Tuesday, July 14, 2026
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अनुष्का-विराट मुंबई में आज होने वाले वेडिंग रिसेप्शन के लिए होटल पहुंचे

मुंबई। एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा और इंडियन क्रिकेट टीम के कैप्टन विराट कोहली शादी के पवित्र बंधन में बंध चुके हैं। दिल्ली में रिसेप्शन के बाद अब वेडिंग रिसेप्शन मंगलवार रात को मुंबई की पांच सितारा होटल में होना है। इसके लिए अनुष्का-विराट हाल ही में होटल पहुंचे। 

अनुष्का-विराट का वेडिंग रिसेप्शन आज मुंबई में है जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी। साथ ही बॉलीवुड के सितारे भी मौजूद रहेंगे। ख़बर है कि, अनुष्का और विराट हाल ही में होटल पहुंच चुके हैं जहां पर रिसेप्शन कार्यक्रम होना है। तस्वीर में आप देख पाएंगे कि, अनुष्का शर्मा ब्लू ड्रेसअप में नज़र आ रही हैं।

वहीं विराट कोहली काले रंग की टी शर्ट और पैंट पहने नज़र आये। इस मौके पर दोनों ने भी चश्मा लगा रखा है और अनुष्का शर्मा ने हाथ में चूड़ियां पहन रखी हैं। यह इस जोड़े की दूसरा रिसेप्शन है। इसके पहले इन दोनों का पहला रिसेप्शन दिल्ली में हुआ था, जहां दोनों को आशीर्वाद देने खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे।

मुंबई में रिसेप्शन बॉलीवुड और कॉर्पोरेट जगत के लोगों के लिए आयोजित किया गया है। गौरतलब है कि अनुष्का शर्मा बॉलीवुड की बड़ी अभिनेत्री हैं और उन्होंने सलमान खान, शाहरुख़ खान, आमिर खान और रणबीर कपूर जैसे अभिनेताओं के साथ काम किया है। अनुष्का और विराट ने इटली जाकर शादी की थी। 

राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर, आसान नहीं है वसुंधरा राजे की राह

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-दिनेश माहेश्वरी
कोटा। गुजरात में हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों के परिणाम वसुंधरा राजे की अगुआई वाली राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। राजे सरकार जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर और भरोसे के संकट का सामना कर रही है।

राज्य में पार्टी के नेताओं ने गुजरात में आसान जीत की उम्मीद की थी जिससे राजस्थान में अगले वर्ष नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उनकी राह आसान हो जाती। लेकिन गुजरात में मिली करीबी जीत से उनके हाथपांव फूल गए हैं। भाजपा के नेता मानते हैं कि गुजरात की तुलना में राजस्थान में कांग्रेस मजबूत विपक्ष है। पिछले दो साल में उसने राजे सरकार की नाक में दम कर रखा है।

भाजपा के वरिष्ठï नेता राजस्थान की ऐतिहासिक प्रवृत्ति से भी चिंतित हैं। राज्य में कम से कम पिछले दो दशक से किसी भी पार्टी ने लगातार दो चुनाव नहीं जीते हैं। राजनीतिक नेताओं और विश्लेषकों का कहना है कि राजे की जीत तीन कारकों पर निर्भर करेगी। पहला कारक यह होगा कि अगले 6 महीनों में उनकी क्या रणनीति होगी।

सूत्रों का कहना है कि राजे पहले ही चुनाव की मुद्रा में आ गई हैं और उन गलतियों को नहीं दोहराना चाहती हैं जो उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल (2003 से 2008) में की थी। 2008 के चुनावों में कांग्रेस ने 200 में से 96 और भाजपा ने 78 सीटें जीती थीं। 2013 में मोदी की लहर पर सवार भाजपा ने 163 सीटें हासिल की जबकि कांग्रेस के खाते में मात्र 21 सीटें ही आईं।

