Sunday, July 12, 2026
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संदिग्ध लेनदेन के लिए 18 कंपनियों की जांच करेगी एसएफआईओ

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नयी दिल्ली। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय एसएफआईओ नोटबंदी के दौरान ज्यादा धनराशि वाले कथित संदिग्ध लेनदेनों के कम से कम 18 मामलों की जांच करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

अधिकारी ने कहा कि सरकार अवैध धन के प्रवाह पर शिंकजा कसना जारी रखे हुए है।आधिकारिक रिकॉर्ड में लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी करीब 2.24 लाख कंपनियों और तीन लाख से ज्यादा निदेशकों को अयोग्य घोषित करने के बाद कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय आंकड़ों की जांच-पड़ताल करके जानकारी एकत्र करने में जुटा है।

जांच के दौरान अधिकारियों को संदिग्ध लेनदेन के बारे में पता चला है। इसमें कुछ पंजीकृत कंपनियों के ज्यादा मात्रा में किए गए धन के लेनदेन भी शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि नोटबंदी के दौरान कथित संदिग्ध लेनदेन में लिप्त रहीं कम से कम 18 कंपनियों की एसएफआईओ जांच करेगा।

अवैध धन प्रवाह और भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने की कोशिश के हिस्से के रुप में सरकार ने पिछले साल नवंबर में 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा की थी।

कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने 23 नवंबर को कहा था कि बैंकों से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक करीब 50,000 अपंजीकृत कंपनियों ने नोटबंदी के दौरान करीब 17,000 करोड़ का लेनदेन किया है।

कॉरपोरेट मामले के मंत्रालय ने बताया कि 56 बैंकों से मिली जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई है कि 35,000 कंपनियों के 58,000 बैंक खातों से नोटबंदी के बाद 17,000 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया।

‘EPFO के लिए 21 हजार रुपये वेतन सीमा’ का प्रस्ताव

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने दायरे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाना चाहता है। इसके लिए ईपीएफओ ने वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये करने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा है।

इस बार वित्त मंत्रालय ने इस मसले पर पॉजिटिव रुख दिखाने का आश्वासन दिया है। हालांकि लेबर मिनिस्ट्री का कहना है कि सरकार ज्यादा पेंशन देने के मामले को पहले सुलझाना चाहती है। इसके बाद ईपीएफओ का दायरा बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

सीबीटी के सदस्य और भारतीय मजदूर संघ के नेता नागेश्वर राव का कहना है कि हम चाहते हैं कि सरकार ईपीएफओ के दायरे में ज्यादा लोगों को लाए, ताकि ये लोग सामाजिक योजनाओं का लाभ उठा सकें। यही कारण है कि हमने इस बार सरकार से कहा है कि वह 15 हजार रुपये की वेतन सीमा को बढ़ाकर 21 हजार रुपये करें।

मौजूदा समय में जिस कर्मचारी की बेसिक और डीए मिलाकर 15000 रुपये तनख्वाह मिलती है, वही ईपीएफओ का सदस्य बन सकता है। हम चाहते हैं कि वेतन सीमा को बढ़ाकर 21 हजार रुपये किया जाए। इससे लाखों कर्मचारी ईपीएफओ से जुड़ पाएंगे और इसके द्वारा चलाई जा रही सामाजिक योजनाओं का लाभ ले सकेंगे।

इधर सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने श्रम मंत्रालय को इस प्रस्ताव के वित्तीय पक्ष का आकलन करने के लिए कहा था। हाल ही में इन्हें इनपुट प्राप्त हुआ है और इसे आगे बढ़ा दिया गया है। मौजूदा नियमों के तहत श्रमिकों को ईपीएफ लाभ प्रदान करने के लिए 20 या अधिक लोगों का होना जरूरी है। 

कर्मचारियों के आगे झुकी सरकार, सातवें वेतनमान का एरियर देने को राज़ी

राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का नकद लाभ 1 जनवरी,2017 से देय – उद्योग मंत्री

