नश्वर संसार में सिर्फ आत्मा ही शाश्वत सत्य है: मुनि विवर्धन सागर

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कोटा। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के चंद्रप्रभु दिगंबर जैन जिनालय में शनिवार को आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री विवर्धन सागर महाराज ने व्यसनमुक्ति, ब्रह्मचर्य और धर्ममय जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संसार की सभी वस्तुएं नश्वर हैं, केवल आत्मा शाश्वत है। जीवन में प्रत्येक धार्मिक क्रिया का उद्देश्य समझना जरूरी है। बिना लक्ष्य के की गई क्रियाएं सार्थक नहीं होतीं।

मुनिश्री ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना भी आवश्यक है। माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान धर्ममार्ग पर चले, लेकिन पूर्व संस्कारों के अभाव में कई बच्चे मंदिर जाने से भी कतराते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन केवल परंपरा नहीं, बल्कि उनके गुणों का स्मरण कर आत्मकल्याण की प्रेरणा लेने का माध्यम हैं। जिस प्रकार जल के बिना मछली व्याकुल होती है, उसी प्रकार साधक को प्रभु के स्मरण के प्रति अनुराग रखना चाहिए। गुणों के स्मरण से उन्हीं गुणों को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है।

मुनिश्री ने आचार्य श्री विराग सागर महाराज के धर्म और समाज के प्रति योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अहिंसा, व्यसनमुक्ति और शाकाहार के प्रचार के लिए संगोष्ठियों तथा विद्यालयों में विद्यार्थियों की परीक्षाओं के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि धर्मसभा में जयकुमार हरसौरा, टीकम पाटनी, प्रेमचंद दुगेरिया, वीरेंद्र मारवाड़ा, नेमीचंद जैन, रामबाबू जैन, ऋषभ बाकलीवाल, अशोक पापड़ीवाल, सुरेंद्र पहाड़िया, दीपचंद तथा अनिल कुमार मित्तल परिवार को विवर्धन सागर महाराज को आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।