राजे के करीबी पार्टी के एक शीर्ष नेता ने कहा, ‘हम थोड़ा आत्मसंतुष्ट हो गए थे, वर्ना हम 2008 में भी चुनाव जीत जाते। इस बार हम कोई कसर नहीं छोडऩा चाहते हैं।’ अलबत्ता भाजपा नेताओं का मानना है कि राजस्थान में उनके सामने कड़ी चुनौती है। भाजपा नेता ने कहा, ‘राजस्थान में पार्टी की जीत आसान नहीं होगी।’ क्योंकि डॉक्टर्स हड़ताल और राज्य कर्मचारियों का असंतोष भी राजे सरकार के लिए खतरे की घंटी है। 

पार्टी की इन आशंकाओं की वजह यह है कि राजे सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर है। किसानों सहित अधिकांश वर्ग सरकार से नाराज हैं। किसान चाहते थे कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की भाजपा सरकारों की तर्ज पर राजस्थान सरकार को भी उनका ऋण माफ करना चाहिए लेकिन उसने इस पर चुप्पी साध रखी है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी से उपजी समस्याओं के कारण व्यापारी और दुकानदार भी सरकार से नाराज चल रहे हैं।

 
अलबत्ता राजे सरकार का मानना है कि सामाजिक कल्याण योजनाओं और सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा योजना के दम पर वह सत्ता में वापसी करेगी। इन योजनाओं में भामाशाह योजना भी शामिल है जिसका मकसद गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों (बीपीएल) की महिलाओं का सशक्तीकरण करना है।

लेकिन भाजपा की सत्ता में वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि राजे अपने अंतिम बजट में क्या घोषणा करती हैं। राज्य की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो साफ है कि सरकार के पास रेवडिय़ां बांटने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। वर्ष 2016-17 में राज्य सरकार का सार्वजनिक ऋण (बिजली कंपनियों के लिए उदय योजना के बिना) 25,290 करोड़ रुपये था। 

वर्ष 2015-16 में यह 23,478 करोड़ रुपये था। अगर उदय योजना को भी मिला लिया जाए तो राज्य सरकार का सार्वजनिक ऋण 2016-17 में 47,663 करोड़ रुपये था। उदय योजना के तहत राज्य सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों का कर्ज अपने ऊपर ले लिया था।

भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘राजे सरकार को विरासत में कांग्रेस से भारी कर्ज मिला था और इससे निपटने के लिए उसे अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इस समय रेवडिय़ों की घोषणा करना वित्तीय रूप से सही नहीं है लेकिन सरकार और पार्टी में एक वर्ग का मानना है कि मतदाताओं को रिझाने के लिए बजट में लोकलुभावन घोषणा करना बुद्घिमानी होगी।

अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह केवल कर्ज बढ़ाएगी।’ राजे ने अपनी रणनीति का खुलासा नहीं किया है और वह अपने पत्ते फेंकने के लिए सही समय का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने मतदाताओं का मन टटोलने के लिए राज्य का दौरा शुरू कर दिया है। राजे सरकार की सफलता में दूसरा कारक नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की लोकप्रियता है।

भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘अगर मोदी सरकार केंद्र में मजबूत बनी रहती है तो हम आधी लड़ाई जीत जाएंगे।’ अगर मोदी गुजरात की तरह राजस्थान में भी व्यापक प्रचार करते हैं तो वह राजे सरकार के लिए समर्थन जुटा सकते हैं। लेकिन मोदी के दिल्ली में ही व्यस्त रहने की संभावना है क्योंकि उन्हें 2019 के आम चुनावों की तैयारी करनी है।

तीसरा कारक भाजपा और कांग्रेस का आंतरिक कलह होगा। राजे को पार्टी के भीतर अपने विरोध को दूर करने की जरूरत है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से करीबी रखने वाले कुछ विधायकों ने खुलमखुल्ला राजे का विरोध किया है। हालांकि राजे ने दिल्ली में पार्टी आलाकमान के साथ अच्छे संबंध बनाने में सफलता पाई है लेकिन फिर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए उन्हें मशक्कत करनी पड़ेगी।

