लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रामदेव की हुई रुचि, NCLT ने लगाई मुहर

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नई दिल्ली। लंबे समय तक कानूनी लड़ाई के बाद खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया बाबा रामदेव की हो गई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने रुचि सोया को खरीदने की पतंजलि की बोली पर अंतिम मुहर लगा दी है। साथ ही पतंजलि को रुचि सोया का मालिकाना हक लेने के लिए हरी झंडी दिखा दी है।

पतंजलि ने 4350 करोड़ रुपए में रुचि सोया को खरीदा है। रुचि सोया बैंकों का करीब 9,345 करोड़ रुपए और अन्य कर्जदाताओं का 2800 करोड़ रुपए का कर्ज है। एनसीएलटी ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और सिंगापुर की फर्म डीबीएस की अपील को खारिज कर दिया है। इन दोनों ने पतंजलि की बोली को कम बताते हुए एनसीएलटी में याचिका दायर की थी।

रुचि सोया पर 9345 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है जिसमें सबसे ज्यादा 1800 करोड़ रुपए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के हैं। इसके अलावा 846 करोड़ रुपए सेंट्रल बैंक, 743 करोड़ रुपए पंजाब नेशनल बैंक, 608 करोड़ रुपए स्टैंडर्ड चार्टर्ड और 243 करोड़ रुपए डीबीएस के शामिल हैं। इस प्रकार समाधान प्रक्रिया में कर्जदाताओं को 60 प्रतिशत से ज्यादा रुपयों का नुकसान हुआ है।

इसके अलावा समाधान विशेषज्ञों ने 2716 करोड़ रुपए का दावा परिचालन कर्ज के तौर पर स्वीकार किया है। हालांकि, आदेश में यह नहीं कहा गया है कि इनको समाधान प्रक्रिया के तहत कितने रुपए मिलेंगे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी।

स्वदेशी अभियान में मिलेगी मदद
एनसीएलटी के आदेश के बाद पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने बातचीत में कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है। इससे हमें स्वदेशी अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संसाधनों की सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए यह एक महान कदम है। इससे स्वदेशी अभियान की मजबूती के साथ किसानों को भी मदद मिलेगी।