अमेरिका-ईरान टकराव से तेल बाजार में मचा हाहाकार, ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल पार

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नई दिल्ली। Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने का असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 4% उछल गया। ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता दिखा।

तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिका ने एक हफ्ते के भीतर ईरान पर चौथा हमला किया। यह कार्रवाई ईरान द्वारा साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज पर हमले के बाद की गई।

इसके बाद ईरान ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अगली सूचना तक बंद कर दिया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज किया है। इसके बावजूद निवेशकों को तेल सप्लाई प्रभावित होने का डर सता रहा है, जिससे कीमतों में तेजी आई।

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद तेल की कीमतों में कुछ गिरावट आई थी। लेकिन नए सैन्य तनाव ने उस राहत को खत्म कर दिया। अब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना भी कमजोर पड़ गई है। ईरान ने कहा है कि बातचीत आगे बढ़ाने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल निर्यात से जुड़े मुद्दों पर प्रगति जरूरी है।

ब्रेंट और WTI दोनों में जोरदार उछाल
सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 3.93% बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 3.98% की तेजी के साथ 74.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

सात हफ्ते के निचले स्तर पर फिसली प्राकृतिक गैस
दूसरी ओर, अमेरिकी प्राकृतिक गैस की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिका में प्राकृतिक गैस की कीमतें गिरकर 2.90 डॉलर प्रति MMBtu पर आ गई हैं, जो पिछले सात हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह आने वाले दिनों में मौसम के ठंडा रहने का अनुमान है, जिससे एयर कंडीशनिंग की मांग घट सकती है और गैस से बनने वाली बिजली की खपत कम होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, फ्रीपोर्ट LNG ने 10 जुलाई से अगस्त के आखिर तक अपने प्लांट में रखरखाव (मेंटेनेंस) का काम शुरू किया है, जिससे अस्थायी रूप से गैस की खपत घटेगी। वहीं, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 3 जुलाई तक देश में प्राकृतिक गैस का भंडार पिछले पांच साल के औसत से 6.6% अधिक है। पर्याप्त सप्लाई और कमजोर मांग की संभावना के चलते प्राकृतिक गैस की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।