भाजपा की सफलता कांग्रेस के आंतरिक कलह पर भी निर्भर करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर कांग्रेस अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करती है तो भाजपा के लिए मुश्किल होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि गहलोत को सभी जातियों में लोकप्रिय माना जाता है।

मामूली बढ़त के बाबजूद सेंसेक्स एवं निफ़्टी सर्वोच्च स्तर पर बंद

नई दिल्ली। मंगलवार को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा और अंत में यह मामूली बढ़त के साथ सर्वोच्च स्तर पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्स में 70.31 अंक की बढ़ोतरी हुई और यह 0.21 प्रतिशत बढ़कर 34,010.61 के स्तर पर बंद हुआ।

वहीं, नैशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) में भी इसी तरह का रूख रहा और यह 38.50 अंक या 0.37 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 10,531.50 के सर्वोच्च स्‍तर पर बंद हुआ।

तीन दिन बाद खुला शेयर बाजार, बढ़त से हुआ आगाज
इससे पहले शुक्रवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में तेजी का रुख रहा और सेंसेक्स तब तक के अपने सर्वोच्च स्तर पर बंद हुआ था। शुक्रवार को सेंसेक्स में 184.02 अंकों की बढ़ोतरी हुई और यह 0.55 प्रतिशत बढ़कर 33,940.30 पर बंद हुआ था।

वहीं नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी ने भी शुक्रवार को 10,500 के स्तर को पार कर सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ था और अंत में 52.70 अंक अर्थात 0.50 प्रतिशत बढ़कर 10,493.00 पर बंद हुआ था। 

कच्चा तेल 31 माह के सर्वोच्च स्तर पर, कीमतें 65 डॉलर/बैरल के पार

सिंगापुर। तेल कीमतों का वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स मंगलवार को 65.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने के साथ ही 31 माह के सर्वोच्च स्तर के करीब पहुंच गया। इसका जून 2015 के बाद से अब तक का सर्वोच्च स्तर 12 दिसंबर को था जब यह 65.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।

तेल निर्यातक देशों के प्रमुख संगठन ओपेक और रूस द्वारा उत्पादन में कमी करने का फैसला इसका एक प्रमुख कारण है। वर्ष 2017 के मध्य से कच्चे तेल के दाम 47 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। विश्व के सबसे बड़े तेल उत्पातकों में शामिल ओपेक (तेल निर्यातक देशों का प्रमुख संगठन), मध्य-पूर्वी तेल उत्पादक संघ और रूस ने बाजार में तरलता कम करने और कीमतों को बढ़ाने के उद्देश्य से तेल उत्पादन रोक दिया है।

तेल उत्पादन में कमी का यह समझौता जनवरी 2017 में हुआ था और यह 2018 दिसंबर तक चलेगा। तेल उत्पादन पर रोक का एक कारण वैश्विक मांग में बढ़ोतरी करना भी है। इससे वर्ष 2019 तक कच्चे तेल की वैश्विक मांग 10 करोड़ बैरल प्रति दिन के रिकॉर्ड स्तर को भी छू सकती है। 

आईओसी और बीपीसीएल गेल को खरीदने की इच्छुक

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नई दिल्ली। इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) दोनों गेल को खरीदना चाहती हैं ताकि वे फुली इंटीग्रेटेड एनर्जी कंपनी बन सकें। दोनों कंपनियों ने पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को अलग-अलग रेप्रजेंटेशन में गेल में अपनी दिलचस्पी का संकेत दिया है। गेल के पास नैचरल गैस ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग बिजनस है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस वजह से बीपीसीएल और आईओसी इसे एक्वायर करने में इंट्रेस्ट ले रही हैं।

हालांकि, गेल का मानना है कि अगर उसका मर्जर ऑइल और गैस उत्पादन कंपनी ओएनजीसी के साथ होता है तो यह उसके लिए कहीं अच्छा होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के बजट भाषण में कहा था कि सरकार ऑइल सेक्टर की कंपनियों का मर्जर करके बड़ी कंपनियां बनाना चाहती है।

