आयात का दबाव और बिजाई क्षेत्र में वृद्धि होने से उड़द में नरमी का माहौल

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नई दिल्ली। बिजाई क्षेत्र में वृद्धि होने तथा फसल की हालत अच्छी होने से खरीफ कालीन उड़द का उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है। विदेशों से इसका आयात नियमित रूप से हो रहा है जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है।

दूसरी ओर इसकी मांग कुछ कमजोर देखी जा रही है जिससे कीमतों पर दबाव पड़ रहा है। नई घरेलू फसल सितम्बर-अक्टूबर में आने लगेगी। कुछ सप्ताह पूर्व तक उड़द का भाव ऊंचा एवं तेज चल रहा था जो अब नरम पड़ गया है। देश के मध्यवर्ती एवं उत्तरी राज्यों में इसके बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है।

राष्ट्रीय स्तर पर इसका उत्पादन क्षेत्र 31 जुलाई 2026 तक बढ़कर 21.08 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 19.80 लाख हेक्टेयर से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है। वैसे खरीफकालीन दलहन फसलों का कुल रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है।

उड़द का बिजाई क्षेत्र उत्तर प्रदेश में 3.42 लाख हेक्टेयर से 61 प्रतिशत उछलकर 5.52 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 5.79 लाख हेक्टेयर से 16 प्रतिशत सुधरकर 6.72 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 3.11 लाख हेक्टेयर से 20 प्रतिशत सुधरकर 3.75 लाख हेक्टेयर तथा गुजरात में 50 हजार हेक्टेयर से 40 प्रतिशत बढ़कर 71 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।

इसके अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी उड़द के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन दूसरी ओर इसका रकबा कर्नाटक में 95 हजार हेक्टेयर से 25 प्रतिशत गिरकर 71 हजार हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 3.58 लाख हेक्टेयर से 50 प्रतिशत घटकर 1.76 लाख हेक्टेयर रह गया। दाल मिलों में उड़द की मांग कमजोर है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 3 अगस्त 2026 को अखिल भारतीय स्तर पर उड़द का औसत थोक मंडी भाव घटकर 8638 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया जो उससे पिछले सप्ताह 8908 रुपए प्रति क्विंटल तथा दो सप्ताह पूर्व 8980 रुपए प्रति क्विंटल पर था।

तीन सप्ताह पहले इसका औसत थोक मंडी मूल्य उछलकर 9132.55 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा था जबकि एक माह पूर्व यह 8233 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था।