केंद्र सरकार का विदेशी मुद्रा बचाने के लिए खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने का विचार

0
13

नई दिल्ली। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग के अनुरोध पर सरकार खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि खाद्य तेलों का घरेलू एवं वैश्विक बाजार भाव काफी ऊंचे स्तर पर चल रहा है लेकिन फिर भी इसकी मांग एवं खपत में कमी नहीं आ रही है। प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से खाद्य तेलों का उपयोग घटाने की अपील की गई है।

जानकारों के अनुसार भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे प्रमुख आयातक देश है। यहां आयात शुल्क में वृद्धि होने पर खाद्य तेलों का दाम और भी ऊंचा हो जाएगा जिससे घरेलू तिलहन उत्पादन किसानों को अपने उत्पाद का लाभप्रद मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। खाद्य तेलों के आयात पर अत्यन्त भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

हालांकि अभी आयात शुल्क बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन इसकी संभावना बनी हुई है। सरकार बहुमूल्य विदेशी मुद्रा के बहिर्गमन को नियंत्रित करना चाहती है क्योंकि इसकी भारी निकासी से रुपया की कीमतों पर दबाव बहुत बढ़ गया है। एक अमरीकी डॉलर का दाम 96 रुपए के करीब पहुंच गया है। इससे आयात महंगा होने लगा है।

भारत में विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता बढ़कर 60 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। इस विशालकाय आयात पर अरबों रुपए मूल्य की विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है और भारतीय किसानों को तिलहनों का लाभप्रद मूल्य हासिल करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ता है। वैसे अभी सरसों, सोयाबीन तथा मूंगफली का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है।

नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात में उछाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने मंगलवार को बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्य तेल आयात 3 फीसदी बढ़कर 166.51 लाख टन हो गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात में तेज उछाल के कारण हुई है। पिछले वित्त वर्ष में यह आयात 161.82 लाख टन था।