बजट से उम्मीद: किसानों को मिले ब्याज मुक्त ऋण- भाकिसं

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  • कृषि कनेक्शन बिल छह महीने में आएं, पेनल्टी माफी योजना लागू हो
  • कछुआ चाल से चल रही सिंचाई परियोजनाओं को मिले गति

कोटा।प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से बुधवार को पेश किए जाने वाले बजट से किसानों को बहुत उम्मीदें हैं। भारतीय किसान संघ ने बजट में किसानों को सम्बल देने की आशा जताई है। भारतीय किसान संघ के प्रवक्ता आशीष मेहता ने बताया कि देशभर में किसान के नाम पर केवल राजनीति की जा रहा है। लेकिन, अब प्रदेश के मुख्यमंत्री बजट में कुछ अहम घोषणाएं कर किसानों को राहत दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बजट में किसानों के कृषि व घरेलु विद्युत बिल माफ किए जाएं तथा पूर्व में बंद कर दिए गए कृषि विद्युत बिलों मंे दिए जाने वाले 833 रुपये प्रतिमाह के अनुदान को फिर से समायोजित किया जाए। पूर्व और वर्तमान सरकार के द्वारा स्वीकृत व प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए।

मुख्यमंत्री के द्वारा पिछली सरकार में 1646 करोड रूपए की राशि नहरों के जीर्णाेंद्धार के लिए दी गई थी, लेकिन उसके निर्माण का कार्य कछुआ चाल से चल रहा है। जिसमें अब गति मिलनी चाहिए। हाइटेंशन विद्युत लाइनों के नीचे आई जमीन पर फसल उगाने से वंचित रहने पर हुई आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए प्रतिवर्ष निश्चित मुआवजा राशि का भुगतान किसानों को किया जाए।

प्रान्तीय महामंत्री जगदीश कलमंडा ने बताया कि किसानों की कोई निश्चित मासिक आय नहीं होती। ऐसे में, किसानों को प्रतिमाह के बजाय छह माह में बिजली का बिल दिया जाना चाहिए। गत सरकार में हर महीने बिल देने पर 2017 से पेनल्टी माफी की योजना शुरू की गई थी। जिसे फिर से शुरू किया जाना चाहिए। सरकार के द्वारा 5 हजार का बिल होने पर कनेक्शन काटे जा रहे हैं। जिसे भी रोक की घोषणा हो।

जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए बकाया भुगतान की शर्त हटाई जाए। गत दो बजट में सामान्य श्रेणी कनेक्शनों की कटऑफ दिनांक नही बढ़ी है। ऐसे में, वर्षों से कृषि कनेक्शन का इंतजार कर रहे किसानों को राहत देने व प्रवासी नागरिकों को रोजगार की आवश्यकता के मद्देनजर मार्च 2012 से लंबित सामान्य श्रेणी के कृषि कनेक्शनों के मांग पत्र जारी कर कृषि कनेक्शन दिए जाएं।

जिलाध्यक्ष गिरीराज चौधरी ने कहा कि विभिन्न पुनर्भुगतान योजनाओं में किसानों का डिस्काॅमो में बकाया ब्याज सहित विद्युत बिलों में समायोजित किया जाना चाहिए। एक वर्ष पुरानी ऑडिट की राशि विद्युत बिल में नहीं जोड़ी जाए। कृषि विद्युत कनेक्शनों के लिए फ्लेट रेट व मीटर श्रेणी को स्वैच्छिक किया जाए। कृषि विद्युत नीति 2017 में कृषि कनेक्शन के स्वीकृत भार में एक से अधिक पम्प चलाने पर मांग पत्र राशि जमा करने के किए गए प्रावधान को खत्म कर पहले की तरह निशुल्क किया जाए।

सिंगल फेज कृषि कनेक्शन जारी किए जाएं। घरेलू विद्युत सतर्कता जांच के एसेसमेंट में जुर्माना व दायित्व राशि की गणना स्वीकृत भार के बजाय कनेक्टेड भार को आधार मान कर ही की जाए। ब्याज मुक्त सहकारी ऋण वितरण में लगाई विभिन्न शर्तो को हटाकर कर साख सीमा के बराबर सभी किसानों को ब्याज मुक्त ऋण दिया जाए।