वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गरुड़ सवार गणेश का पर्यावरण संरक्षण प्रहरी कुंड में विसर्जन

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राधा-कृष्ण मंदिर समिति का पर्यावरण संरक्षण के लिए अनोखा नवाचार

कोटा। राधा-कृष्ण मंदिर समिति द्वारा इस वर्ष गणेश विसर्जन के अवसर पर धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा और अनुकरणीय संगम प्रस्तुत किया गया।

मंदिर में स्थापित गरुड़ पर सवार भगवान श्री गणेश की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमा का विसर्जन मंदिर अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल के निर्देशन में पूर्ण विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और गूंजती शंख ध्वनि के बीच ‘पर्यावरण संरक्षण प्रहरी गणेश विसर्जन कुण्ड’ में संपन्न हुआ।
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विसर्जन का यह भव्य एवं पवित्र कार्यक्रम समिति के सभापति राकेश अग्रवाल, अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल, महामंत्री जितेंद्र गोयल तथा मंदिर समिति के पदाधिकारियों के समस्त परिवारों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

वैदिक आचार्यों द्वारा किए गए मंत्रोच्चार और शंखनाद से संपूर्ण मंदिर प्रांगण भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। समिति के इस नवाचार से प्रेरणा लेते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी इको-फ्रेंडली मिट्टी के गणेशजी का विसर्जन इसी कुण्ड में किया।

इस अवसर पर लक्ष्मी नारायण खंडेलवाल, रवि अग्रवाल, मोहन अग्रवाल, इंद्रेश गर्ग, एच.पी. गुप्ता, राम किशोर शर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

​विसर्जन की रज से महकेगा हर घर
राधा-कृष्ण मंदिर समिति ने इस अनुष्ठान को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संवर्धन से भी जोड़ा है। विसर्जन के उपरांत कुण्ड में बची हुई पवित्र मिट्टी (रज) का सदुपयोग करते हुए 108 विशेष गमले तैयार किए जा रहे हैं। इन गमलों में वास्तु एवं सौभाग्य के प्रतीक माने जाने वाले ‘जेड प्लांट’ लगाए जाएंगे। जेड प्लांट न केवल आसपास के वातावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि मानसिक तनाव को दूर करने में भी बेहद सहायक माने जाते हैं।

​नवरात्रा चतुर्थी पर विद्यार्थियों को होगा निशुल्क वितरण
समिति द्वारा तैयार किए जा रहे इन 108 पवित्र जेड प्लांट का निशुल्क वितरण आने वाली नवरात्रा चतुर्थी (14 अक्टूबर) को प्रातः 10 बजे से मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। यह पौधे पहले से पंजीकृत विद्यार्थियों को वितरित किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी में पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता और संस्कार विकसित किए जा सकें।
​मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आस्था के साथ प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना ही सच्चा धर्म है। समिति का यह प्रयास समाज में मिट्टी की प्रतिमाओं के उपयोग और पौधारोपण के प्रति एक सकारात्मक संदेश देने में सफल रहा है।