नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ने से कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौता करना बेहद मुश्किल है और जब तक तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले मर्चेंट शिप्स को निशाना बनाना बंद नहीं करता, तब तक उस पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा। आइए समझते हैं कि इसका भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।
बुधवार को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब 1% की तेजी के साथ 110.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले मंगलवार को भी कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा था। निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति के संकेतों पर नजर रख रहे थे।
इसी बीच सऊदी अरब के आसपास तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी। अमेरिका में कारोबार होने वाला WTI (West Texas Intermediate) क्रूड भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। मंगलवार को इसका भाव 101.79 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। Brent और WTI के बीच कीमतों का अंतर भी कम हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टकराव से बढ़ी चिंता
दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई के लिहाज से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम समुद्री रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शांति समझौते को मुश्किल बताया है। दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि जब तक वॉशिंगटन उसकी शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का फैसला नहीं होगा। ईरान ने अपने अनुमानित 400 किलोग्राम परमाणु सामग्री को रूस की निगरानी में सौंपने के प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया है। मंगलवार को अमेरिका और ईरान के बीच समझौता करीब होने के दावों को भी गलत बताया गया। इससे बाजार में शांति की उम्मीदों को झटका लगा और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
इस साल 75% से ज्यादा चढ़ा कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने इस साल तेल बाजार को अस्थिर बनाए रखा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत इस साल अब तक 75% से ज्यादा बढ़ चुकी है। इस तेजी का असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। पेट्रोल और डीजल जैसे रिफाइंड फ्यूल की कीमतों पर भी सप्लाई का दबाव दिखाई दे रहा है। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर महंगाई पर पड़ने के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार को भी प्रभावित कर सकता है।

