पश्चिम एशिया संकट से चावल निर्यातकों का 25 हजार करोड़ तक का भुगतान अटका

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चंडीगढ़। पश्चिम एशिया में जारी भयंकर युद्ध के कारण प्रीमियम क्वालिटी के भारतीय बासमती चावल का न केवल निर्यात प्रभावित हो रहा है बल्कि इसके भुगतान का संकट भी गंभीर होता जा रहा है।

समझा जाता है कि विभिन्न आयातक देशों में 2000 करोड़ रुपए से लेकर 25,000 करोड़ रुपए तक का भुगतान अभी लंबित या पेंडिंग है। निर्यात में बाधा पड़ने से व्यापारियों- निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और बासमती धान के उत्पादक किसानों की आजीविका भी खतरे में पड़ गई है।

भारत से प्रीमियम क्वालिटी के 1121 बासमती चावल का निर्यात ईरान सहित खाड़ी क्षेत्र के कई अन्य देशों में बड़े पैमाने पर होता है लेकिन अभी विभिन्न बंदरगाह पर इसका स्टॉक पड़ा हुआ है और उसका शिपमेंट नहीं हो पा रहा है। यदि यह स्थिति बरकरार रही तो निर्यातकों को जबरदस्त आर्थिक नुकसान हो सकता है।

पूर्व में हुए शिपमेंट के तहत विशाल भुगतान अभी लंबित है जिससे निर्यातकों की वित्तीय स्थिति काफी कमजोर हो गई है। यद्यपि केन्द्र सरकार स्थिति की जटिलता को घटाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है मगर समस्या काफी गंभीर है और जल्दी उसका निराकरण होना मुश्किल लगता है। अभी सम्बद्ध सरकारी एजेंसियां अपने-अपने स्तर से बासमती चावल के निर्यातकों की सहायता कर रही हैं।

भारत से लगभग 70-75 प्रतिशत बासमती चावल का निर्यात पश्चिम एशिया, मध्य-पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में होता है जिसमें ईरान, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, जोर्डन, कतर एवं ओमान आदि देश शामिल हैं। बासमती, चावल का शेष निर्यात अमरीका तथा यूरोप सहित अन्य बाजारों में किया जाता है। भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है।