कोटा। भारतीय रेलवे ने डिजिटल इंडिया और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए रेलवे कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए पास जारी करने की संपूर्ण व्यवस्था को पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया है।
रेलवे बोर्ड के नवीन निर्देशों के अनुसार अब सभी प्रकार के प्रिविलेज पास, पीटीओ (परचेज ट्रेवल ऑर्डर), ड्यूटी चेक पास, सेवानिवृत्ति के पश्चात देय पूरक पास तथा मृत्यु के पश्चात देय पास केवल मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) के ई-पास/पीटीओ मॉड्यूल के माध्यम से ही जारी किए जाएंगे।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों और पेंशनरों को पास प्राप्त करने के लिए अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं और कागजी औपचारिकताओं से राहत मिलेगी। कर्मचारी अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे तथा पास की स्थिति की जानकारी भी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होगी।
उन्होंने बताया कि नई प्रणाली रेलवे के हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल कार्यसंस्कृति को भी मजबूत करेगी। मैनुअल पास बुक, पूर्व-मुद्रित स्टेशनरी तथा कागजी अभिलेखों की आवश्यकता समाप्त होने से कागज की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान मिलेगा। साथ ही रिकॉर्ड का डिजिटल रख-रखाव अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं सुगम होगा।
नई व्यवस्था के अंतर्गत दिव्यांग कर्मचारियों एवं सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के आवेदन भी एचआरएमएस प्रणाली के माध्यम से ही संसाधित किए जाएंगे। इससे सभी श्रेणियों के लाभार्थियों को एक समान, पारदर्शी एवं त्वरित सेवा उपलब्ध हो सकेगी तथा पास जारी करने की प्रक्रिया में पूर्ण एकरूपता सुनिश्चित होगी।
यह व्यवस्था समस्त जोनल रेलवे, रेलवे सार्वजनिक उपक्रमों, केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों, आईआरसीटीसी तथा सीआरआईएस में लागू होगी। रेलवे प्रशासन का मानना है कि डिजिटल पास प्रणाली न केवल कर्मचारियों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि स्मार्ट, पेपरलेस और पर्यावरण-अनुकूल रेलवे के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

