नई दिल्ली। Sold $12 billion worth of gold: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और इसके चलते भारतीय मुद्रा रुपया (Rupee Fall) तेजी से गिरा। ऐसे हालात में देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा और इससे उबरने के लिए रिजर्व बैंक को 12 बिलियन डॉलर का गोल्ड रिजर्व बेचकर अपना फॉरेक्स रिजर्व मजबूत करना पड़ा है।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, RBI को 22 मई को खत्म हुए दो हफ्तों के दौरान लगभग 12 बिलियन डॉलर का सोना बेचना पड़ा है। इसके जरिए RBI ने अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों में लगभग 7.5 बिलियन डॉलर का इजाफा कर सकता है।
दरअसल, ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई और पूरे खाड़ी देशों में ईरान के हमलों के चलते उत्पादन प्रभावित हुआ, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई। चूंकि, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और कच्चा तेल महंगा होने व आयात बिल बढ़ने से भारतीय रुपये पर भारी दबाव पड़ा, इसलिए रुपये में गिरावट को रोकने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने के लिए RBI को यह कदम उठाना पड़ा है।
गोल्ड के बजाय डॉलर पर जोर
युद्ध और संकट के ऐसे हालात में जब देश का चालू खाता घाटा बढ़ता है तब केंद्रीय बैंक के पास विदेशी मुद्रा (मुख्यतः डॉलर) का होना बहुत जरूरी होता है, इसलिए सोना बेचकर RBI ने लिक्विडिटी बढ़ाने पर जोर दिया है।
बता दें कि मार्च के अंत तक RBI के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना था। इसका लगभग 77% हिस्सा भारत के भीतर ही सुरक्षित रखा गया है। RBI धीरे-धीरे विदेशों (जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड) में रखा अपना सोना वापस भारत ला रहा है ताकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के जोखिम से बचा जा सके, जैसा कि रूस के साथ हुआ था।