जयपुर। राज्य सरकार ने कर्मचारियों की आक्रोश रैली से ठीक एक दिन पहले सरकार झुक गई और सातवें वेतनमान के एरियर को लेकर घोषणा कर दी। वेतनमान का नकद लाभ 1 अक्टूबर की बजाय 1 जनवरी 2017 से दिया जाएगा। जिसके एरियर का भुगतान नकद तीन किश्तों में होगा।

सातवें वेतनमान की विसंगति, वेतन कटौती और एरियर समेत सात मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से रविवार को जयपुर में आक्रोश रैली होनी है। इसके साथ ही अगले कुछ दिनों में तीन उपचुनाव होने हैं। इससे घबराई सरकार ने एकाएक सातवें वेतनमान को लेकर कई निर्णय किए।

उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, राजस्थान वित्त आयोग की अध्यक्ष ज्योति किरण और अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डीबी गुप्ता ने पत्रकार वार्ता की। इसमें शेखावत ने बताया कि वेतनमान का लाभ 1 जनवरी से 31 दिसम्बर 2016 तक काल्पनिक आधार पर दिया जाएगा। जो कि नकद लाभ 1 अक्टूबर 2017 से दिया जा रहा है।

अब यह नकद लाभ 1 जनवरी 2017 से देय होगा और इसका एरियर का भुगतान तीन किश्तों में होगा। हालांकि इसके लिए कर्मचारियों को अभी भी पांच माह का इंतजार करना होगा।

ऐसा होगा एरियर का भुगतान
पहली किश्त-1 अप्रेल 2018
दूसरी किश्त-1 जुलाई 2018
तीसरी किश्त-1 अक्टूबर 2018

न्यूनतम वेतन 17700
मंत्री ने दावा किया कि पहले न्यूनतम वेतन 6,900 रुपए प्रति माह था, जो अब 17700 रुपए हो गया है। इसके अलावा मकान किराए भत्ते में सौ फीसदी से अधिक वृद्धि की गई है।

भत्तों में संशोधन रिपोर्ट के बाद डीबी गुप्ता ने बताया कि विभिन्न भत्तों को लेकर सामंत कमेटी की रिपोर्ट आनी बाकी है। इसके अलावा करीब 150 से 200 वर्ग की विसंगति भी मिली है। एक-एक पर सुनवाई हो रही है।

गैर वाजिब मांगें नहीं मानेंगे
शेखावत मंत्री राजपाल सिंह ने साफ कहा कि कर्मचारियों के आंदोलन से सरकार सहानभूति रखती है। उनकी वाजिब मांगों को माना जाएगा, लेकिन गैर वाजिब मांगों का निराकरण नहीं होगा।

आरटीआई के लिए मांगे 60 हजार रुपए, आवेदक ने कहा-बैंक से लोन दिलाओ

कोटा। एकआरटीआई आवेदन ने इन दिनों जेकेलोन अस्पताल प्रशासन को हिला रखा है। असल में सुभाष नगर निवासी जगदीश प्रसाद नायक ने इसी साल अप्रैल में एक आरटीआई के तहत अस्पताल भामाशाह योजना के तहत किए गए इलाज मरीजों की जांच का पूरा रिकॉर्ड मांगा था।

अस्पताल प्रशासन ने कई माह की मेहनत के बाद स्पष्ट किया कि इस रिकॉर्ड की 25 से 30 हजार प्रतियां हैं।
जगदीश बीपीएल श्रेणी से हैं, उन्होंने अपने आवेदन के साथ बीपीएल कार्ड भी लगा रखा था। आरटीआई एक्ट के तहत बीपीएल कार्ड धारक को कोई भी सूचना निशुल्क देने का प्रावधान है।

हमारे पास इतनी स्टेशनरी ही नहीं 
हमारे पास इतनी स्टेशनरी ही नहीं है कि सूचना फ्री उपलब्ध करा दें। अस्पताल की सभी जेरोक्स मशीनें पूरे समय इसी काम में लगा दें तो भी फोटोकॉपी होने में कई माह लग जाएंगे। मुझे नहीं पता कि हमारे यहां से आवेदक को क्या लेटर दिया गया है, क्योंकि मैं कुछ दिन से बाहर था। एक बार मैं पता करूंगा, फिर कुछ बता पाऊंगा।
-डॉ. आरके गुलाटी, अधीक्षक, जेकेलोन अस्पताल

