नई दिल्ली। Yellow peas import: पीली मटर पर आयात शुल्क लगने का असर अब इसके आयात पर देखने को मिल रहा है। इस शुल्क के बाद भारत में पीली मटर के आयात में भारी गिरावट आई है। आयात शुल्क के साथ ही पिछला कैरीओवर स्टॉक ज्यादा होने से भी आयात सुस्त पड़ा है। आयातित पीली मटर के दाम घरेलू मटर से ज्यादा हैं। इसलिए भी आयात में कमी को बल मिला है।
वर्ष 2025-26 के दौरान देश में पीली मटर के आयात में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। उक्त वर्ष की अप्रैल-फरवरी अवधि के दौरान देश में 10.58 लाख टन पीली मटर का आयात हुआ है, जबकि वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में 21.07 लाख टन पीली मटर आयात हुई थी।
जाहिर है वर्ष 2025-26 में फरवरी तक पीली मटर के आयात में 50 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस साल फरवरी में महज 57,434 टन ही पीली मटर आयात हुई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 1,46,048 टन था।
पीली मटर के आयात में गिरावट की बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए पिछले साल नवंबर महीने से पीली मटर के आयात पर 30 फीसदी शुल्क लगाना है।
भारत दलहन और अनाज संघ (IPGA) के सचिव सतीश उपाध्याय ने कहा कि 30 फीसदी आयात शुल्क के बाद भारत में पीली मटर की लेंडिंग कॉस्ट बढ़ गई। जिससे आयात में गिरावट आने लगी।
आयातित पीली मटर की कीमत इस समय 4,200 से 4,300 रुपये है, जबकि देसी मटर की कीमत 4,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे हैं। इसके अलावा शुल्क लगाने के समय भारत में पीली मटर का कैरीओवर स्टॉक भी काफी था। डॉलर की तुलना में रुपया 8 से 9 फीसदी कमजोर होने के कारण भी आयात में कमी आई को बल मिला।
दलहन उद्योग का कहना है कि आगे भी पीली मटर का आयात सुस्त ही रह सकता है क्योंकि युद्ध के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है। चीन की खरीद के कारण कनाड़ा के किसान पीली मटर के दाम घटाने को तैयार नहीं हैं। उपाध्याय ने कहा कि कमजोर रुपया और ऊंची परिवहन लागत को देखते हुए सरकार को आयात शुल्क हटाना चाहिए, तभी पीली मटर के आयात में आ रही कमी दूर हो सकती है।