उन्होंने कहा था कि ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय और प्राइवेट सेक्टर की भारतीय कंपनियों के परफॉर्मेंस को मैच कर पाएंगी। ओएनजीसी देश की सबसे बड़ी ऑइल और गैस प्रड्यूसर है। उसने ऑयल रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनी एचपीसीएल को खरीदने का प्रस्ताव रखा है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।

वह अभी एचपीसीएल में सरकार की 51.11 पर्सेंट हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया से गुजर रही है। एचपीसीएल के मौजूदा वैल्यूएशन पर यह सौदा 33,000 करोड़ रुपये का होगा। सूत्रों ने बताया कि आईओसी और बीपीसीएल को इंटीग्रेशन के लिए अलग ऑप्शन दिए गए हैं।

गेल में सरकार की हिस्सेदारी 54.89 पर्सेंट है, जिसकी वैल्यू 46,700 करोड़ रुपये है। सूत्रों ने बताया कि ओएनजीसी-एचपीसीएल का मर्जर पूरा होने के बाद दूसरे कंपनियों के इंटीग्रेशन ऑप्शन पर विचार किया जाएगा। आईओसी देश की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनिंग और फ्यूल मार्केटिंग कंपनी है।

वह या तो किसी रिफाइनिंग कंपनी या गेल जैसी गैस कंपनी को खरीदना चाहती है। उसका मानना है कि अभी कंपनी को एलएनजी टर्मिनल बना रही है, उसके पास सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्रॉजेक्ट्स और गैस मार्केटिंग बिजनस है।

वहीं, गेल देश की सबसे बड़ी गैस ट्रांसपोर्टर है। ऐसे में अगर वह गेल को खरीदती है तो यह उसके लिए फायदेमंद होगा। दूसरी तरफ, बीपीसीएल भी नैचरल गैस बिजनस बढ़ाना चाहती है। उसने ऑइल मिनिस्ट्री को लिखा है कि ऐक्विजिशन के लिए उसकी पहली पसंद गेल है। उसने ऑइल इंडिया लिमिटेड (ऑयल) को नंबर दो चॉइस बताया है।

ऑयल देश की दूसरी सबसे बड़ी एक्सप्लोरेशन कंपनी है। सरकार के पास ऑयल में 66.13 पर्सेंट हिस्सेदारी है। मौजूदा वैल्यूएशन पर इसकी वैल्यू 18,000 करोड़ रुपये है। उधर, गेल को लगता है कि ओएनजीसी के साथ मर्जर उसके लिए अधिक फायदेमंद होगा। सूत्रों ने बताया कि दूसरी सरकारी कंपनियों ने जो प्रस्ताव भेजे हैं, उनके बारे में सरकार ने कोई फैसला नहीं किया है।

2018 में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा भारतः रिपोर्ट

लंदन। भारत अगले साल ही ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। सेंटर फॉर इकनॉमिक ऐंड बिजनस रिसर्च (Cebr) कंसल्टंसी के 2018 वर्ल्ड इकनॉमिक लीग टेबल में ऊर्जा एवं तकनीक के सस्ते साधनों की बदौलत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि का अनुमान जताया गया है।

भारत भी इसी ट्रेंड पर आगे बढ़ रहा है। इससे अगले 15 सालों तक टॉप 10 सबसे बड़ी इकॉनमीज में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का दबदबा बढ़ता रहेगा।

Cebr के डेप्युटी चेयरमैन डगलस मैकविलियम्स ने कहा, ‘तात्कालिक झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 2018 में फ्रांस और यूके से आगे निकल जाएगी और डॉलर के मामले में दोनों को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी।’

मैकविलियम्स ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से भारत के विकास की गति थोड़ी मंद पड़ी। इससे पहले रॉयटर्स के पोल में भी अर्थशास्त्रियों ने यही राय जाहिर की थी। Cebr ने कहा, ‘चीन 2032 में अमेरिका को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी बन सकता है।’