लेकिन, इसके उलट अस्पताल प्रशासन ने जगदीश को हाल ही में एक पत्र भेज दिया और कहा कि उक्त प्रतियों के 2 रुपए प्रति कॉपी के हिसाब से 60 हजार रुपए जमा कराकर सूचना प्राप्त कर लें।

अब इस लेटर के साथ जगदीश ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया है और अनुरोध किया है कि उसे किसी भी सरकारी बैंक से लोन दिलाया जाए, ताकि वह यह सूचना प्राप्त कर सकें। साथ ही यह भी कहा है कि बीपीएल कार्ड धारक होने के बावजूद उससे वांछित सूचना के लिए पैसा मांगा जा रहा है, जो कानून का खुला उल्लंघन है।

सलिल एस. पारेख इंफोसिस के नए सीईओ, 5 साल तक संभालेंगे कमान

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नई दिल्ली । आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में शुमार इंफोसिस को नया सीईओ मिल गया है। सलिल एस पारेख को इंफोसिस का नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त कर दिया गया है। सलिल सिर्फ सीईओ ही नहीं होंगे बल्कि वो कंपनी में मैनेजिंग डॉयरेक्टर का पद भी संभालेंगे। उनके पास ये दोनों पद अगले पांच सालों तक रहेंगे।

हालांकि पारेख की यह नियुक्ति 2 जनवरी 2018 से ही प्रभावी होगी। आपको बता दें कि सिक्का के इस्तीफा दे देने के बाद यूबी प्रवीण राव को बतौर अंतरिम सीईओ और एमडी नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल 2 जनवरी 2018 को खत्म हो रहा है। इनका कार्यकाल खत्म होते ही पारेख यह जिम्मेदारी संभाल लेंगे।

इंफोसिस ने अपनी नियामकीय फाइलिंग (स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग) में यह जानकारी दी है कि यह नियुक्ति उस समिति के नामांकन और सिफारिश के आधार पर की गई है जिसका गठन नए सीईओ की तलाश करने के लिए किया गया था। आपको बता दें कि इस समिति का गठन नंदन नीलेकणि के इंफोसिस प्रमुख बनने के बाद किया गया था।

पारेख की नियुक्ति पर क्या बोले नीलेकणि: पारेख की नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए इन्फोसिस बोर्ड के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा कि सलिल को सीईओ एवं एमडी के रूप में चुनते हुए कंपनी को खुशी हो रही है। कंपनी बोर्ड का मानना है कि पारेख उद्योग में इस परिवर्तनशील समय में इंफोसिस का नेतृत्व करने के लिहाज से एक उचित व्यक्ति हैं।

आपको बता दें कि नीलेकणि आन से पहले इंफोसिस कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रही थी। पारेख के पास कितना अनुभव: पारेख में आईटी उद्योग में तीन दशकों से अधिक काम करने का अंतर्राष्ट्रीय अनुभव हैं। इसके अलावा व्यापार के बेहतर संचालन और अधिग्रहण के सफल प्रबंधन का भी उनके पास एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है।

पारेख फ्रांसीसी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी कैपजेमिनी में समूह कार्यकारी बोर्ड के सदस्य थे। वो साल 2000 में कैपजेमिनी से जुड़े थे। उन्होंने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है। साथ ही उनके पास भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री भी है।

सोना 250 रुपए महंगा, अब कितने का हो गया 10 ग्राम गोल्ड

नई दिल्ली/कोटा । लगातार दो दिन की गिरावट के बाद सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने के लिए मिला है। शनिवार के कारोबार में दिल्ली में सोने के बाजार में सोने का मूल्य 250 रुपये का उछाल 30,500 रुपये प्रति 10 ग्राम स्तर पर आ गया है।

सोने की कीमत में इस उछाल का कारण मजबूत वैश्विक संकेत और घरेलू हाजरी बाजार में स्थानीय आभूषण निर्माता से भी तेज खरीदारी हो रही है। सोने की कीमतें निश्चित रूप से उछाल आया लेकिन चांदी के मूल्य में गिरावट जारी है शनिवार के कारोबार में चांदी में 50 रुपये की गिरावट देखने के लिए मिला।

