नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने की सबसे बड़ी जरूरत: मुनि विवर्धनसागर

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने कहा कि श्रद्धा के साथ उत्साह जुड़ जाए तो धर्म की प्रभावना कई गुना बढ़ जाती है। जहां श्रद्धा होती है, वहां उत्साह स्वतः जन्म लेता है और यही उत्साह व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।

धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला माध्यम है। धर्म के अनुरूप आचरण करने से जीवन में सफलता, शांति और संतोष की अनुभूति होती है।

मुनिश्री ने कहा कि मन में शुभ भावना रखना भी पुण्य का कारण बनता है। व्यक्ति के विचार और भाव ही उसके जीवन की दिशा तय करते हैं। इसलिए मन में सद्भाव, सेवा और परोपकार की भावना रखनी चाहिए।

समाज की एकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी समाज तभी मजबूत बनता है, जब उसके सदस्य व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सामूहिक हित के बारे में सोचें।

समाज सभी व्यक्तियों के सहयोग से बनता है और प्रत्येक व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी होती है। यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निष्ठा और ईमानदारी से निभाए तो एक आदर्श एवं सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।

नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का आह्वान करते हुए मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं को धर्म, संस्कृति और साधु-संतों के सान्निध्य से जोड़ना आवश्यक है।

संतों के विचार और संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने गुरुकुल के विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

धर्मसभा में सकल जैन समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बडला, जेके जैन, मनोज जैसवाल, जैनेन्द्र जज सा, संजय बांजल, कमल जैन धानमंडी, आशीष जैसवाल, टीकम पाटनी ओर गुरु सेवा संघ परिवार के सदस्य मौजूद रहे।