कोटा। कोटा शहर में लगातार हो रही बिजली ट्रिपिंग, फॉल्ट और जनसुनवाई में बरती जा रही लापरवाही को लेकर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कड़ा रुख अपनाया है।
शनिवार को मंत्री नागर ने फ्रेंचाइजी कम्पनी कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिक्ट लिमिटेड (केईडीएल) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मनीष अरोड़ा और टेक्निकल हेड वेंकटेशन कोड़ी को अपने निजी आवास स्थित कार्यालय में तलब किया।
बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री ने शहर की चरमराती बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध निवारण न होने पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और बिजली तंत्र को तुरंत सुदृढ़ करने की सख्त हिदायत दी।
ऊर्जा मंत्री ने केईडीएल के एफआरटी और बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी के एफआरटी में कर्मचारियों की भारी कमी है। जिसके कारण फॉल्ट ठीक होने में लंबा समय लगता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉल्ट को त्वरित गति से सुधारने के लिए फील्ड में पर्याप्त और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने चाहिए।
मंत्री नागर ने कहा कि किसी भी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए इच्छाशक्ति और कुशल प्रबंधन की आवश्यकता होती है। जिसका केईडीएल प्रबंधन में पूरी तरह अभाव दिख रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कोटा उनके लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यदि यहां की बिजली व्यवस्था में दो महीने के भीतर सुधार नहीं हुआ तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक शब्दों में कहा कि वे अपने उच्च प्रबंधन से बात कर कमियों को दूर करें, अन्यथा सरकार को सख्त निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ेगा।
बैठक में मंत्री नागर ने केईडीएल और जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) की कार्यशैली की तुलना करते हुए केईडीएल के प्रशासनिक ढांचे को संवेदनहीन बताया। उन्होंने कहा कि जेवीवीएनएल के अधिकारी और कर्मचारी सीधे जनता के संपर्क में रहते हैं, जबकि केईडीएल के अधिकारी जनता से दूरी बनाकर रखते हैं।
कंपनी के कार्यालयों में आम उपभोक्ताओं की सुनवाई नहीं होती और वहां ‘बॉक्सर’ बिठाकर लोगों को डराया-धमकाया जाता है। इसके अलावा, केईडीएल के सांगठनिक ढांचे में नियमों के विपरीत डिवीजन स्तर पर एक्सईएन का पद ही गायब है।
उन्होंने निर्देश दिए कि केईडीएल तुरंत जेवीवीएनएल की तर्ज पर अपना प्रशासनिक ढांचा तैयार करे ताकि जवाबदेही तय की जा सके। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों के नंबर सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए ताकि जनता को पता रहे कि उनके क्षेत्र में कौन सा अधिकारी कार्यरत है।
तकनीकी कमियों पर बात करते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कोटा शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों का बिजली प्रबंधन कहीं अधिक बेहतर है। ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर नए जीएसएस बन रहे हैं। जबकि शहरी क्षेत्र में लोड के अनुपात में बुनियादी ढांचे का विस्तार नगण्य है।
आंधी-तूफान आने पर जहां जेवीवीएनएल ग्रामीण क्षेत्रों में रातों-रात फॉल्ट ठीक कर आपूर्ति बहाल कर देता है, वहीं कोटा शहर में घंटों बिजली गुल रहती है।
उन्होंने भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के बिजली मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लाइनमैन बिना शटडाउन लिए चालू लाइन पर काम कर लेते हैं, जबकि कोटा में छोटे-छोटे घरेलू कनेक्शनों के लिए भी लंबा शटडाउन लिया जा रहा है। उन्होंने केईडीएल को भीलवाड़ा मॉडल का अध्ययन कर उसे लागू करने के निर्देश दिए।
ऊर्जा मंत्री ने केईडीएल द्वारा ऑफलाइन सतर्कता जांच रिपोर्ट (वीसीआर) भरने और अवैध रूप से मामलों का सेटलमेंट करने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि केईडीएल को खुद के स्तर पर कंपाउंडिंग या सेटलमेंट करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, फिर भी पिछले दो वर्षों में जेवीवीएनएल के पास केईडीएल का एक भी सेटलमेंट केस नहीं आया है, जो बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
अधिकारियों द्वारा लाइनों को अंडरग्राउंड करने के तर्क पर उन्होंने कहा कि पूर्व में अंडरग्राउंडिंग के नाम पर 250 करोड़ रुपये जमीन में दबा दिए गए, लेकिन लाइनें चालू नहीं हो सकीं।
उन्होंने केईडीएल को पुराने ढर्रे को छोड़कर वर्तमान वैश्विक मानकों के अनुरूप एआईआधारित और हाईटेक टेक्नोलॉजी अपनाने की सलाह दी। अंत में, मंत्री नागर ने रोजाना होने वाली ट्रिपिंग, फॉल्ट, शटडाउन और जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने की विस्तृत दैनिक रिपोर्ट सरकार को सौंपने के आदेश जारी किए।

