गवर्नमेंट कॉलेज के सैकड़ों विद्यार्थियों ने लिया नेत्रदान का संकल्प

0
1

कोटा। राजकीय महाविद्यालय, कोटा के रामानुजन सभागार में शनिवार को पोषण परामर्श एवं मधुमेह प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में नेत्रदान, मधुमेह एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि इस अवसर पर लगभग 100 विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने नेत्रदान का महासंकल्प लिया। नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष नेत्रदान जागरूकता पोस्टर का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय, कोटा की प्राचार्य डॉ. प्रतिमा जायसवाल, संकाय सदस्य प्रो. नीरजा श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, कोटा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. के. के. कंजोलिया, वरिष्ठ नेत्र शल्य चिकित्सक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुरेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. प्रतिमा जायसवाल, डॉ. के. के. कंजोलिया, डॉ. सुरेश के. पाण्डेय एवं अन्य अतिथियों द्वारा नेत्रदान जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया गया।

इसके बाद लगभग 100 विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया। सभागार में ‘नेत्रदान करें—किसी की दुनिया रोशन करें’ का संदेश गूंज उठा।

डॉ. के. के. कंजोलिया ने नेत्रदान और कॉर्नियल अंधत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि कॉर्निया संबंधी रोगों के कारण होने वाली दृष्टि-हानि आज भी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती है। उन्होंने बताया कि एक नेत्रदाता के कॉर्निया उपयुक्त पाए जाने पर दो जरूरतमंद व्यक्तियों के कॉर्नियल प्रत्यारोपण में उपयोग किए जा सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपने परिवार और समाज में नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का आह्वान करते हुए कहा, ‘मृत्यु के बाद भी आपकी आंखें किसी की दुनिया रोशन कर सकती हैं—नेत्रदान का संकल्प लें और दूसरों को भी प्रेरित करें।’

वरिष्ठ नेत्र शल्य चिकित्सक डॉ. सुरेश के. पाण्डेय ने मधुमेह और आंखों पर उसके प्रभाव की जानकारी देते हुए डॉ. पाण्डेय ने कहा कि मधुमेह को केवल रक्त शर्करा बढ़ने की बीमारी नहीं समझना चाहिए। लंबे समय तक अनियंत्रित रक्त शर्करा आंखों, हृदय, मस्तिष्क, किडनी और पैरों की रक्तवाहिनियों एवं नसों को प्रभावित कर सकती है। मधुमेह के कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी नेत्र समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि डायबिटिक रेटिनोपैथी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रारंभिक अवस्था में रोगी को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं भी हो सकता। इसलिए उन्होंने संदेश दिया, “मधुमेह जीवनभर हो सकता है, लेकिन दृष्टि-हानि जरूरी नहीं। धुंधला दिखने का इंतजार मत कीजिए। रेटिना की नियमित जांच कराइए। मधुमेह नियंत्रित करें, रेटिना जांचें, दृष्टि बचाएं।”

डॉ. पाण्डेय ने मधुमेह रोगियों के लिए दृष्टि सुरक्षा सूत्र- एस यानी शुगर नियंत्रण, आई यानी रेटिना की नियमित जांच, जी यानी रक्तचाप, किडनी एवं सामान्य स्वास्थ्य की रक्षा, एच यानी स्वस्थ जीवनशैली और टी यानी समय पर उपचार बताया। उन्होंने मधुमेह रोगियों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रेटिना जांच कराने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मधुमेह, पोषण, नेत्रदान, कॉर्नियल प्रत्यारोपण, रेटिना जांच एवं स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया।

कार्यक्रम का समापन ‘मधुमेह नियंत्रित करें, रेटिना जांचें, दृष्टि बचाएं’ तथा ‘नेत्रदान करें-किसी की दुनिया रोशन करें’ के प्रेरक संदेश और सामूहिक नेत्रदान महासंकल्प के साथ हुआ।