कर्मचारी भविष्य निधि में अंशधारकों की अब बढ़ेगी पेंशन, सैलरी सीमा में होगा संशोधन

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( EPFO)के सैलरी सीमा में संशोधन का विचार कर रही है। सरकार पेंशन स्कीम के तहत सैलरी सीमा को संशोधित करने पर विचार कर रही है। ये संशोधन कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के योगदान में किए जाएगा।

इस नए संशोधन के बाद कर्मचारियों और नियोक्ता दोनों के योगदान में बढ़ोतरी की जाएगी। वहीं इस संशोधन के बाद ईपीएफओ के तहत अधिक लोगों को जुड़ने का मौका मिलेगा।वर्तमान में सैलरी सीमा 15000 रुपए प्रति माह हैं, जिसे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

अगर सैलरी सीमा में संशोधन किया जाता है तो कर्मचारियों और नियोक्ताओं के अनिवार्य योगदान में बढ़ोतरी होगी। जिसका लाभ कर्मचारियों को उनकी रिटायरमेंट सेविंग पर मिलेगी। इसके अलावा इस सामाजिक सुरक्षा केवरेट में और अधिक श्रमिक और कर्मचारी शामिल हो सकेंगे। साल 2014 में सरकार ने ईपीएफओ सीमा बढ़ोतरी की थी और इसे 6500 रुपए से बढ़ाकर 15000 रुपए प्रति माह कर दिया था

आठ बार हुए संशोधन: ईपीएफओ के सैलरी सीमा में आठ बार संशोधन किया जा चुका है। सबसे पहले साल 1952 में सैलरी सीमा 300 रुपए थी, जिससे 1957 रुपए में इसे 500 रुपए, 1962 रुपए 1000 रुपए, साल 1976 में 2500 रुपए किया गया है। वहीं 1985 में इसे बढ़ाकर 3500 रुपए, 1990 में 5000 रुपए किया गया। साल 1994 में इसे 6500 रुपए कर दिया गया और साल 2014 से अब तक ये सीमा 15000 रुपए बनी हुई है। माना जा रहा है कि सरकार इसे एक बार फिर से संशोधित कर 21000 रुपए प्रति माह कर सकती है। अगर सरकार ये फैसला लेती है तो ईपीएफएओ पेंशन का लाभ पाने के लिए मिनिमम सैलरी की लिमिट बढ़ जाएगी।