कोविड से ठीक हुए लोगों को ब्रेन स्ट्रोक और पल्मोनरी थ्रम्बोसिस का खतरा

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नई दिल्ली। कोविड से ठीक हुए लोगों के लिए खतरा अभी टला नहीं है। हार्ट की नली में ब्लड क्लॉट बन रहा है। छोटी उम्र में दिल का दौरा पड़ रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि पोस्ट कोविड न केवल हार्ट बल्कि ब्रेन स्ट्रोक और पल्मोनरी थ्रम्बोसिस का भी खतरा बढ़ गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि जिन मरीजों में स्टेराइड का इस्तेमाल हुआ था, उनका डायबिटीज अप-डाउन हो रहा है, हिप जॉइंट का अर्थाराइटिस हो रहा है। डॉक्टर का कहना है कि कोविड का सबसे ज्यादा असर हार्ट पर ही हो रहा है। पहले की तुलना में कम उम्र और ज्यादा मरीजों में हार्ट की बीमारी देखी जा रही है।

अचानक कार्डिएक अरेस्ट: जनकपुरी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल ढल ने कहा कि हमारे पास ऐसे-ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें कोविड से ठीक हुए एक साल बीत गए, लेकिन उनकी परेशानी कम नहीं हुई है। इनकी बॉडी में एसी2 रिसेप्टर होता है, जिसमें वायरस चिपकता है और फिर यहीं से ब्लड में मिलकर शरीर के बाकी हिस्सों में पहुंचता है। यह हार्ट के मसल्स को भी प्रभावित करता है। इन्फ्लामेशन की वजह से इंडोथिलियम क्लॉट बनता है, जो वीनस और आर्टिरियल तक पहुंच जाता है। यही नहीं कई मरीज ऐसे भी देखे जा रहे हैं, जिनका हार्ट का रिदम नॉर्मल नहीं है। बैठने पर हार्ट बीट ठीक है, उठने पर हार्ट बीट तेज हो जा रही है। इसे पोस्टुरल आर्थेस्टेटिक ट्रैकीकार्डिया सिंड्रोम कहा जाता है। उन्होंने कहा कि हार्ट में क्लॉट के मरीजों की संख्या बढ़ी है।

अभी चल रही है स्टडी: इस बारे में एम्स के कोविड एक्सपर्ट पीयूष रंजन ने बताया कि सबसे ज्यादा हार्ट को प्रभावित कर रहा है। पोस्ट कोविड थम्बोसिस बन रहा है। यानी ब्लड क्लॉट बन रहा है। यह किसी के हार्ट में तो किसी के लंग्स को और किसी के ब्रेन तक पहुंच सकता है। अभी भी इस प्रकार के मरीज सामने आ रहे हैं। लेकिन हमारे पास इसे साबित करने के लिए सबूत नहीं है। पूरी दुनिया में इस पर स्टडी चल रही है। भारत में भी इस पर कई स्टडी की जा रही हैं। तब हम दावे के साथ कह पाएंगे कि पोस्ट कोविड कौन सी बीमारी कितनी हुई।

दवा के साइड इफेक्ट्स: डॉक्टर पीयूष रंजन ने कहा कि पहले और दूसरे फेज में ही दवा का ज्यादा इस्तेमाल हुआ था। उन दवाओं के बहुत ज्यादा साइड इफेक्टस नहीं हैं, क्योंकि अधिकतर दवा दूसरी बीमारी में इस्तेमाल होती रही हैं। लेकिन स्टेरॉयड की वजह से बहुत बड़े स्तर पर साइड इफेक्ट्स देखे गए। जिसमें ब्लैक फंगस आम बात है। स्टेरॉयड उन लोगों में ज्यादा घातक हुआ, जो अपनी मर्जी से अपनी इच्छानुसार डोज ले रहे थे। कब, किसे और कितनी डोज लेनी है, उन्हें पता नहीं था। कब दवा बंद करनी है, इसकी जानकारी के बिना दावा खाते जा रहे थे। स्टेरॉयड के साइड इफेक्टस पहले से हैं, इसलिए डॉक्टर की निगरानी में ही यह दवा लेनी चाहिए। लेकिन शुरू में लोग धड़ल्ले से खा रहे थे।