मुम्बई। कृषि प्रधान देश भारत में सितम्बर 2025 की तुलना में सितम्बर 2026 के दौरान देश में वनस्पति तेलों (खाद्य एवं अखाद्य तेल) का आयात 6.7 प्रतिशत घटकर 15.80 लाख टन के करीब रह गया लेकिन नवम्बर 2025 से सितम्बर 2026 के 11 महीनों में इसका कुल सकल आयात 150.30 लाख टन से 2.9 प्रतिशत बढ़कर 154.60 लाख टन से ऊपर पहुंच गया। सूरजमुखी तेल का आयात कम हो रहा है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नवीनतम मासिक आंकड़ों से पता चलता है कि नवम्बर 2025 से सितम्बर 2026 के ग्यारह महीनों के दौरान नेपाल से भारत में 6,82,452 टन रिफाइंड खाद्य तेल का आयात किया गया जिसमें अकेले रिफाइंड सोयामील देश के आयात का योगदान 6,05,896 टन रहा।
ध्यान देने की बात है कि नेपाल के रिफाइनर्स विदेशों से विशाल मात्रा में क्रूड सोयाबीन तेल तथा थोड़ी-बहुत मात्रा में पाम तेल (सीपीओ) तथा क्रूड सूरजमुखी तेल मंगाते हैं उसकी रिफाइनिंग करते हैं और फिर उसके अधिकांश भाग को भारत में निर्यात कर देते हैं। नेपाल से भारत में खाद्य तेलों का शुल्क मुक्त आयात होता है जिससे यह काफी सस्ता बैठता है।
एसोसिएशन के अनुसार 1 अगस्त 2026 को भारतीय बंदरगाहों पर 12.40 लाख टन तथा पाइप लाइन में 8.36 लाख टन के साथ कुल 20.76 लाख टन खाद्य तेलों का स्टॉक मौजूद था जो 1 सितम्बर को उपलब्ध स्टॉक से करीब 29 हजार टन अधिक था।
2024-25 के मुकाबले 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में शुरुआती 11 महीनों में रिफाइंड खाद्य तेलों का आयात 16.90 लाख टन से लुढ़ककर 7,40,441 टन रह गया और खाद्य तेलों के कुल आयात में उसकी भागीदारी 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत रह गई। इसका प्रमुख कारण इंडोनेशिया एवं मलेशिया से रिफाइंड पामोलीन का नगण्य आयात होना रहा। लेकिन क्रूड खाद्य तेलों का आयात काफी बढ़ गया।