इस गिरावट के साथ चांदी 39,150 रुपये प्रति किलोग्राम स्तर पर आ गई है। इस गिरावट के कारण औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से कमजोर उठन हो रही है। बुलियन व्यापारियों ने विदेशी बाजारों में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया है।

क्योंकि डॉलर में कमजोरी ने सोने की मांग को सुरक्षित रखने पर निवेशकों को मजबूर किया है। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना 0.39 फीसद की उछाल के साथ 1,279.60 औंस प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ है। व्यापारियों ने कहा कि इसके अलावा मौजूदा शादी के मौसम की मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय जौहरी की खरीदारी में वृद्धि के कारण कीमतों में वृद्धि हुई है।

वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता सोना 250 रुपए की गिरावट के साथ 30,500 और 30,350 रुपए प्रति 10 ग्राम स्तर पर पहुंचे। बीते दो दिनों के दौरान सोना की कीमतें 270 रुपये की गिरावट देखी गई थी। गिनी के भाव, हालांकि, 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम स्तर पर बकातर हो रहे हैं।

कोटा सराफा
चांदी 39000 प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 30300 रुपए प्रति 10 ग्राम,  सोना 35340 रुपए प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30450 रुपए प्रति 10 ग्राम, सोना  35520  रुपए प्रति तोला।

जीएसटी दरों में सुधार से उद्योग ने दिखाई साल की सर्वाधिक तेजी

नई दिल्ली। देश के विनिर्माण क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में नवंबर माह में गत 13 महीने का सर्वाधिक सुधार दर्ज किया गया है। इस दौरान मजबूत मांग की परिस्थितियों और जीएसटी दरों में सुधार की बदौलत नए ठेकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह बात शुक्रवार को एक मासिक सर्वेक्षण में कही गई है।

निक्केई इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) की रीडिंग नवंबर में 52.6 दर्ज की गई है, जो अक्तूबर में 50.3 पर थी। इससे देश के विनिर्माण क्षेत्र में संचालन परिस्थितियों में अत्यधिक सुधार होने का पता चलता है।

लगातार चौथे माह इस सूचकांक की रीडिंग 50 से ऊपर दर्ज की गई है। रीडिंग के 50 से ऊपर रहने का मतलब क्षेत्र में विस्तार और इसके 50 से नीचे रहने का मतलब क्षेत्र में संकुचन होना है।

आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री और सर्वेक्षण रिपोर्ट की लेखिका आशना डोढिया ने कहा कि रिपोर्टों के मुताबिक जीएसटी दर में कटौती और मजबूत मांग परिस्थितियों के कारण उत्पादन और नए ठेकों में अक्तूबर 2016 के बाद सर्वाधिक तेज वृद्धि दर्ज की गई।

पीएमआई की ताजा रीडिंग हालांकि मार्च 2005 में सर्वेक्षण की शुरुआत से लेकर अब तक की औसत रीडिंग के मुकाबले कम है। सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक उत्पादन में तेज वृद्धि के चलते रोजगार सृजन की रफ्तार सितंबर 2012 के बाद सर्वाधिक रही।

साथ ही भारतीय वस्तुओं के लिए विदेशों में मांग बढ़ने के चलते निर्यात वृद्धि दर भी गत तीन महीने पहली बार बढ़ी है। कीमत के मोर्चे पर इनपुट लागत की महंगाई दर अप्रैल के बाद सर्वाधिक तेजी से बढ़ी, लेकिन कंपनियां लागत वृद्धि का बोझ अपने ग्राहकों पर डालने में असफल रहीं।

भारतीय अर्थव्यवस्था 2030 तक 10,000 अरब डॉलर की होगी : मुकेश अंबानी

नई दिल्‍ली। भारतीय अर्थव्यवस्था अगले सात साल यानी 2024 तक दोगुनी होकर 5,000 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगी और 2030 तक यह 10,000 अरब डॉलर की होगी। देश के सबसे अमीर व्‍यक्ति रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आज यह बात कही।

