मुनाफाखोरी का अवसर तलाशने लगती हैं।

यादव ने हालिया पहलगाम आतंकी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीनगर से दिल्ली की फ्लाइट का किराया सामान्य 6-8 हजार रुपये से बढ़कर 65 हजार रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि क्या यह मानवता का व्यापार नहीं है? उन्होंने कहा कि यह समस्या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि हर संकट के समय ऐसा पैटर्न देखने को मिलता है जितना अधिक डर, उतना अधिक दोहन। बाढ़ या अन्य आपदाओं के दौरान जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ना, कैब और एंबुलेंस का किराया कई गुना होना, सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

आरजेडी सांसद ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में नियंत्रण का अभाव सरकार की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संकट के समय कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी बढ़ जाती है, जिससे आम जनता की मुश्किलें और बढ़ती हैं।

यादव ने मांग की कि देश में क्राइसिस फेयर कैप कानून लाया जाए, जिससे आपदा के समय टिकट, होटल, दवाइयों और परिवहन सेवाओं की अधिकतम कीमत तय हो। साथ ही, जैसे ही किसी क्षेत्र में आपदा घोषित हो, एयरलाइंस के एल्गोरिदम को फ्रीज कर ऑटोमैटिक फेयर फ्रीज लागू किया जाए।

डायनामिक प्राइसिंग को रोकना चाहिए
उन्होंने कहा कि संकट के दौरान डायनामिक प्राइसिंग को अस्थायी रूप से रोकना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई, भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाए जाएं। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा यात्रा प्रोटोकॉल बनाने की भी मांग की ताकि आपात स्थिति में लोगों को सस्ती और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो सके। संजय यादव ने कहा कि भारत एक संवेदनशील लोकतंत्र है, आपदा के समय सेवा होनी चाहिए, सौदा नहीं।

सभी सांसद क्षेत्रीय भाषा में बोलें, ताकि अपने इलाके के लोगों से कनेक्ट हो सकें: बिरला

नई दिल्ली। लोकसभा में आए दिन स्पीकर ओम बिरला अब विपक्ष के सांसदों के साथ सत्ता पक्ष के सांसदों को भी निर्देश देते नजर आते हैं। कभी भाषा के लेकर को कभी सदन के नियमों को लेकर। इसी क्रम में आज कांग्रेस के सांसद डॉ अमर सिंह पंजाब में ड्रग्स और कानून व्यवस्था की समस्या को लेकर हिंदी में बोलने लगे, फिर बीच-बीच में कभी-कभी पंजाबी बोल रहे थे।

कुछ देर बोलने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने टोकते हुए कहा कि आप पंजाबी में बोलो न। इसके बाद ओम बिरला ने सभी सांसदों को निर्देश देते हुए कहा कि आप लोग आज संसद में अपनी-अपनी भाषा में बोलिए। 22 भाषाओं में किसी भाषा में बोल सकते हैं। ओम बिरला ने कहा कि अगर आप क्षेत्रीय भाषा में बोलेंगे तो अपनी जनता से कनेक्ट हो सकेंगे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने पद से हटाने के प्रस्ताव के खारिज होने के एक दिन बाद सभी सांसदों से कहा था कि सदन नियमों के अनुसार ही कार्य करता है और किसी भी सदस्य को किसी भी समय और किसी भी विषय पर बोलने का विशेषाधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही कार्य करती रहेगी, चाहे किसी सदस्य को यह स्वीकार्य हो या न हो, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ कार्यवाही का संचालन करेंगे। उन्होंने कहा था कि बहस के दौरान उन पर भरोसा जताने के लिए वे सदन के सदस्यों के प्रति आभारी हैं। उन्होंने अपने पक्ष और विपक्ष में बोलने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया।

रामवीर सिंह बिधूड़ी को टोका
इससे पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भारतीय जनता पार्टी के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी को टोक दिया। दरअसल, बिधूड़ी ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न पूछने से पहले उनका धन्यवाद किया। फिर क्या था स्पीकर ओम बिरला ने बीच में टोक दिया और कहा कि माननीय सदस्यगण आपलोग धन्यवाद देने में जो समय लगाते हैं, उससे ज्यादा समय प्रश्न पूछने में खर्च करें। धन्यवाद की आवश्यकता नहीं है।

जीवंत हुई वर्षों की परंपरा, राम-भरत प्रसंग के साथ निकली श्रीराम जन्मोत्सव शोभायात्रा

श्री रघुनाथ मंदिर व शीतला माता, रामपुरा का संयुक्त आयोजन

​कोटा। श्री रघुनाथ जी मन्दिर व शीतला माता मन्दिर, रामपुरा की कार्यक्रम प्रबंधक समिति के तत्वावधान में भव्य श्रीराम जन्मोत्सव मनाया गया। महोत्सव में एक बार फिर 65 वर्षों की गौरवशाली परंपरा जीवंत हो उठी। शुक्रवार सायंकाल जब भगवान श्री राम की शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी, तो समूचा वातावरण ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

