ऊर्जा मंत्री नागर ने किया दीगोद क्षेत्र का दौरा, टूटी नाली और कीचड़ देख भड़के
कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर शुक्रवार को दीगोद क्षेत्र के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल के साथ क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों का सघन निरीक्षण कर स्थानीय स्तर पर चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया।
मंत्री नागर ने ‘वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने ग्राम पंचायतों में स्वच्छता और जल संरक्षण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। अपने दौरे के दौरान ऊर्जा मंत्री ने गांवों में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की धरातलीय स्थिति को भी बारीकी से देखा और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
दौरे के क्रम में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ग्राम पंचायत मूण्डला, कोटसुआं, नीमोदा, डूंगरज्या, दीगोद तथा पोलाईकलां पंचायत मुख्यालयों पर पहुंचे। डूंगरज्या ग्राम पंचायत में उन्होंने नाला एनिकट और सड़क पर चल रहे पुलिया निर्माण कार्य का आकस्मिक निरीक्षण किया।
कार्य की स्थिति को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। मंत्री नागर ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे तय समय सीमा के भीतर सभी गुणवत्तापूर्ण कार्यों को पूरा करें, ताकि आगामी वर्षा ऋतु में पानी की एक-एक बूंद को सहेजा जा सके और आमजन को इसका सीधा लाभ मिल सके।
निरीक्षण के दौरान नीमोदा हरि जी गांव में अव्यवस्थाएं देखकर ऊर्जा मंत्री बेहद नाराज नजर आए। गांव में टूटी-फूटी नालियां और सड़कों पर पसरे कीचड़ को देखकर वे भड़क गए। उन्होंने मौके से ही सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के शासन सचिव आईएएस प्रवीण गुप्ता से फोन पर बात की।
मंत्री नागर ने उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए निर्माण कार्य की विस्तृत जांच करने और इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दौरे के दौरान ऊर्जा मंत्री ने पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने जल संचयन संरचनाओं की वर्तमान स्थिति और अभियान के तहत अब तक हासिल किए गए लक्ष्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि जल संकट के स्थाई समाधान के लिए प्राचीन कुओं, बावड़ियों और तालाबों को पुनर्जीवित करना बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही गांवों में वैज्ञानिक पद्धति से सोखता गड्ढों (सोक पिट) के निर्माण पर जोर दिया गया, ताकि घरों से व्यर्थ बहने वाले पानी का सही उपयोग हो सके और वाटर रिचार्जिंग के माध्यम से भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके।
ग्रामीण स्वच्छता को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए मंत्री नागर ने हर पंचायत में क्लस्टर आधारित कचरा प्रबंधन मॉडल तैयार करने के निर्देश जारी किए। इस आधुनिक मॉडल के तहत गांवों से निकलने वाले सूखे, गीले और मेडिकल वेस्ट को पूरी तरह से अलग-अलग किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रसोई से निकलने वाले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाने के लिए विशेष प्लांट लगाए जाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस उत्पादन की संभावनाओं को भी तलाशा जाए।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के इस संयुक्त प्रयास से न केवल गांव स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

