संघर्ष ही मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारते हैं : स्वस्ति भूषण माताजी

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कोटा। गणिनी आर्यिका रत्न स्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) के सान्निध्य में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में आयोजित ध्यान-योग एवं आध्यात्मिक चिकित्सा शिविर श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक जागरण और स्वास्थ्य संवर्धन का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

अपने प्रवचन में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण के जीवन में भी अनेक संघर्ष आए, लेकिन उन्होंने चुनौतियों का सामना कभी रोकर नहीं, बल्कि मुस्कुराते हुए किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष ही मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारते हैं और जीवन को महान बनाते हैं।

संघर्षों से बुद्धि तीव्र होती है, जबकि अत्यधिक सुविधाएं मनुष्य को कमजोर बना देती हैं। विशेष रूप से बच्चों को आवश्यकता से अधिक सुविधाएं मिलने पर उनकी निर्णय क्षमता और मानसिक दृढ़ता प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि संघर्ष वह अग्नि है, जिसमें तपकर साधारण मनुष्य भी महानता के शिखर तक पहुंच सकता है। जीवन में सुख और दुख दोनों आते हैं, किंतु अंतर केवल दृष्टिकोण का होता है। कुछ लोग दुखों को रोकर भोगते हैं, जबकि कुछ उन्हें हंसते हुए स्वीकार कर आगे बढ़ते हैं।

मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि सायंकालीन सत्रों में साधकों को योग, ध्यान एवं आध्यात्मिक जीवनशैली का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।