स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान ने तीन जहाजों पर कर दिया हमला, जानिए क्यों

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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा सीजफायर की डेडलाइन बढ़ाने की घोषणा के कुछ ही देर बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और गंभीर हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर से तीन जहाजों पर गोलीबारी हुई है।

समुद्री सुरक्षा सूत्रों और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, बुधवार को होर्मुज में कम से कम तीन कंटेनर जहाजों को निशाना बनाया गया। हालांकि, राहतभरी बात यह रही कि हमले में क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं।

ओमान के उत्तर-पूर्व में गोलीबारी और रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) से हमला होने के बाद, लाइबेरिया का झंडा लगे एक कंटेनर जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है। ईरान ने इस स्ट्रेट का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

UKMTO ने बताया कि जहाज के कैप्टन ने रिपोर्ट दी कि IRGC की एक गनबोट उनके जहाज के करीब आ रही थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद जहाज पर गोलीबारी की गई। जहाज के सभी क्रू सदस्य सुरक्षित थे और इस घटना के कारण कोई आग नहीं लगी।

समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उस गनबोट पर तीन लोग सवार थे। ग्रीस द्वारा संचालित कंटेनर जहाज के कैप्टन ने यह भी बताया कि घटना से पहले उनसे रेडियो पर कोई संपर्क नहीं किया गया था, और उन्हें शुरू में यह जानकारी दी गई थी कि उन्हें होर्मुज से गुजरने की अनुमति है।

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी का सहारा लिया है, ताकि वह ईरान जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ खत्म करे। यह अहम समुद्री मार्ग है, जिससे शांति काल में दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल गुजरता था। इस जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ के कारण तेल कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

ट्रंप ने बढ़ाई सीजफायर की डेडलाइन
इससे पहले ट्रंप ने सीजफायर की समयसीमा बढ़ाते हुए कहा कि यह कदम ईरान के आंतरिक मतभेदों से जूझ रहे नेतृत्व को सात सप्ताह से जारी युद्ध समाप्त करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का समय देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

यह घोषणा तब की गई है, जब आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम कुछ ही घंटों में समाप्त होने वाला था। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा भी प्रभावी रूप से टल गई, जहां ईरानी प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता प्रस्तावित थी।

ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर हमला करने से केवल तभी तक परहेज करेगा, जब तक उसका नेतृत्व बातचीत के लिए एक समेकित प्रस्ताव पेश नहीं करता। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी।

वेंस और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर को मंगलवार को इस्लामाबाद रवाना होना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल की ”पाकिस्तान यात्रा मंगलवार को नहीं होगी।”

ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ”इस तथ्य के आधार पर कि ईरान की सरकार गंभीर रूप से आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तथा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपने हमले को तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते।”