‘हिमालयन गोल्ड’ के कृत्रिम उत्पादन और तकनीक पर कार्यशाला का आयोजन

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कोटा। कोटा विश्वविद्यालय के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग द्वारा मंगलवार को औषधीय गुणों से भरपूर ‘कॉर्डिसेप्स’ यानी ‘हिमालयन गोल्ड’ के कृत्रिम उत्पादन और तकनीक पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता सी.एम.एच.ओ. (संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग) आर. के. लवानिया ने कॉर्डिसेप्स के औषधीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।

डॉ. पल्लवी शर्मा द्वारा संचालित इस सत्र में विभाग की डॉ. नेहा चौहान और डॉ. श्वेता गुप्ता ने तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि कॉर्डिसेप्स का उत्पादन पूरी तरह से नियंत्रित वातावरण में किया जाता है, जिसके लिए प्रयोगशाला में 180C से 220C के स्थिर तापमान और लगभग 70-80 प्रतिशत की आर्द्रता को बनाए रखना अनिवार्य होता है।

इसके सेटअप के लिए लैमिनार एयर फ्लो, ऑटोक्लेव और विशेष लाइटिंग व्यवस्था वाले इनक्यूबेशन रूम की आवश्यकता होती है। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को ब्राउन राइस तैयार करने से लेकर, उच्च गुणवत्ता वाले कल्चर के चयन, स्पॉनिंग (बीजारोपण) और माइसेलियम की वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियों के प्रबंधन के बारे में विस्तार से समझाया गया।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि किस प्रकार लगभग 60 से 70 दिनों के चक्र में इस मशरूम की खेती कर इसे सुखाकर और सुरक्षित पैकेजिंग के माध्यम से बाजार में उतारा जा सकता है। कॉर्डिसेप्स (हिमालयन गोल्ड) की बहुमुखी उपयोगिता इसे चिकित्सा और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।

मुख्य रूप से, इसका उपयोग पारंपरिक और आधुनिक दवाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शारीरिक सहनशक्ति में सुधार करने और थकान को कम करने के लिए एक शक्तिशाली ‘एनर्जी बूस्टर’ के रूप में किया जाता है। इसके औषधीय गुणों में एंटी-कैंसर, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-एजिंग तत्व शामिल हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, किडनी की कार्यक्षमता को सहारा देने और श्वसन संबंधी विकारों के उपचार में सहायक होते हैं।

चिकित्सा के अतिरिक्त, कॉर्डिसेप्स का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले न्यूट्रास्यूटिकल्स, हेल्थ सप्लीमेंट्स और सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसकी बढ़ती मांग के कारण यह सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और उच्च-मूल्य वाले कृषि व्यवसाय के लिए एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है जिसके व्यावहारिक प्रशिक्षण से छात्रों में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम के अंत में सभी सफल प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र वितरित किए गए।