​शोभायात्रा का विधिवत शुभारंभ नयापुरा स्थित गोपाल निवास बाग के हनुमान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। यहाँ से भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों को सुसज्जित बग्घियों में विराजमान किया गया। शोभायात्रा में सबसे आगे गजराज और अश्वों का दल चल रहा था।

वहीं पीछे दर्जनों अखाड़े, भजन मंडलियां और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते श्रद्धालु उत्सव की रौनक बढ़ा रहे थे। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर प्रभु की आरती उतारी और जगह-जगह शीतल जल एवं शरबत की प्याऊ लगाकर शोभायात्रा का स्वागत किया।

‘राम-भरत मिलाप पर भावुक हुए भक्त
रामपुरा बाजार में ऐतिहासिक ‘राम-भरत मिलाप’ हुआ तो राम भक्त भावुक हो गए। 65 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। जब भगवान राम और भरत के स्वरूपों ने एक-दूसरे को गले लगाया, तो उपस्थित जनसमूह की आंखें छलक आईं और पूरा क्षेत्र पुष्प वर्षा से सराबोर हो गया।

आयोजनकर्ता लेखराज गौतम, भगवान लड्डा, संजय गोयल और विष्णु गोयल ने बताया कि ​शोभायात्रा का समापन रामपुरा स्थित रघुनाथ चौक में एक विशाल महाआरती के साथ हुआ। हजारों दीपों की रोशनी से चौक जगमगा उठा और वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। महाआरती के पश्चात उपस्थित अपार जनसमूह को विशेष प्रसाद का वितरण किया गया।

किसानों से नवीनतम गिरदावरी के आधार पर ही वास्तविक उपज MSP पर खरीदी जाएगी

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ऊर्जा मंत्री नागर के निर्देश पर किसानों की समस्याओं का हुआ निराकरण

​कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के प्रयासों से किसानो को गेंहू ख़रीद प्रक्रिया में आ रही समास्याओं से राहत मिली है। राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2026-27 के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीद के लिए नई मार्गदर्शिका जारी की गई है।

इस व्यवस्था के तहत विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों से उनकी नवीनतम गिरदावरी के आधार पर वास्तविक उपज की ही खरीद की जाएगी। जिसका आकलन राज्य खरीद पोर्टल द्वारा स्वतः किया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2026 की गिरदावरी को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके अभाव में वर्ष 2025 की गिरदावरी मान्य होगी।

उल्लेखनीय है कि ऊर्जा मंत्री नागर ने शुक्रवार को अधिकारियों की बैठक ली थी। बैठक में सामने आया था कि ऑनलाइन सिस्टम में कई किसानों ने अपनी मर्जी से अधिक मात्रा भर दी। जिसके कारण स्लॉट फुल हो गए और कई वास्तविक किसानों को मई-जून तक की लंबी तारीखें मिल रही हैं।

इस विसंगति को दूर करने के लिए मंत्री नागर ने निर्देश दिए थे कि पोर्टल को दोबारा खोलकर गिरदावरी और रजिस्ट्रेशन की त्रुटियों को सुधारा जाए। साथ ही, रकबे के अनुसार ही स्लॉट बुकिंग सुनिश्चित की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

इसके बाद जारी नई व्यवस्था के तहत् विभाग ने कहा है कि “पहले आओ पहले पाओ (FIFO)” के सिद्धांत पर पारदर्शी तरीके से स्लॉट बुकिंग सुनिश्चित करना हमारा उद्देश्य है।

​जिन तहसीलों या गाँवों में गिरदावरी का कार्य ऑनलाइन नहीं हो पाया है। वहाँ के किसानों को तहसीलदार द्वारा प्रमाणित ‘ऑफलाइन गिरदावरी’ पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। हालांकि तहसीलदार द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्रमाणीकरण की अनिवार्यता के कारण किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

इस प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में किसानों को तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। जिससे न केवल किसानों का समय और धन नष्ट होगा, बल्कि तहसील प्रशासन के अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है।

​प्रशासनिक दक्षता और किसान कल्याण को ध्यान में रखते हुए, अब इस मामले को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के समक्ष ले जाने का निर्णय लिया गया है। इस विशेष शर्त में ढील देने अथवा प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने का अनुरोध किया जा रहा है। ताकि किसानों को बेवजह परेशान न होना पड़े।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया सुगम बनी रहे और किसानों को उनके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से समय पर जानकारी मिलती रहे। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी पात्र किसान तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं के कारण अपनी फसल बेचने से वंचित न रहे।