बाघिन T-114 का शावक बाघ RVT-7 अब मुकुंदरा में दहाड़ेगा

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कोटा। Tiger RVT-7 in Mukundra: राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक बेहद रोमांचक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदेश का पहला ‘साइंटिफिक टाइगर रीवाइल्डिंग प्रोजेक्ट’ अपनी सफलता के आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है।

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में इंसानी देखरेख में पले-बढ़े एक अनाथ बाघ ‘RVT-7’ को खुले जंगल में आजाद करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों की मौजूदगी में इस युवा बाघ को रेडियो कॉलर लगा दिया गया है, जिसके बाद अब अगले सात दिनों के भीतर इसे खुले आसमान के नीचे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

बाघ ‘RVT-7’ की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। यह रणथंभौर की मशहूर बाघिन ‘T-114’ का शावक है। कुछ साल पहले मां (बाघिन T-114) की अचानक मौत के बाद यह और इसकी बहन महज दो से तीन महीने की उम्र में अनाथ हो गए थे। इतने छोटे बच्चों का जंगल में जीवित रहना नामुमकिन था, इसलिए वन विभाग ने इन्हें रेस्क्यू किया और कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क शिफ्ट कर दिया।

अभेड़ा पार्क में इन नन्हे शावकों को करीब 22 महीनों तक विशेष ‘रीवाइल्डिंग ट्रेनिंग’ दी गई। यहां इन्हें सिखाया गया कि इंसानों पर निर्भर रहने के बजाय खुद शिकार कैसे किया जाता है।

इसके बाद, 5 दिसंबर 2024 को इस नर शावक को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के रामगढ़ महल क्षेत्र में बने 5 हेक्टेयर के बड़े रीवाइल्डिंग एन्क्लोजर में लाया गया और इसे ‘RVT-7’ कोड नाम दिया गया।

पिछले डेढ़ साल से इस बाड़े में उसे चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे प्राकृतिक शिकार दिए गए, जिससे उसने जंगल में जिंदा रहने के लिए जरूरी शिकार कौशल पूरी तरह विकसित कर लिया।

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम ने बाघ RVT-7 को ट्रेंकुलाइज किया और उसकी गर्दन पर रेडियो कॉलर फिट किया। इस दौरान पशु चिकित्सकों ने उसके स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की और बायोलॉजिकल सैंपल भी लिए।

बाघ पूरी तरह स्वस्थ और फुर्तीला है। रोचक बात यह है कि इस बाघ की बहन को पहले ही कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जा चुका है, जहां वह पूरी तरह से जंगली माहौल में ढल चुकी है।

हर मूवमेंट और सेहत पर रहेगी नजर
अब जैसे ही अगले कुछ दिनों में भाई ‘RVT-7’ को रामगढ़ विषधारी के खुले जंगल में आजाद किया जाएगा, राजस्थान का यह महत्वाकांक्षी रीवाइल्डिंग प्रोजेक्ट शत-प्रतिशत सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा। रेडियो कॉलर की मदद से वन विभाग के अधिकारी खुले जंगल में भी इसकी पल-पल की मूवमेंट और सेहत पर नजर रख सकेंगे। यह प्रोजेक्ट देश में अनाथ हुए वन्यजीवों को दोबारा उनका घर लौटाने की दिशा में एक मिसाल बन गया है।