अंबानी ने यहां एचटी लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के मध्य तक भारतीय अर्थव्यवस्था चीन को पीछे छोड़ देगी।  अंबानी ने कहा कि उन्होंने 2004 में भविष्यवाणी की थी कि 20 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था 5,000 अरब डॉलर पर पहुंचेगी। उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था 500 अरब डॉलर की थी।

अंबानी ने कहा कि उस समय लगाया गया अनुमान अब भी कायम है। वास्तव में 2024 से पहले यह लक्ष्य हासिल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले दस साल में भारतीय अर्थव्यवस्था तिगुनी होकर 7,000 अरब डॉलर की होगी और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा।

अंबानी ने उम्मीद जताई कि भारत इस सदी में अमेरिका और चीन से अधिक समृद्ध हो सकता है। वर्ष 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था 10,000 अरब डॉलर के आंकड़े को छू जाएगी। उन्होंने कहा, 21वीं सदी के मध्य तक भारत की बढ़ोतरी चीन से आगे होगी। यह दुनिया के लिए अधिक आकर्षक होगा।

अंबानी ने कहा कि भारत एक बेहतर और अलग तरीके का विकास मॉडल उपलब्ध कराएगा जिससे समान और समावेशी वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। यह वृद्धि प्रौद्योगिकी, लोकतंत्र बेहतर संचालन और समाज आधारित संस्कृति से हासिल होगी।

वैश्विक आर्थिक नेतृत्व करेगा भारत विषय पर अपने संबोधन में अंबानी ने कहा कि पहली औद्योगिक क्रांति में कोयला और ताप वाली बिजली के जरिये गतिविधियों को आगे बढ़ाया गया। दूसरी में थोक उत्पादन के लिए बिजली और तेल का इस्तेमाल और तीसरी में उत्पादकता तथा ऑटोमेशन के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अंबानी ने कहा कि पहली दो औद्योगिक क्रांतियों में भारत किनारे पर रहा, लेकिन कंप्यूटर आधारित तीसरी क्रांति में यह तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, चौथी औद्योगिक क्रांति अब हमारे ऊपर निर्भर है। इस क्रांति का आधार कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग, डेटा और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस है।

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भारत चौथी क्रांति में न केवल भागीदारी करेगा, बल्कि उसके पास इसका अगुवा बनने का भी मौका होगा। अंबानी ने भारत की ताकत का उल्लेख करते हुए एक रॉकेट से 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने का उदाहरण दिया।

उन्होंने आधार को दुनिया की सबसे बड़ी बायोमीट्रिक आईडी प्रणाली बताया। रिलायंस के बारे में अंबानी ने कहा कि पांच साल पहले जब ज्यादातर कंपनियां देश से बाहर निवेश कर रही थीं, उस समय हमने भारत में 60 अरब डॉलर के निवेश का फैसला किया था। उन्होंने कहा, हमने इस निवेश चक्र को लगभग पूरा कर लिया है।

हम अगले निवेश चक्र में और अधिक निवेश की प्रतिबद्धता जताएंगे। हालांकि उन्होंने इसका ब्योरा नहीं दिया। विदेशी निवेशकों को संदेश देते हुए अंबानी ने कहा कि भारत के उत्थान का हिस्सा बनें, भारत में निवेश करें। भारत में कमाएं, आगे बढ़ें। भारत के साथ भागीदारी करें और भारत के साथ समृद्ध बनें।

ऐपल का सस्ता आईपैड 2018 में सम्भव

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नई दिल्ली। प्रीमियम प्रॉडक्ट्स के लिए मशहूर कंपनी ऐपल ने इसी साल अपना सबसे महंगा स्मार्टफोन लॉन्च किया। अब कंपनी अगले साल 9.7 इंच वाले आईपैड मॉडल का सबसे सस्ता वैरियंट लॉन्च करने की तैयारी में है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पिछली साल लॉन्च किए गए 9.7 इंच आईपैड का सस्ता वैरियंट अगले साल लॉन्च किया जाएगा। बता दें कि इस आईपैड को ऐपल ने 28,000 रुपए की कीमत में लॉन्च किया था।