रिपोर्ट कहती है, ‘व्यापारिक गतिविधियों पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का उतना गहरा असर नहीं पड़ा जितनी आशंका थी। इसलिए अमेरिका हमारे पिछली रिपोर्ट के अनुमानों से एक साल ज्यादा तक दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी का खिताब कायम रख सकता है।’

हालांकि कुछ सालों से ब्रिटेन फ्रांस से पिछड़ता जान पड़ रहा है, लेकिन Cebr का अनुमान है कि ब्रिटेन पर ब्रेग्जिट का असर आशंका से कम होगा। इससे पता चलता है कि 2020 तक यह फ्रांस को फिर से पछाड़ देगा।

रिपोर्ट में कच्चे तेल की गिरती कीमतों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ने का डर है जो अपनी वृद्धि के लिए एनर्जी सेक्टर पर बहुत हद तक निर्भर है।

रूस 2032 तक 11वें स्थान से गिरकर 17वें स्थान पर आ सकता है। अक्टूबर महीने में रॉयटर्स ने अर्थशास्त्रियों की राय जानी थी जिसमें 2018 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूदा 3.5 प्रतिशत के मुकाबले 3.6 प्रतिशत की मामूली बढ़त का संकेत मिला था।

दूसरी बार गुजरात के CM बने रूपाणी: पटेल-पाटीदार कम्युनिटी से 8 मंत्री

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गांधीनगर। गुजरात में लगातार छठवीं बार विधानसभा चुनाव जीतने वाली बीजेपी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार को हुआ। विजय रूपाणी (61) ने दूसरी बार सीएम और नितिन पटेल ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। पटेल-पाटीदार कम्युनिटी से 8 मंत्री बनाए गए।

इस बार दोपहर 12.39 की बजाय सुबह 11.30 बजे शपथ ग्रहण हुआ। किसी राज्य की सरकार के शपथ ग्रहण में पहली बार 18 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। प्रोग्राम में शामिल होने से पहले नरेंद्र मोदी ने रोड शो भी किया। पार्टी प्रेसिडेंट अमित शाह के अलावा कई केंद्रीय मंत्री, साधु-संत और 4 हजार वीवीआईपी भी मौजूद रहे।

कुल कितने मंत्रियों ने शपथ ली?
– गुजरात में लगातार छठी बार चुनकर आई बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में सीएम रूपाणी (61) और डिप्टी सीएम नितिन पटेल समेत 20 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें एक महिला मंत्री हैं। रूपाणी से इतर 19 मंत्रियों में 9 कैबिनेट रैंक और 10 मिनिस्टर ऑफ स्टेट रैंक के हैं। दक्षिण गुजरात से 5 और कच्छ-सौराष्ट्र से 7 मंत्री बनाए गए। कैबिनेट मंत्रियों में पांच पटेल मंत्री हैं।

– आनंदीबेन पटेल के हटने के बाद 2016 में जब रूपाणी पहली बार सीएम बने थे तो उनके मंत्रिमंडल में 25 मंत्री थे। उस वक्त 9 मंत्रियों की छुट्टी की गई थी।

क्या है नए मंत्रिमंडल का कास्ट फैक्टर?
1) पटेल-पाटीदार कम्युनिटी से 8 मंत्री
रूपाणी की नई टीम में पटेल-पाटीदार कम्युनिटी से चुनकर आए 8 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। ये आठ नाम हैं- नितिन पटेल, आरसी फलदू, सौरभ पटेल, कौशिक पटेल, जयेश रादड़िया, परबतभाई पटेल, ईश्वर सिंह पटेल और किशोर कनानी। बता दें कि गुजरात में पटेल-पाटीदार वोटर 20% हैं।

2) ओबीसी से 5 मंत्री
ओबीसी कम्युनिटी से चुनकर आए पांच विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। इनके नाम हैं- दिलीप ठाकोर, बचुभाई खाबड़, जयद्रथ सिंह परमार, वासनभाई अहीर और पुरुषोत्तम भाई सोलंकी।

