जुलाई की बारिश से सोयाबीन का रकबा बढ़कर पिछले साल के बराबर हुआ

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नई दिल्ली। जुलाई में हुई बेहतर बारिश से खरीफ 2026 सीज़न में सोयाबीन की बुआई में काफ़ी तेज़ी आई है, और फ़सल का एरिया लगभग पिछले साल के लेवल के बराबर पहुँच गया है। 31 जुलाई तक, सोयाबीन का रकबा 11.768 मिलियन हेक्टेयर था, जो एक साल पहले रिकॉर्ड किए गए 11.852 मिलियन हेक्टेयर से सिर्फ़ 0.7% कम है।

एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के मुताबिक, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले सोयाबीन का रकबा बढ़ा है। सबसे बड़े सोयाबीन प्रोड्यूसर राज्य मध्य प्रदेश में रकबा 2% बढ़कर 5.209 मिलियन हेक्टेयर हो गया, जबकि गुजरात में लगभग 10% की बढ़ोतरी हुई। उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में सोयाबीन का रकबा पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना हो गया है।

हालांकि, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक में रकबे में कमी आई है। महाराष्ट्र में सोयाबीन का रकबा 3.84% घटकर 4.656 मिलियन हेक्टेयर रह गया, जबकि राजस्थान और कर्नाटक में क्रम से 5.48% और 3.17% की गिरावट दर्ज की गई।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (SOPA) के अनुसार, जून में बोई गई सोयाबीन की ज़्यादातर फ़सल अब फूल आने की स्टेज में पहुँच गई है। मुख्य उगाने वाले इलाकों में फ़सल की हालत नॉर्मल से अच्छी बताई जा रही है, जिसमें अच्छी वेजिटेटिव ग्रोथ है और अब तक कोई बड़ी पेस्ट या बीमारी नहीं देखी गई है। अगर अगस्त तक मौसम अच्छा रहता है, तो सोयाबीन प्रोडक्शन की उम्मीद मज़बूत रहने की उम्मीद है।