नई दिल्ली। Ethanol Blending: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता को देखते हुए भारत सरकार अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऐसे में भारत घरेलू ऊर्जा सोर्स और नवीकरणीय ऊर्जा पर तेजी से फोकस बढ़ा रहा है।
क्या है मेगा प्लान
- इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ने पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दिया है।
- सरकारी अनुमानों के अनुसार 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग से सालाना लगभग 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल के आयात की बचत हुई है।
- साथ ही इससे देश के खजाने से लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बाहर जाने से रुकी है।
- अब अधिकारी इस सीमा को 25% तक ले जाने की संभावना तलाश रहे हैं, हालांकि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
उपभोक्ताओं पर क्या असर
- सरकार 25% ब्लेंडिंग की दिशा में सावधानी से आगे बढ़ रही है क्योंकि इसके कुछ तकनीकी पहलू भी हैं। ये इस प्रकार हैं:
- उच्च इथेनॉल मिश्रण के लिए वाहनों के इंजन में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव की जांच की जा रही है।
- इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से गाड़ी के माइलेज पर पड़ने वाले असर का मूल्यांकन किया जा रहा है।
- गाड़ी के इंजन के पुर्जों पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर अधिकारी सतर्क हैं।

