युवा व्यक्तित्व निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्वों को भी समझें: सारस्वत
कोटा। कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके युवाओं के चरित्र, संस्कार और राष्ट्रबोध में निहित होती है।
जिस प्रकार परिवार अपनी परंपराओं, संस्कारों और इतिहास से जुड़कर मजबूत बनता है, उसी प्रकार राष्ट्र भी अपनी संस्कृति और विरासत के प्रति सजग रहकर ही सुदृढ़ भविष्य की ओर बढ़ सकता है। यदि समाज और राष्ट्र अपनी जड़ों से विमुख होने लगें तो यह उसके लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
वे गुरुवार को कोटा विश्वविद्यालय के नागार्जुन भवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की ओर से आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करते हुए कुलगुरु ने उनके सवालों और जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
कुलगुरु प्रो. सारस्वत ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि चारित्रिक निर्माण की शुरुआत परिवार से होती है। परिवार के संस्कार, इतिहास और परंपराएं नई पीढ़ी को उसकी पहचान से जोड़ती हैं।
उन्होंने कहा कि यही बात राष्ट्र के संदर्भ में भी लागू होती है। देश की संस्कृति, इतिहास और संस्कारों के प्रति जागरूकता युवाओं में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध को मजबूत करती है।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका सपना ऐसे भारत का था, जहां प्रत्येक नागरिक चरित्रवान, जिम्मेदार और राष्ट्र के विकास में योगदान देने वाला हो। कुलगुरु ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने व्यक्तित्व निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को भी समझें।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता श्याम बिहारी नागर, सहविभाग कार्यवाह ने कहा कि युवाओं के चरित्र निर्माण के माध्यम से ही राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है। स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, आंतरिक शक्ति, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
उन्होंने युवाओं से ‘पंच परिवर्तन’ को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इसके अंतर्गत कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजगता को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने युवा क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए युवाओं ने अल्पायु में भी अपना सर्वस्व समर्पित किया। ऐसे प्रेरक जीवन युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर विजय जोहरी, सह महानगर कार्यवाह, कोटा महानगर, विश्वविद्यालय के लोकपाल प्रो. प्रवीण माथुर, प्रो. घनश्याम शर्मा, प्रो. ओ.पी. ऋषि, प्रो. पी.सी. गुप्ता, प्रो. अनिता सुखवाल, प्रो. भवानी सिंह, डॉ. नम्रता सेंगर, डॉ. निधि एवं सरिता सोलंकी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