3) राजपूत कम्युनिटी से 2 मंत्री
भूपेंद्र सिंह चूडास्मा और प्रदीप जाडेजा राजपूत कम्युनिटी से आते हैं। इन्हें भी मंत्री बनाया गया है।

4) दलित-आदिवासी कम्युनिटी से 3 मिनिस्टर
– आदिवासी कम्युनिटी से आने वाले गणपत भाई वासवा और रमणलाल पाटकर को रूपाणी की टीम में जगह दी गई है। वहीं, दलित कम्युनिटी से मंत्री बनने वाले इकलौते नेता हैं ईश्वर भाई परमार।

5) सवर्ण कम्युनिटी से इकलौती महिला मंत्री
– विभावरी दवे को भी रूपाणी की टीम में जगह दी गई। रूपाणी खुद जैन कम्युनिटी से आते हैं। रूपाणी की बाकी टीम में माइनॉरिटी कम्युनिटी से कोई मंत्री नहीं है।

फ्लिपकार्ट पर बिक रहे बड़े ब्रैंड के नकली जूते, कोर्ट में मुकदमा

मुंबई। अमेरिका के लाइफस्टाइल और फुटवेयर ब्रैंड स्केचर्स ने ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस फ्लिपकार्ट और उसके प्लैटफॉर्म पर सामान बेचने वाले चार वेंडर्स के खिलाफ कथित तौर पर नकली सामान बेचने के लिए मुकदमा किया है। भारत में ऑनलाइन मार्केटप्लेस के बढ़ने के बाद इस तरह की काफी शिकायतें मिल रही हैं।

कोर्ट की तरफ से नियुक्त लोकल कमिश्नरों की मदद से स्केचर्स ने दिल्ली और अहमदाबाद में सात गोदामों पर नकली सामान पकड़ने के लिए छापे मारे। ये छापे रीटेल नेट, टेक कनेक्ट, यूनिकेम लॉजिस्टिक्स और मार्को वैगन पर मारे गए थे। कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में यह जानकारी दी है।

उसने अब तक नकली जूतों के 15,000 जोड़े बरामद किए हैं, जिन्हें स्केचर्स ब्रैंड का बताकर बेचा जा रहा था। कंपनी इन वेंडरों के और गोदामों पर छापे मार सकती है, जिससे नकली सामान की सही संख्या का पता चले। अमेरिकी कंपनी ने अपनी याचिका में यह बात कही है।

इस बारे में पूछने पर स्केचर्स के प्रवक्ता ने मामला अदालत में होने की बात कहकर कॉमेंट करने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि कंपनी ब्रैंड, कॉपीराइट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को बचाने के लिए सही कदम उठाएगी।

कंपनी के प्रवक्ता ने बताया, ‘फ्लिपकार्ट ऑनलाइन मार्केटप्लेस है, जो सेलर्स को देश भर में ग्राहकों से जोड़ती है। हम इंटरमीडियरी के तौर पर काम करते हैं। हम अपना बिजनस ईमानदारी और कानून के मुताबिक करते हैं। हम इस मामले पर कुछ कॉमेंट नहीं कर सकते क्योंकि यह अदालत में है।’

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी ‘फ्लिपकार्ट अश्योर्ड’ मॉडल के जरिए अपने प्लैटफॉर्म पर बिकने वाले सामान के असली-नकली होने का पता लगाती है। उसके प्लैटफॉर्म पर एक लाख से अधिक सेलर्स रजिस्टर्ड हैं। उसने नकली सामान बेचने पर कई सेलर्स को ब्लैकलिस्ट भी कर रखा है। हालांकि, ऐसा लगता है कि यह समस्या खत्म नहीं हो रही है।

हिंदी समेत कई भाषाओं में 300 ऑनलाइन कोर्स शुरू करेगी सरकार

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नई दिल्ली।  हायर एजुकेशन को डिजिटल बनाने की अपनी कोशिश के तहत एचआरडी मिनिस्ट्री अपने ऑनलाइन पोर्टल स्वयम पर हिंदी और 10 अन्य भारतीय भाषाओं में लगभग 300 ऑनलाइन कोर्स पेश करेगी।

