नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं ने सोमवार को पार्टी नेतृत्व को एक और झटका दिया और ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय को अध्यक्ष बना दिया है। हालांकि, नेता पूर्व मुख्यमंत्री को लेकर नरम रुख अपना रहे हैं और सांसद अभिषेक बनर्जी पर जमकर भड़के हुए हैं।
खबर है कि ममता को सलाहकार बनाने का ऑफर भी दिया गया है। अटकलें हैं कि जल्द ही बागी गुट ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग का रुख कर सकता है।
रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है। कहा जा रहा है कि इस गुट ने प्रभावी रूप से अभिषेक बनर्जी का अधिकार भी छीन लिया है। ममता ने साल 1997 में कांग्रेस से अलग होने के बाद 1998 में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। पार्टी साल 2011 में पहली बार सत्ता में आई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिताब्रता ने साफ कर दिया है कि सोमवार को हुई मीटिंग के दौरान अभिषेक बनर्जी को लेकर कोई भी चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा, ‘कौन हैं अभिषेक?’ खास बात है कि बंगाल चुनाव में हार के बाद से ही अभिषेक के काम करने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं और खुलकर आलोचना कर रहे हैं
उन्होंने कहा, ‘यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे।’
बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में न्यू टाउन के एक होटल में आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि अरूप रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।
पूर्व मंत्री अरूप रॉय और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि रिताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
अब कितने विधायक बचे
4 मई को जब विधानसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान हुआ, तब टीएमसी की झोली में 80 सीटें आई थीं। हालांकि, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को गढ़ मानी जाने वाली भवानीपुर से हार का सामना करना पड़ा था। अब मई के अंत में ही पार्टी के विधायक दल में फूट पड़ने की खबरें आने लगी थीं और रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई में कहा जा रहा है कि 64 से ज्यादा विधायकों ने अलग रुख अपना लिया है।
खास बात है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में टीएमसी ने रिताब्रता और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया था। इस लिहाज से पार्टी के पास महज 16 विधायक ही रह गए हैं।
दिल्ली में भी झटका
ममता बनर्जी को लगे झटके कोलकाता तक सीमित नहीं रहे। पार्टी के 28 में से 20 सांसद बागी हो गए और छोटे से दल नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए। इसके साथ ही पार्टी के लोकसभा में सांसदों की संख्या घटकर 8 पर आ गई है।
खास बात है कि इनमें सुप्रीमो बनर्जी की करीबी मानी जाने वालीं सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार समेत कई बड़े नाम भी शामिल हैं। इधर, राज्यसभा में 13 सांसदों वाली टीएमसी के 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, कोयल मलिक और प्रकाश बरिक हैं।

