पहली बार 145 किमी ट्रैक पर बिना पावर ब्लॉक, ड्रोन व थर्मल इमेजिंग से निरीक्षण

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कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने रेल सुरक्षा को और मजबूत करते हुए पहली बार ड्रोन आधारित ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) निरीक्षण प्रणाली का सफल प्रयोग किया है।

मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा के मार्गदर्शन में कोटा-लाखेरी रेलखंड की मुख्य लाइन पर लगभग 145 ट्रैक किलोमीटर क्षेत्र का निरीक्षण ड्रोन व थर्मल इमेजिंग तकनीक से पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर किया गया।

सबसे बड़ी बात यह रही कि यह पूरा कार्य बिना पावर ब्लॉक लिए संपन्न हुआ, जिससे ट्रेनों के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा और यात्रियों की यात्रा निर्बाध बनी रही।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि अब तक ओएचई की जांच जमीन से दूरबीन के सहारे होती थी, जिससे ऊंचाई पर लगे उपकरणों की बारीकी से जांच सीमित रहती थी।

ड्रोन के हाई-रिजॉल्यूशन व थर्मल कैमरों से अब उन स्थानों की भी सटीक जांच संभव हो रही है, जहां पहले पहुंचना मुश्किल था। निरीक्षण में इंसुलेटर खराबी, गायब नट-बोल्ट, थर्मल हॉटस्पॉट, झुकी नंबर प्लेट, गायब एंटी-फॉलिंग रॉड पिन तथा मस्तूल के पास वनस्पति जैसी कई तकनीकी कमियां सामने आईं, जिनका समय रहते सुधार अब संभव होगा।

इससे ओएचई खराबी की आशंका घटेगी, अनावश्यक परिचालन व्यवधान कम होंगे और ट्रेनें अधिक समयबद्ध ढंग से चल सकेंगी, जिसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा।

वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (टीआरडी) नीरज शर्मा के निर्देशन में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब कोटा मंडल पूरे मंडल में इस तकनीक का विस्तार करने जा रहा है। आगामी समय में करीब 2300 ट्रैक किलोमीटर ओएचई का निरीक्षण ड्रोन व थर्मल इमेजिंग तकनीक से किया जाएगा।

इसके साथ ही विशेषज्ञ ड्रोन फोटो का विश्लेषण कर रहे हैं और भविष्य में पर्याप्त डाटा मिलने पर इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जोड़ा जाएगा, जिससे दोषों की पहचान स्वतः हो सकेगी। सभी डाटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जाएगा और आगे टीडीएमएस प्रणाली से भी जोड़ा जाएगा। यह पहल कोटा मंडल को रेलवे में तकनीकी नवाचार के अग्रणी मंडलों में शामिल करती है और यात्रियों को अधिक सुरक्षित, समयबद्ध व निर्बाध रेल यात्रा का भरोसा देती है।