नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल के मुकाबले मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान मूंगफली तिल एवं सूरजमुखी के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन सोयाबीन एवं अरंडी के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आने से तिलहन फसलों का कुछ क्षेत्र कल करीब 90 हजार हेक्टेयर घट गया।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि गत वर्ष 14 अगस्त तक खरीफ कालीन तिलहनों का कुल उत्पादन क्षेत्र 185.36 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था जो इस बार 184.46 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
समीक्षाधीन अवधि के दौरान मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 47.01 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 48.03 लाख हेक्टेयर तथा तिल का बिजाई क्षेत्र 8.73 लाख हेक्टेयर से उछलकर 10.35 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा लेकिन अरंडी का रकबा 6.19 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 3.83 लाख हेक्टेयर तथा सोयाबीन का क्षेत्रफल 122.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 120.84 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
अरंडी का रकबा दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में बढ़ा है लेकिन दो शीर्ष उत्पादक प्रान्त- गुजरात एवं राजस्थान में काफी पीछे चल रहा है। राजस्थान में तो इसका बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 2.66 लाख हेक्टेयर की तुलना में आधा से भी ज्यादा घटकर महज 1.16 लाख हेक्टेयर रह गया है।
हालांकि इसकी बिजाई के लिए समय अभी बचा हुआ है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि अरंडी की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी कम हो गई है। सोयाबीन का रकबा भी कुछ पिछड़ गया है। मूंगफली का रकबा पहले घट रहा था मगर अब गत वर्ष से एक लाख हेक्टेयर आगे हो गया है। तिलहन फसलों की हालत संतोषजनक बताई जा रही है।

