गेहूं की अच्‍छी पैदावार की उम्‍मीद, इस बार 43% ज्‍यादा खरीदेगी सरकार

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नई दि‍ल्‍ली। मौसम में अचानक आए बदलाव की वजह से उत्‍तरी भारत के इलाकों में गेहूं की अच्‍छी पैदावार के आसार बन गए हैं। मौसम वि‍भाग के मुताबि‍क, अगले तीन से चार दि‍नों तक न्‍यूनतम तापमान में कोई कमी आने के आसार नहीं है। जम्‍मू कश्‍मीर पर बने वेस्‍टर्न डि‍स्‍टरबेंस की वजह से जम्‍मू-कशमीर, हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड में बारि‍श और बर्फबारी के आसार हैं।

वहीं उत्‍तर प्रदेश, हरि‍याणा, पंजाब और उत्‍तरी राजस्‍थान में ठंडी हवाएं चलेंगी। । मौसम वि‍भाग ने 13 फरवरी को उत्‍तर के मैदानी इलाकों और मध्‍य भारत में भी बारि‍श की संभावना जताई है। इस तरह के मौसमी हालात गेहूं के लि‍ए बहुत अच्‍छे रहते हैं।

फसल को मि‍ल जाएगा टाइम
इंडियन एग्रीकल्‍चर रि‍सर्च इंस्‍टीट्यूट में कृषि वैज्ञानि‍क डॉक्‍टर जे पी डबास के मुताबि‍क, गर्मी जि‍तना धीमी रफ्तार से आएगी उतना ही गेहूं के लि‍ए अच्‍छा रहेगा।

अगर मौसम में अचानक कोई बदलाव आ जाए तो ये गेहूं के लि‍ए नुकसान दायक होता है। अगर अभी हल्‍की बारि‍श पड़ जाए तो ये और अच्‍छा होगा। इससे फसल को टाइम मि‍ल जाएगा और दानों का वजन बढ़ जाएगा।

3.3 करोड़ टन गेहूं की खरीद का लक्ष्‍य
अप्रैल में गेहूं की कटाई शुरू हो जाती है। इस साल सरकार ने 3.3 करोड़ टन गेहूं की खरीद का लक्ष्‍य रखा है। यह पि‍छले साल के मुकाबले करीब 43 फीसदी ज्‍यादा है। पिछले साल सरकार टारगेट से कम खरीद कर पाई थी। पि‍छले साल गेहूं की कुल खरीद 2.296 करोड़ टन थी।

वर्ष 2015-16 के रबी सीजन में पंजाब से 104.44 लाख टन और हरि‍याणा से 67.78 लाख टन गेहूं की खरीद की गई थी। सरकार ने इस बार गेहूं की एमएसपी 1735 और चने की एमएसपी और बोनस 4400 रुपए तय कि‍या है।

इस बार घटा है रकबा
हालांकि‍ इस बार गेहूं का रकबा घटा है। यह पि‍छले रबी सीजन के मुकाबले 5.38 फीसदी कम है। एग्रीकल्‍चर मि‍नि‍स्‍टरी की ओर से 2 फरवरी को जारी आंकड़ों के मुताबि‍क, अभी तक 300.70 हैक्‍टेयर इलाके में गेहूं की बुवाई हुई है, जबकि‍ बीते साल 317.82 हैक्‍टेयर में गेहूं की बुवाई हुई थी।

रात का तापमान 5 से 6 डिग्री उपयुक्‍त
गेहूं को शुरू में ठंडक की जरूरत पड़ती है। ज्‍यादा गर्मी होने पर गेहूं के बीज अंकुरि‍त होने में दि‍क्‍कत आती है। रबी के मौसम में रात में ठंडक बढ़ने से गेहूं, चना और सरसों को फायदा होता है। वहीं अगर रात का तापमान ज्‍यादा रहा तो इन फसलों को नुकसान होता है।

रात में श्‍वसन (रेस्पिरेशन) की रफ्तार बढ़ जाती है। उसके लिए न्यूनतम तापमान 5 से 6 डिग्री होना चाहिए। वहीं दिन का तापमान 20-25 डिग्री होना चाहिए।