ऐपल को टैबलट सेगमेंट में पिछले तीन वर्षों से सेल्स में गिरावट फेस करनी पड़ी है। ऐसे में कंपनी सेल्स को बूस्ट करने के लिए कम कीमत में ज्यादा आॅडियंस को लुभाने की कोशिश करेगी। हालांकि, अभी नए आईपैड से जुड़ी कोई जानकारी कंपनी ने सार्वजनिक नहीं की है लेकिन ऐसी उम्मीद है कि मौजूदा आईपैड मॉडल से यह कुछ कम पावरफुल हो सकता है।

ऐपल ने इसी साल लॉन्च किए गए 9.7 इंच आईपैड वाईफाई वर्जन के 32जीबी वैरियंट की कीमत 28,000 रुपए रखी है। जबकि इसका 128 जीबी वैरियंट 35,700 रुपए के प्राइस पर बेचा जा रहा है। इसके सेल्युलर वर्जन की बात करें तो 9.7 इंच आईपैड की कीमत 38,600 रुपए और 128 जीबी वैरियंट की कीमत 46,300 रुपए है।

इस आईपैड में ऐपल ने ऐल्युमिनियम बॉडी दी है। इसमें ए9 चिपसेट दिया गया है। 8 मेगापिक्सल रियर आॅटोफोकस कैमरे वाले इस आईपैड का कैमरा फुल एचडी रेजॉल्यूशन विडियोज रेकॉर्ड कर सकता है। इसमें 32.4Wh की नॉन रिमूवेबल बैटी दी गई है जो कि नॉर्मली 10 घंटे की वेब सर्फिंग की सुविधा देती है।

बिटकॉइन को मान्यता देने से वित्त मंत्री का इनकार

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को एक बार फिर वर्चुअल करंसी बिटकॉइन को मान्यता देने से इनकार किया। जेटली का कहना है कि फिलहाल बिटकॉइन को मान्यता देने का सरकार का इरादा नहीं है। इस पर बनाई गई कमिटी की रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है जिसके बाद जल्द फैसला लिया जाएगा।

गौरतलब है कि बिटकॉइन पर बनाई गई वित्त मंत्रालय के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव दिनेश शर्मा कमिटी ने रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लेने के लिए वित्त मंत्री की अगुआई में मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था और इस मामले में गृह सचिव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष की बैठक हुई है।

इस पर बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करंसी पर पाबंदी लगाने पर समिति में सहमति नहीं बनी थी। ऐसा मानना है कि अचानक पाबंदी लगाने से बड़े नुकसान की आशंका है। मान्यता नहीं मिलने के बावजूद दिल्ली में इसका कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी में बिटकॉइन में ट्रेडिंग का प्लैटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए तमाम दुकानें खुल गई हैं।

दिल्ली में बिटकॉइन से कितना कारोबार हो रहा है, इसका सटीक अंदाजा तो मुश्किल है लेकिन अब यह लाखों के बजाय करोड़ों तक पहुंच गया है। डिजिटल करंसी बिटकॉइन ने इन दिनों में दुनिया में धमाल मचा रखा है। गुरुवार को ही एक बिटकॉइन की वैल्यू 11,395 डॉलर यानी करीब 7 लाख 35 हजार रुपये तक पहुंच गई।

हालांकि इसके बाद इसमें गिरावट आई है। पिछले एक साल में इसमें करीब 900 फीसदी का उछाल आया है। करंसी मार्केट के एक्सपर्ट संतोष के. मल्होत्रा का कहना है कि बिटकॉइन से बिना अपनी पहचान बताए लेनदेन किया जा सकता है। इसीलिए ये कुछ लोगों को पसंद आ रहा है लेकिन ये काफी रिस्की है।

मार्केट एक्सपर्ट सुशील अग्रवाल के मुताबिक, बिटकॉइन से सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि यह अनरेग्युलेटेड करंसी है। इसमें अकाउंट हैक होने का खतरा भी रहता है। यूजर अपना पासवर्ड भूल जाए तो उसे दोबारा नहीं मिलता। बिटकॉइन की कीमत में भारी उतार-चढ़ाव होते हैं, इसलिए इसके इस्तेमाल में समझदारी बरतनी चाहिए।