नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेहरान के साथ कोई बातचीत नहीं चलने के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 91 डॉलर के पार चली गई हैं। आज सुबह 6 बजे WTI 45 सेंट की बढ़त के साथ 85.30 डॉलर प्रति बैरल पर था। जबकि, ब्रेंट क्रूड 38 सेंट चढ़कर 91.40 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। बता दें एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।
दुनिया भर में डीजल मार्केट विशेष रूप से तंग हैं, क्योंकि मध्य पूर्व से सप्लाई बाधित हुई है और मॉस्को ने निर्यात रोक दिया है। अमेरिका में कच्चे तेल से डीजल बनाने का मुनाफा 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक बढ़ गया है, जो अब तक का सबसे हाई लेवल है।
तेल के खेल में बढ़ रही महंगाई
फरवरी के अंत में मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ गया है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध ने भी रिफाइनरियों पर हमलों के बाद ऊर्जा बाजारों को और तंग कर दिया है। उत्पादों की कीमतें, खासतौर पर डीजल, कच्चे तेल से कहीं ज्यादा बढ़ी हैं, जिससे आम ड्राइवरों, ट्रक चालकों और उद्योग पर भारी दबाव पड़ा है।
अमेरिका में तेल भंडार घटा
अमेरिका में तेल भंडार कम होने के नए संकेत मिले हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) ने देशभर में कच्चे तेल के भंडार में मामूली कमी बताई, जिसमें ओक्लाहोमा के कुशिंग केंद्र पर भी कमी शामिल है। डीजल जैसे ईंधन के भंडार में भी गिरावट देखी गई। आधिकारिक आंकड़े बुधवार को बाद में जारी किए जाएंगे।

