नई दिल्ली। India Venezuela Oil Deal: पिछले तीन वर्षों से भारत तेल आयात में रूस पर काफी निर्भर रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल ने भारत के आयात बास्केट को पूरी तरह बदल दिया और मॉस्को नई दिल्ली का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया।
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अस्थिरता, प्रतिबंधों को लेकर अनिश्चितता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर पैदा हुए संकट ने भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
यही वजह है कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज (Delcy Rodríguez) की भारत यात्रा के बाद नई दिल्ली और वेनेजुएला के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों को लेकर बातचीत तेज हो गई है।
यह चर्चा सिर्फ अधिक तेल खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा मानचित्र को बदलने, आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने और संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने की एक रणनीतिक कोशिश है।
कैसे बदले समीकरण
- भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जो देश की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरियों में से एक है।
- पहले भारत का अधिकांश तेल मध्य पूर्व (इराक, सऊदी अरब और यूएई) से आता था।
- साल 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल सस्ता हुआ। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों ने रिकॉर्ड खरीदारी कर रूस को अपना नंबर वन सप्लायर बना दिया।
- ईरान और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस संकट से पहले भारत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से आता था। इसी चोकपॉइंट के बंद होने से भारत को अब नए विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।
वेनेजुएला बना दूसरा सबसे बड़ा आयातक
रॉयटर्स के मुताबिक मई महीने में भारत वेनेजुएला के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने प्रतिदिन लगभग 4,27,000 बैरल तेल खरीदा। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जबकि भारत के पास इसकी भारी और लगातार बढ़ती मांग है।
क्या वेनेजुएला रूसी तेल की जगह लेगा?
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, यह एक बड़ी गलतफहमी है। वेनेजुएला को रूस के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि विविधता के एक साधन के रूप में देखा जा रहा है। रूसी तेल आज भी भारतीय रिफाइनरियों के अनुकूल है और आर्थिक रूप से बेहद किफायती है।
हालिया भू-राजनीतिक संकटों से भारत ने सबक सीखा है कि किसी भी एक क्षेत्र (चाहे वह खाड़ी देश हों या रूस) पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है। वेनेजुएला को इस कतार में शामिल करने से भारत की मोलभाव करने की शक्ति और लचीलापन बढ़ेगा।

