सौरव और आशुतोष को बड़ी राहत, एसईएम कोर्ट ने रिहा करने का दिया आदेश

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जंतर-मंतर डीनोटिफाई था तो गए क्यों, हाईकोर्ट बोला- ‘आप Gen-Z नहीं हैं’

नई दिल्ली। News Update: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को स्पेशल एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है। दोनों नेताओं की दो दिन की बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें बुधवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में कोर्ट के सामने पेश किया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों की तीन दिन की और न्यायिक हिरासत की मांग की, लेकिन कोर्ट ने दोनों को रिहा करने का आदेश दे दिया।

सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हिरासत की अवधि खत्म होने पर दोनों को दोबारा SEM कोर्ट में पेश किया गया। अब कोर्ट के रिहाई के आदेश के बाद इस मामले में दोनों नेताओं को बड़ी राहत मिली है।

CJP नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट से वापस ली याचिका: इससे पहले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका को बुधवार को वापस ले लिया। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की कोर्ट ने उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ सौरव और आशुतोष दिल्ली हाईकोर्ट गए थे।

अदालत ने दास और रांका को याचिका वापस लेने की इजाजत देते हुए साफ किया कि उन्होंने केस के मेरिट पर टिप्पणियां नहीं कीं। सीजेपी नेताओं ने मंगलवार को याचिका दायर करते हुए रात को ही इस पर सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, छुट्टी की वजह से ऐसा संभव नहीं हुआ, लेकिन बुधवार सुबह इसे जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया था।

सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को तब हिरासत में लिया गया था जब वे प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित किए जा चुके जंतर-मंतर पर गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश करके सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। बाद में उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया गया। एसईएम कोर्ट ने उन्हें पहले 5 और फिर दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

जस्टिस प्रसाद ने सीजेपी के सह-संयोजकों की ओर से पेश वकील से कहा कि वे एसईएम के सामने बुधवार को होने वाली सुनवाई का नतीजा देखें और यदि उनकी शिकायत बरकरार रहती है तो अपीलीय अदालत का रुख करें। अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करना उचित कानूनी उपाय नहीं है।

आपको लेकर अब सवाल भी होंगे: अदालत
अदालत ने नीट पेपर लीक के खिलाफ जुलाई में जंतर-मंतर पर किए गए आंदोलन का भी जिक्र किया और सीजेपी को समझाया कि तब और अब में क्या फर्क है। जस्टिस प्रसाद ने कहा, ‘तब (जुलाई में) यह एक छात्र आंदोलन था। तब बच्चे थे वहां और अब मुद्दा अलग है। लोग वही हैं, मुद्दा बदल रहा है।

सही है? अगला सवाल होगा कि आप कौन हैं, आप क्या हैं? आपका क्या संबंध है? आप की संस्था का उद्देश्य क्या है? कृपया समझिए जब शांति और व्यवस्था को लेकर आशंका होगी तो इन सभी सवालों के महत्व होंगे।’ अदालत ने ‘रेजीम चेंज’ को लेकर हुई बातों का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह जब होता है तो बैलेट (चुनाव) के जरिए होता है।