पीली मटर का आयात घटने से चने की मांग एवं कीमत में सुधार आने का अनुमान

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नई दिल्ली। वर्तमान समय में प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में कम आपूर्ति होने के बावजूद दाल मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों- स्टॉकिस्टों की सीमित लिवाली के कारण चना का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से करीब 10-15 प्रतिशत नीचे चल रहा है लेकिन आगामी सप्ताहों के दौरान इसकी मांग एवं कीमत में सुधार आने के आसार है।

एक अग्रणी व्यापारिक संगठन के अनुसार सरकारी एजेंसी द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (5875 रुपए प्रति क्विंटल) पर चना की अच्छी खरीद की जा रही है। विदेशों से देसी चना तथा पीली मटर का कम आयात हो रहा है।

स्वदेशी चना का पिछला बकाया स्टॉक बहुत कम बचा है और नीचे दाम पर यह दलहन खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। जून में दक्षिण पश्चिम मानसून के आने पर उसकी मांग एवं कीमत सुधर सकती है।

आपूर्ति घटने एवं सरकारी खरीद की रफ्तार बढ़ने से पिछले सप्ताह चना के दाम में कुछ सुधार आया था। चना दाल तथा बेसन में भी थोड़ी-बहुत मांग निकलने लगी है।

गत सप्ताह इंदौर मार्केट में चना का भाव 150 रुपए की वृद्धि के साथ 5850-5900 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया जो न्यूनतम समर्थन मूल्य के समतुल्य ही है। ऑस्ट्रेलिया के उत्पादक अपने चने का स्टॉक नीचे दाम पर बेचने के मूड में नहीं है और भाव बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।