अगले तीन महीनों में शुरू होने वाले ये कोर्स क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजिनियर्स के लिए टेक्निकल इंग्लिश, मैनेजमेंट अकाउंटिंग, डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम और ऐडवर्टाइजमेंट ऐंड पब्लिसिटी जैसे विषयों पर होंगे।

इन कोर्स का मकसद सॉफ्ट स्किल्स को डिवेलप करना और एजुकेशन को बेहतर बनाना है। कोर्स के अंत में परीक्षाएं पास करने के बाद छात्रों को सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। हिंदी के साथ ही उड़िया, तमिल और कन्नड़ जैसी भाषाओं में ये कोर्स उपलब्ध होंगे।

एचआरडी मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया, ‘इसमें अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है। देश में विभिन्न भाषाओं के साथ 22 राज्य हैं। हम सामान्य भाषाओं के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना चाहते हैं।’

कोर्स को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी दिल्ली और चेन्नई के प्रफेसरों की अगुवाई में एक्सपर्ट्स की एक टीम विकसित कर रही है। लगभग 76 यूनिवर्सिटीज ने स्वयम के जरिए किए गए कोर्स के क्रेडिट ट्रांसफर को पहले ही अनुमति दी है। स्वयम एक MOOC (मैसिव ऑनलाइन ओपन कोर्स) प्लैटफॉर्म है।

इसकी शुरुआत एचआरडी मिनिस्ट्री ने इस वर्ष जुलाई में की थी। अधिकारियों ने बताया कि हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में कोर्स शुरू करने से छात्रों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार 2018 तक स्वयम पर एक करोड़ एनरोलमेंट का लक्ष्य हासिल करना चाहती है।

स्वयम देश में विकसित एक आईटी प्लैटफॉर्म है। इस पर कहीं भी और किसी भी समय कोर्स तक पहुंचा जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि मिनिस्ट्री विदेशी इंस्टिट्यूट्स से भी कोर्स और फैकल्टी को लाने पर विचार कर रही है।

रुपाणी के शपथ ग्रहण में पीएम मोदी का रोड शो

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गांधीनगर। गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी-एनडीए शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों के अलावा कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो रहा है। इसे देश में बड़े हिस्से पर राज कर रही बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है।

मंगलवार सुबह अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचे पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा विजय रुपाणी और अन्य नेता भी पहुंचे। इसके बाद पीएम मोदी ने एयरपोर्ट से लेकर सचिवालय तक रोड शो किया जहां विजय रुपाणी और नितिन पटेल के साथ 20 मंत्री शपथ लेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो के दौरान पूरे रास्ते में कई कार्यक्रम होते रहे। लोगों ने ढोल बजाकर पीएम का स्वागत किया। इसी के साथ गुजरात में बीजेपी की छठी बार सरकार बनने जा रही है। शपथ समारोह में हिस्सा लेने के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार अलावा केंद्र के कई बड़े मंत्री शामिल हो रहे हैं।

बता दें कि बीजेपी ने हालिया चुनाव में 182 सीटों वाले गुजरात विधानसभा की 99 सीटों पर जीत हासिल की है। रुपाणी और नितिन पटेल को क्रमशः विधायक दल का नेता और उपनेता चुना गया है। नितिनउपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

शपथ ग्रहण समारोह को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने गांधीनगर को किले में तब्दील कर दिया है। हेलिपैड ग्राउंड में तीन मंच बनाए गए हैं। एक शपथ ग्रहण के लिए, एक वीवीआईपी के लिए और तीसरा धार्मिक संतों के लिए। शपथ ग्रहण के बाद रुपाणी प्रधानमंत्री मोदी और हाई प्रोफाइल गेस्ट के लिए लंच का आयोजन करेंगे।