खेत बनेंगे पाठशाला, 40 हजार किसानों तक पहुंचेगा ‘सरसों संकल्प’

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कोटा। राजस्थान में सरसों की खेती को आधुनिक, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने के लिए पांच वर्षीय ‘सरसों संकल्प’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया एडब्लूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड, सॉलिडरीडाड नेटवर्क एशिया लिमिटेड और भारतखंड फाउंडेशन की संयुक्त पहल बूंदी, टोंक और झालावाड़ जिलों में लागू होगी।

पहले चरण में वित्त वर्ष 2026-27 में 15 हजार किसानों को जोड़ा जाएगा, जबकि 2030-31 तक यह दायरा बढ़ाकर 40 हजार किसानों तक किया जाएगा। कार्यक्रम पर 16 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

मॉडल फार्म बनेंगे ‘खेत की पाठशाला’
कार्यक्रम में किसानों को केवल तकनीकी जानकारी देने के बजाय मॉडल व प्रदर्शन फार्म के माध्यम से आधुनिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। मिट्टी की सेहत और फसल पोषण सुधारने, पानी व कृषि इनपुट का दक्ष उपयोग, जलवायु अनुकूल खेती और जैव विविधता संरक्षण पर जोर रहेगा। किसानों को खेत स्तर पर लगातार सलाह भी दी जाएगी। खेती के परिणामों की निगरानी और मूल्यांकन के आधार पर सफल तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाने की योजना है।

विशेषज्ञ संस्थाएं संभालेंगी जिम्मेदारी
एडब्लूएल एग्री बिजनेस सीएसआर के तहत वित्तीय सहयोग देगा, एसईए कार्यक्रम के समन्वय व निगरानी में सहयोग करेगा, जबकि सॉलिडरीडाड नेटवर्क एशिया तकनीकी विशेषज्ञता और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा। भारतखंड फाउंडेशन जमीनी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगा। एसईए अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने इसे किसानों को मजबूत करने के साथ देश को तिलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

सॉलिडरीडाड नेटवर्क एशिया के प्रबंध निदेशक डॉ. शतद्रु चट्टोपाध्याय ने कहा कि ‘सरसों संकल्प’ का लक्ष्य रीजेनेरेटिव खेती को महज तकनीकों का समूह नहीं, बल्कि व्यावहारिक, मापने योग्य और बड़े स्तर पर अपनाए जा सकने वाले मॉडल के रूप में विकसित करना है। इससे मिट्टी की सेहत, संसाधन दक्षता और जलवायु लचीलेपन में सुधार के साथ किसानों की दीर्घकालिक आय और कृषि स्थिरता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।