कोटा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार दोपहर छात्रों से संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोटा पहुंचे। करीब 3:30 बजे चार्टर विमान से कोटा एयरपोर्ट पहुंचने पर उनका कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया।
राहुल गांधी के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एयरपोर्ट पहुंचे थे। एयरपोर्ट लाउंज से बाहर निकलकर जैसे ही राहुल गांधी अपने काफिले की ओर बढ़े, कार्यकर्ता उनसे मिलने और स्वागत करने के लिए आगे आने लगे।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कार्यकर्ताओं को पीछे हटाया गया। इस दौरान राहुल गांधी के काफिले को एयरपोर्ट से बाहर निकालने में पुलिस और प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
एयरपोर्ट से राहुल गांधी सीधे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल पहुंचे, जहां उन्होंने कुछ चयनित छात्रों से मुलाकात और चर्चा की। इसके बाद शाम 5:30 बजे उनका मुख्य कार्यक्रम दशहरा मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ संवाद कार्यक्रम है।
कांग्रेस के अनुसार इस कार्यक्रम में केवल छात्रों को ही प्रवेश दिया गया है, जबकि पार्टी कार्यकर्ताओं को एंट्री नहीं दी जाएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में छात्रों के सामने आने वाली समस्याओं, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है।
कोटा पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि कोटा के लिए रवाना होते समय उनके मन में दो नाम लगातार गूंज रहे हैं—सीकर के उमेश और देहरादून की रिया। राहुल गांधी ने दावा किया कि दोनों छात्रों ने री-नीट (Re-NEET) के दबाव में अपनी जान दे दी।
उन्होंने लिखा कि 22 और 23 साल के ये युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन अन्यायपूर्ण व्यवस्था के कारण जिंदगी से हार गए। राहुल गांधी ने इन मौतों को “टूटी और भ्रष्ट व्यवस्था” का परिणाम बताते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की सुरक्षा और भविष्य सुनिश्चित करने के बजाय सरकार ने पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को बढ़ावा देने वालों को संरक्षण दिया।
किसी बच्चे का सपना अब नहीं टूटने देंगे
राहुल गांधी ने कहा कि कोटा से शुरू होने वाली यह लड़ाई छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने लिखा कि किसी भी बच्चे के सपने इस तरह टूटने नहीं चाहिए और किसी भी परिवार को अपने बच्चे को इस तरह खोने का दर्द दोबारा नहीं झेलना पड़े। उन्होंने कहा कि छात्रों और अभिभावकों की पीड़ा अब ‘छात्रों की गूंज’ बनकर पूरे देश में सुनाई देगी।

