भारत-अमेरिका के रिश्तों के लिए संकट मोचक बना ये शख्स, जानिए कैसे

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पेरिस। फ्रांस में G7 की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब एक दूसरे से हाथ मिलाया तो यह सामान्य हैंडशेक नहीं था। यह 16 महीनों की कूटनीतिक कोशिशों का नतीजा था, जो 17 जून को दोनों नेताओं की मुलाकात के तौर पर सामने आया।

विदेश नीति के जानकारों के लिए फ्रांस में पीएम मोदी और ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक सिर्फ एक तस्वीर खिंचवाने का मौका भर नहीं थी, यह कहीं ज्यादा अहम घटना थी। इसके पीछे 21वीं सदी की जरूरी भू-राजनीतिक साझेदारी को बचाने की सफल कोशिश शामिल थी।

इस मुलाकात को संभव बनाने के केंद्र में जो एक व्यक्ति प्रमुख था, वह भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर थे। सर्जियो गोर दोनों देशों के बिगड़ते रिश्तों को बचाने के लिए संकटमोचक बनकर उभरे।

इसे समझने के लिए ट्रंप और मोदी की 16 महीने के अंतराल की मुलाकात को दो अलग-अलग दौर में देखना होगा। पहले 8 महीने कूटनीतिक रिश्तों में गिरावट के और उसके बाद 8 महीने मुश्किल और मेहनत भरे सुधार के।

साल 2025 में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के एक महीने बाद ही फरवरी में पीएम मोदी ने वॉशिंगटन का दौरा किया था, जहां दोनों नेताओं ने मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद जबरदस्त उम्मीदें जगी थीं, वे बहुत तेजी से गायब हो गईं।

लोगों को बहुत ज्यादा उम्मीद थी कि भारत नई ट्रंप सरकार के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता करने वाला पहली बड़ी शक्ति बनेगा। लेकिन भारत ने अपनी आपत्तियां जाहिर कीं और यह नहीं हो सका।

इसके बाद एक के बाद एक कई संकट आए। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तीखा सैन्य टकराव हुआ, जिसमें लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ।

इसके बाद पाकिस्तान और अमेरिका के बीच तेजी से नजदीकी बढ़ी। ट्रंप सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर की तारीफ कर रहे थे, जो भारत के खिलाफ जगह उगल रहे थे।

इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप के करीबियों में शुमार होने वाले लोगों ने सार्वजनिक रूप से भारत की आलोचना की और संवेदनशील घरेलू मुद्दों पर बयानबाजी की। इसमें ट्रंप कैबिनेट के मंत्री भी शामिल थे। इसने तनाव को और बढ़ा दिया। इन सबसे बीच ट्रंप ने भारत पर दंडात्मक टैरिफ लगा दिया, जिससे कूटनीतिक रिश्ते पूरी तरह ठंडे पड़ गए।

ऐसे समय में जब दोनों देशों के लिए गतिरोध टूटता नहीं दिख रहा था, ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत का अगला राजदूत बनाने की घोषणा की। सितम्बर में गोर सीनेट की विदेश कमेटी के सामने अपने नाम की पुष्टि के लिए पेश हुए।

इसके एक सप्ताह बाद 17 सितम्बर को ट्रंप ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया। इसे रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना गया।

अक्टूबर 2025 में गोर की नियुक्ति को सीनेट से मंजूरी मिल गई। इसके दो दिन बाद उन्होंने वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के दीपावली समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वॉइट हाउस में भारत का अब भी एक दोस्त है। संकेत साफ था कि बातचीत के रास्ते खुले हैं। अगले ही दिन गोर नई दिल्ली में थे और राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी को पहुंचाया।

भारत के पक्ष में बदलने लगा माहौल
इसके बाद गोर वॉशिंगटन वापस लौटे तो राजनीतिक माहौल बदल रहा था। अमेरिकी मीडिया में भारत-विरोधी बयानबाजी गायब हो गई थी। नई दिल्ली के आलोचक अचानक खामोश हो गए थे। जनवरी 2026 में गोर नई दिल्ली लौटे तो कूटनीतिक कामकाज तेजी से आगे बढ़ा। कुछ ही सप्ताह में अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम व्यापार समझौता हुआ, जिसमें 25 प्रतिशत के दंडात्मक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। यह एक अहम पड़ाव था।

इसके बाद पैक्स सिलिका की बारी आई, जिसमें भारत को शामिल कराने के लिए गोर ने जरूरी कदम उठाए। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में उन्होंने अमेरिका की यात्रा की जिसने विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा की नींव रखी।

ट्रंप और पीएम मोदी की मुलाकात
गोर की मेहनत का असली नतीजा 17 जून को G7 समिट में दिखाई दिया। यहां एक बार फिर ट्रंप और मोदी की केमिस्ट्री दिखाई दी। पीएम मोदी ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं जाहिर कीं। वहीं, ट्रंप ने भारत के लिए खुलकर समर्थन दिया और कहा कि अगर कभी भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका उसकी रक्षा के लिए आगे आएगा। यह गोर की छह महीने की कोशिशों का नतीजा है जिसने एक बार फिर संबंधों को पटरी पर ला दिया है।