पेट्रोल-डीजल के लिए मारामारी खत्म; भारत ने निकाला होर्मुज का तोड़, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है। मई में भारत का कच्चे तेल का आयात अप्रैल की तुलना में 8 फीसदी बढ़ गया है। हालांकि यह फरवरी की तुलना में 5 फीसदी कम है।

मई में वेनेजुएला भारत का तीसरा बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है जबकि सऊदी अरब और अमेरिका पीछे खिसक गए हैं। रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है जबकि यूएई दूसरे नंबर पर है।

वेनेजुएला का तेल हेवी ग्रेड का माना जाता है और सस्ता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और दूसरी कंपनियां जमकर वेनेजुएला से तेल की खरीद कर रही हैं।

ईटी की एक रिपोर्ट में एनर्जी कार्गो ट्रैकर Kpler के हवाले से यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक इस महीने भारत ने वेनेजुएला से रोजाना 417,000 बैरल कच्चा तेल मंगाया है जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 283,000 बैरल था। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था। इसके बाद वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई गई थीं। भारत ने पिछले महीने वेनेजुएला से तेल की खरीद शुरू की थी।

मई में अब तक भारत का तेल आयात पिछले महीने के मुकाबले 8% बढ़कर रोजाना 4.9 मिलियन बैरल पहुंच गया। हालांकि यह फरवरी की तुलना में अब भी 5 फीसदी कम है। उस महीने भारत ने रोजाना 5.2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया था। यह ईरान युद्ध से पहले की बात है।

28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज की खाड़ी से तेल की सप्लाई बाधित हुई है। इससे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा है क्योंकि दुनिया का 20 फीसदी तेल यहीं से गुजरता है।

Kpler के लीड एनालिस्ट-रिफाइनिंग निखिल दुबे ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारतीय कंपनियों की वेनेजुएला के तेल में काफी दिलचस्पी रही है क्योंकि इसकी कीमत कम है।

वेनेजुएला का तेल खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की गुजरात में स्थित एडवांस्ड रिफाइनरी को सूट करता है। भारत की बाकी रिफाइनरीज हाई-सल्फर वाले हेवी ग्रेड तेल को कुछ हद तक ही प्रोसेस कर सकती हैं।

सऊदी अरब से आयात
भारत ने सात साल बाद ईरान से भी अप्रैल में तेल का आयात शुरू कर दिया था। लेकिन अब वहां से सप्लाई बंद हो चुकी है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है। इस कारण इस महीने अब तक वहां से कोई भी जहाज भारत नहीं आया है। हालांकि इराक से कुछ जहाज इस महीने भारत आए हैं। अप्रैल में वहां से कोई भी जहाज भारत नहीं आया था। इराक से इस महीने रोजाना भारत को 51,000 बैरल तेल मिला है जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 969,000 बैरल थी।

ईरान युद्ध से पहले सऊदी अरब भारत का तीसरा बड़ा सप्लायर था। लेकिन महीने वहां से रोजाना 340,000 बैरल कच्चा तेल भारत आया जो पिछले महीने की तुलना में करीब आधा है। अप्रैल में सऊदी अरब से रोजाना 670,000 बैरल तेल मिला था। इसकी वजह यह है कि सऊदी अरब के तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। कच्चे तेल की कीमत आज 1.45 फीसदी तेजी के साथ 104.1 डॉलर प्रति बैरल पर है। हालांकि इंडियन बास्केट 3.07 फीसदी गिरावट के साथ 108.9 डॉलर प्रति बैरल पर है।