कोटा मंडल ने रचा इतिहास, भारत की पहली अल्सटॉम-प्रणोदन वंदे भारत रेक का परीक्षण

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कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के लिए सोमवार का दिन गौरवशाली बन गया। भारत में पहली बार आरसीएफ (रेल कोच फैक्ट्री), कपूरथला द्वारा निर्मित 16-कार वंदे भारत ट्रेनसेट (चेयर कार) का परीक्षण कोटा–शामगढ़–कोटा मार्ग पर हुआ।

इसमें फ्रांस की विश्वविख्यात अल्सटॉम कंपनी की भारतीय अनुषंगी इकाई अल्सटॉम ट्रांसपोर्ट इंडिया लिमिटेड द्वारा आपूर्त अत्याधुनिक ट्रेन नियंत्रण एवं प्रणोदन प्रणाली लगी है। स्वदेशी विनिर्माण और वैश्विक प्रौद्योगिकी के इस अद्वितीय संगम ने भारतीय रेल की अगली पीढ़ी के सफर की शुरुआत कोटा की पटरियों से की।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि यह परीक्षण श्रृंखला आरडीएसओ (अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन), लखनऊ के निदेशक (परीक्षण) धीरेन्द्र कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ अनुभाग अभियंता राघवेन्द्र सिंह की निगरानी में संचालित हो रही है।

यह परीक्षण अगले कई दिनों तक जारी रहेगा। प्रथम परीक्षण में 60 से 115 किमी प्रति घंटे की गति तक प्रणोदन प्रदर्शन मूल्यांकन, ब्रेक कार्यक्षमता सत्यापन तथा प्रणाली एकीकरण परीक्षण सम्पन्न किए गए।

परीक्षण रेक ने नागदा–कोटा खंड पर सभी स्थायी एवं अस्थायी गति प्रतिबंधों का पूर्णतः पालन करते हुए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह दौड़ पूरी की। यह प्रारंभिक चरण आगामी उच्च गति परीक्षणों जो क्रमशः अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे तक संचालित होने प्रस्तावित हैं की नींव तैयार करता है।

इस परीक्षण विशेष का संचालन कोटा मंडल के अनुभवी दल द्वारा किया जा रहा है, जिसमें मुख्य लोको निरीक्षक वाईके.शर्मा, लोको पायलट विपिन कुमार सिंह, सह-लोको पायलट घनश्याम जोशी, मुख्य यातायात निरीक्षक सुशील कुमार जेठवानी तथा ट्रेन प्रबंधक रवि अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। इनके साथ अल्सटॉम और वाबटेक की विशेषज्ञ तकनीकी टीमें प्रणाली संचालन में सतत सहभागी हैं।